विवाद-बिंदु (points of issue)
मुद्दा वह सवाल है जिस पर समझदार लोग भी असहमत हों, जैसे "क्या स्कूल में फ़ोन की इजाज़त होनी चाहिए?" यह सीधा तथ्य नहीं है। "क्या पृथ्वी गोल है?" मुद्दा नहीं है, पर "क्या हमें अंतरिक्ष शोध पर ज़्यादा खर्च करना चाहिए?" मुद्दा है।
विवाद-बिंदु वे मुख्य बातें हैं जिन पर असहमति है। खोजने के लिए पूछो: "यहाँ लोग किस बात पर बहस करेंगे?" और "दाँव पर क्या है?"
- पढ़ाई में मदद: क्या फ़ोन पढ़ने में मदद कर सकते हैं?
- ध्यान भटकना: क्या वे पाठ से ध्यान हटाते हैं?
- सुरक्षा: क्या आपात स्थिति में माता-पिता बच्चे तक पहुँच सकते हैं?
- बराबरी: क्या सब छात्रों के पास फ़ोन है?
नज़रिए (viewpoints)
नज़रिया वह जगह है जहाँ से कोई मुद्दे को देखता है। यह इस पर निर्भर है कि वह कौन है और उसे क्या ज़रूरी लगता है। छात्र, शिक्षक, अभिभावक और प्रधानाचार्य अलग जगहों पर खड़े हैं, इसलिए अलग बिंदुओं पर ज़ोर देते हैं। अच्छा सोचने वाला किसी एक नज़रिए की नकल नहीं करता। वह मूर्ति के चारों ओर घूमने की तरह मुद्दे के चारों ओर घूमकर हर पहलू देखता है।
नज़रिए जानने के निष्पक्ष सुझाव
- हर नज़रिए को ऐसे लिखो कि उसका मालिक भी हामी भरे।
- देखो कि हर व्यक्ति किस बिंदु पर सबसे ज़्यादा ज़ोर देता है।
- पूछो कि हर पक्ष को किसका डर या किसकी उम्मीद है।
- वे बिंदु खोजो जहाँ नज़रिए एक-दूसरे से मिलते हैं। वहीं से शुरुआत अच्छी रहती है।
पक्ष (positions)
पक्ष (position, यानी रुख) नज़रिए देखने के बाद मुद्दे पर आपका साफ़ जवाब है। यह "मुझे पसंद है" से ज़्यादा है। यह कारणों वाला दावा है।
पक्ष सिर्फ़ हाँ या नहीं नहीं होते
"हाँ" और "नहीं" के बीच कई बीच के पक्ष होते हैं, जैसे "हाँ, नियमों के साथ" या "सिर्फ़ कुछ जगहों पर"। बीच का पक्ष अक्सर ज़्यादा मज़बूत होता है, क्योंकि वह दोनों तरफ़ की चिंताओं का जवाब देता है।
पक्ष कैसे बनाएँ
- विवाद-बिंदुओं की सूची बनाओ।
- तय करो कि आपके लिए कौन-से बिंदु सबसे ज़रूरी हैं और क्यों।
- अपना जवाब चुनो। उसे एक वाक्य में कहो।
- दो-तीन कारण दो, हर एक किसी विवाद-बिंदु से जुड़ा।
- दूसरी तरफ़ के सबसे मज़बूत बिंदु का जवाब दो।
उदाहरण: "स्कूल में फ़ोन की इजाज़त होनी चाहिए, नियमों के साथ। वे पढ़ाई में मदद करते हैं (बिंदु 1), और पाठ के दौरान बस्ते में बंद रखने जैसे नियम ध्यान भटकने की चिंता का जवाब देते हैं (बिंदु 2)।"
खुले मन से रहो
अगर बेहतर कारण मिले तो पक्ष बदल सकते हैं। यह अच्छी सोच की निशानी है, कमज़ोरी नहीं। दूसरी राय रखने वाले व्यक्ति पर हमला मत करो। सिर्फ़ कारणों पर बात करो।
खुद करके देखो
स्कूल का कोई मुद्दा चुनो, जैसे "क्या स्कूल का दिन देर से शुरू होना चाहिए?" चार विवाद-बिंदु लिखो। चार लोगों (दोस्त, अभिभावक, शिक्षक, छोटा बच्चा) से पूछो कि वे किस बात पर ज़ोर देते हैं। फिर अपना पक्ष एक पंक्ति में लिखो और बिंदुओं से जुड़े दो कारण दो। 3D में झंडे को "हाँ" से "नहीं" तक सरकाओ और देखो मज़बूत बिंदु कैसे बदलते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुद्दा = ऐसा सवाल जिस पर लोग असहमत हों (सीधा तथ्य नहीं)
- विवाद-बिंदु = वे मुख्य बातें जिन पर असहमति टिकी है
- नज़रिया = वह जगह जहाँ से कोई देखता है; इससे तय होता है वह किस पर ज़ोर देगा
- पक्ष = जवाब + विवाद-बिंदुओं से जुड़े कारण
- याद रखो: मुद्दा > बिंदु > नज़रिए > पक्ष
हल किए गए उदाहरण
1. मुद्दा: "क्या कक्षा 8 के छात्रों को रविवार को गृहकार्य मिलना चाहिए?" तीन विवाद-बिंदु लिखो।
संभव बिंदु: (1) आराम और खेल का समय, (2) सीखने के लिए अभ्यास, (3) परिवार का समय या उन बच्चों के साथ बराबरी जिन्हें घर पर मदद कम मिलती है। जिस बात को लोग अलग तरह से तौलें, वही अच्छा बिंदु है।
2. मुद्दा "क्या गाँव में चौड़ी सड़क बने?" पर किसान, दुकानदार और सड़क किनारे रहने वाले गाँववासी के नज़रिए एक-एक पंक्ति में लिखो।
किसान: चौड़ी सड़क से फ़सल मंडी तक आसानी से जाएगी। दुकानदार: ज़्यादा आवाजाही से ज़्यादा ग्राहक आएँगे। सड़क किनारे वाला गाँववासी: शोर और बच्चों को खतरा; घर भी जा सकता है। हर नज़रिया अलग बिंदु पर ज़ोर देता है।
3. "क्या बाज़ार में प्लास्टिक थैलियाँ बंद हों?" पर दो जुड़े कारणों के साथ पक्ष लिखो।
पक्ष: प्लास्टिक थैलियाँ बंद हों, पर कपड़े के थैले सस्ते किए जाएँ। कारण 1 (पर्यावरण): थैलियाँ नालियाँ जाम करती हैं और जानवरों को नुकसान पहुँचाती हैं। कारण 2 (खर्च का बिंदु): सस्ते कपड़े के थैले दुकानदारों की अतिरिक्त खर्च की चिंता का जवाब देते हैं।
4. एक छात्र लिखता है: "मुझे लगता है गृहकार्य बुरा है क्योंकि मुझे उससे नफ़रत है।" इस पक्ष में क्या कमी है?
इसमें किसी विवाद-बिंदु से जुड़ाव नहीं है और ऐसा कारण भी नहीं जिसे दूसरे जाँच सकें। बेहतर पक्ष: "गृहकार्य छोटा हो, क्योंकि लंबा गृहकार्य नींद घटाता है (सेहत का बिंदु) और छोटे काम से भी अभ्यास हो जाता है (पढ़ाई का बिंदु)।"
आम गलतियाँ
- दूसरे नज़रिए देखे बिना पक्ष ले लेना।
- सीधे तथ्य को मुद्दा, या मुद्दे को तथ्य समझ लेना।
- विवाद-बिंदुओं से जुड़े कारणों की जगह भावनाएँ ("मुझे नफ़रत है") देना।
- सिर्फ़ हाँ या नहीं को ही सही मानना और मज़बूत बीच के पक्ष चूक जाना।