Netherlands VWO 4 (bovenbouw, 2e fase) Arts: drama
अध्याय: 2
1. Drama theory (part 1)
Drama and society · History of Western theatre
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।
- रंगमंच का इतिहास: यूनानी उत्सवों से ब्लैक बॉक्स तक – रंगमंच अनुष्ठान, गीत और कथा से शुरू हुआ। प्राचीन यूनान (लगभग 500 ई.पू.) में नाटक धार्मिक उत्सवों का हिस्सा थे, खुले रंगमंचों में थिएट्रॉन, ऑर्केस्ट्रा और स्केने के साथ, मुखौटों और कोरस के साथ। शास्त्रीय एशिया ने अपने रूप बनाए: नाट्यशास्त्र और रस के सिद्धांत वाला संस्कृत नाटक, जापान का नो और बाद में काबुकी, चीनी ऑपेरा। मध्यकालीन यूरोप में धार्मिक नाटक गाड़ियों पर होते थे; पुनर्जागरण इटली में कॉमेडिया देल’आर्ते; एलिज़ाबेथन लंदन में आगे निकले मंच वाले गोल रंगमंच (शेक्सपियर)। 1600 के दशक से प्रोसीनियम मेहराब ने रंगे दृश्यों को फ़्रेम किया, और 1800 के अंत में यथार्थवाद (इब्सन, चेख़व) रोज़मर्रा के कमरे और 'चौथी दीवार' लाया। 1900 के दशक में स्तानिस्लावस्की का सच्चा अभिनय, ब्रेख़्त का एपिक थिएटर, शारीरिक और प्रयोगधर्मी रंगमंच और लचीले ब्लैक बॉक्स आए। मंच का आकार, समाज और दर्शक हमेशा तय करते हैं कि नाटक कैसे लिखे और खेले जाएँ।
2. Acting and shaping
Acting · Shaping roles and scenes
- अभिनय: किरदार को ज़िंदा करना – अभिनय यानी किसी किरदार को दर्शकों के सामने सच्चाई से दिखाना। अभिनेता पहले परिस्थितियाँ (कौन, कहाँ, कब) और किरदार का लक्ष्य (उसे क्या चाहिए) समझता है। फिर शरीर (मुद्रा, हाव-भाव, स्तर, रुतबा) और आवाज़ (ज़ोर, रफ़्तार, सुर, ठहराव) से उसे दिखाता है। मंच पर अभिनय क्रिया और प्रतिक्रिया है: साथी को सुनो और जवाब दो। टाइमिंग, पॉज़ और तनाव दृश्य को आकार देते हैं, और रंगमंच असली सामाजिक मुद्दों को भी उठा सकता है।
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।