जानकारी की जाँच क्यों?
हम रोज़ बहुत कुछ पढ़ते-सुनते हैं: संदेश, वीडियो, पोस्ट, किताबें और खबरें। कुछ सच होती हैं। कुछ ग़लती से ग़लत होती हैं। कुछ हमें बहकाने के लिए बनी होती हैं। भरोसेमंद (विश्वसनीय) जानकारी वह है जिसके सच और निष्पक्ष होने पर हम भरोसा कर सकें।
जाँच में बस एक मिनट लगता है। इससे आप और जिनसे आप साझा करते हैं, दोनों बचते हैं।
लेखक की जाँच
लेखक वह व्यक्ति या समूह है जिसने जानकारी बनाई। तीन बातें पूछो:
- कौन है? छिपे नाम से नाम वाला बेहतर है।
- क्या उसे विषय आता है? डॉक्टर को सेहत आती है। स्कूल दफ़्तर को स्कूल का समय-सारणी पता है।
- क्या उसने ख़ुद देखा? जो वहाँ था, वह सिर्फ़ सुनने वाले से मज़बूत है।
प्राथमिक स्रोत उन लोगों या जगह से आता है जो घटना में थे। द्वितीयक स्रोत बाद में उसके बारे में बताता है। दोनों काम के हैं, पर दूसरे को ज़्यादा जाँचो।
स्रोत की जाँच: तारीख़, सबूत, मक़सद
स्रोत वह जगह है जहाँ जानकारी छपी है: वेबसाइट, किताब, सूचना या वीडियो। पूछो:
- तारीख़: क्या यह इतनी ताज़ा है? पुरानी बातें बदल चुकी हो सकती हैं।
- सबूत: क्या संख्याएँ, नाम, लिंक या चित्र हैं जिन्हें जाँचा जा सके?
- मक़सद: यह आपको बताने के लिए बना, कुछ बेचने के लिए, या डराने-भड़काने के लिए? पक्षपात यानी किसी एक ओर झुकाव। उसे पहचानो।
चिल्लाते शीर्षक, बहुत से बड़े अक्षर और "मिटने से पहले शेयर करो" जैसे शब्दों से सावधान रहो।
कई स्रोतों की तुलना
एक स्रोत ग़लत हो सकता है। इसलिए कई स्रोतों की तुलना करो। ऐसे स्रोत चुनो जो एक-दूसरे से स्वतंत्र हों, यानी जिन्होंने एक-दूसरे की नक़ल न की हो।
- अच्छे स्रोत मिलें तो भरोसा बढ़ता है।
- अगर अलग हों तो हर एक का लेखक, तारीख़ और सबूत देखो। बेहतर जाँचा हुआ मज़बूत है।
- बड़ी बात का एक ही स्रोत मिले तो रुको। कहो "अभी पक्का नहीं"।
करके देखो
घर में आया कोई फ़ॉरवर्ड संदेश लो। उसका लेखक, तारीख़ और सबूत लिखो। फिर दो और स्रोत ढूँढो। तीन पंक्तियों की तालिका बनाओ और देखो कितने मेल खाते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- भरोसेमंद = जाना-पहचाना लेखक + अच्छा स्रोत + दूसरे भी सहमत
- लेखक: कौन, विषय जानता है, ख़ुद देखा
- स्रोत: तारीख़, सबूत, मक़सद
- तुलना: 2 या अधिक स्वतंत्र स्रोत
- प्राथमिक स्रोत: घटना वालों से; द्वितीयक: बाद में बताया गया
- पक्षपात: एक ओर झुकाव
हल किए गए उदाहरण
1. एक पोस्ट कहती है "यह जूस पियो, कभी बीमार नहीं पड़ोगे"। न नाम है, न तारीख़, न सबूत। क्या यह भरोसेमंद है?
नहीं। लेखक छिपा है, तारीख़ और सबूत नहीं। मक़सद जूस बेचना हो सकता है। तीनों जाँचें फ़ेल हैं, इसलिए न मानो, न आगे भेजो।
2. शिक्षक कहते हैं पिकनिक शुक्रवार को है। स्कूल की वेबसाइट भी शुक्रवार बताती है। दोस्त कहता है गुरुवार। आप क्या तय करेंगे?
शुक्रवार। दो अच्छे स्रोत (शिक्षक और स्कूल वेबसाइट) एक मत हैं। दोस्त ने शायद ग़लत सुना। आप विनम्रता से पूछ सकते हैं कि उसने कहाँ सुना।
3. नई बस-रूट पर एक खबर 2009 की है, नाम वाले पत्रकार की, सड़क के चित्र के साथ। क्या आज के रूट के लिए चलेगी?
लेखक और सबूत अच्छे हैं, पर तारीख़ पुरानी है। सड़कें बदलती हैं, इसलिए तय करने से पहले शहर के परिवहन पेज जैसा ताज़ा स्रोत देखो।
आम गलतियाँ
- कई दोस्तों ने भेजा, इसलिए सच मान लेना। ज़्यादा लोग भेजें तो भी बात सच नहीं हो जाती।
- सिर्फ़ एक चीज़ देखना, जैसे सुंदर वेबसाइट। लेखक, स्रोत और दूसरे स्रोत भी जाँचो।
- पहला सर्च रिज़ल्ट बिना पढ़े मान लेना कि किसने लिखा।
- एक-दूसरे की नक़ल करने वाले दो स्रोतों को "अलग" स्रोत कहना।