चर्चा चलाना: संचालक का काम
संचालक वह व्यक्ति है जो चर्चा को राह दिखाता है। वह विचार का मालिक नहीं होता। वह देखता है कि समूह कैसे बात करे।
चर्चा शुरू होने से पहले संचालक चार बातें बताता है: विषय, लक्ष्य (हमें क्या तय करना है), समय और नियम (एक समय में एक बोले, पहले सुनो)। बिंदु बोर्ड पर लिख लेना अच्छा रहता है।
चर्चा के दौरान संचालक बारी देता है, समय देखता है और भटकने पर वापस लाता है: "यह रोचक है, पर आज का विषय पिकनिक की जगह है।" वह चुप सदस्य से भी पूछता है: "नेहा, आप क्या सोचती हैं?"
दूसरों की बात पर आगे बढ़ना
अच्छी चर्चा अलग-अलग भाषणों की कतार नहीं होती। हर व्यक्ति पहले कही बात से जुड़ता है। काम के वाक्य:
- "मैं आशा से सहमत हूँ, और जोड़ना चाहूँगा..."
- "मैं थोड़ा अलग सोचता हूँ, क्योंकि..."
- "तो अब तक मुख्य बात यह है... क्या यह सही है?"
संचालक मुख्य विचार को एक छोटे वाक्य में दोहराकर अगले व्यक्ति से उस पर प्रतिक्रिया माँगता है। इससे हर सदस्य देखता है कि उसकी बात काम आई, इसलिए वह ध्यान से सुनता रहता है।
सर्वसम्मति तक पहुँचना
सर्वसम्मति (consensus) का मतलब है कि पूरा समूह फ़ैसला मान सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि सबकी पहली पसंद जीती। मतलब यह है कि कोई यह नहीं कहता "मैं इसे नहीं मान सकता।"
संचालक ये कदम अपना सकता है:
- बचे हुए विकल्प बोलो (दो या तीन रखने की कोशिश करो)।
- पूछो कि हर विकल्प से क्या मिलता है और क्या खर्च होता है।
- हो सके तो सबसे अच्छे हिस्से मिला लो (सस्ती यात्रा और जिसमें सीख हो)।
- प्रस्ताव ज़ोर से बोलो और पूछो: "क्या सब इसे मान सकते हैं?"
- कोई न माने तो पूछो कि कौन-सा छोटा बदलाव मदद करेगा। समय खत्म हो जाए तो तय करो कि कैसे फ़ैसला होगा (जैसे मतदान) और साफ़ कह दो।
अंत में संचालक फ़ैसले का सार बताता है और कौन क्या करेगा।
करके देखो
तीन दोस्तों या घर वालों से "हमारी कक्षा (या घर) का एक नया नियम" पर चर्चा करने को कहो। तुम संचालक बनो। विषय, लक्ष्य, समय (10 मिनट) और नियमों से शुरू करो। हर व्यक्ति को बारी दो, कम से कम दो विचार जोड़ो, फिर जाँचो: "क्या सब इसे मान सकते हैं?" जो कदम किए उन पर निशान लगाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संचालक = खोलो + बाँटो + जोड़ो + जाँचो
- सर्वसम्मति = ऐसा फ़ैसला जिसे सब मान सकें (सबकी पहली पसंद नहीं)
- मुख्य शब्द, संचालक: जो समूह की बातचीत को राह दिखाता है
- मुख्य शब्द, कार्यसूची (एजेंडा): चर्चा के बिंदुओं की सूची
हल किए गए उदाहरण
1. तुम संचालक हो। पिकनिक की जगह पर चर्चा के लिए 3 पंक्तियों की शुरुआत लिखो।
"आज का विषय है कि हमारी कक्षा की पिकनिक कहाँ हो। हमें 10 मिनट में एक जगह चुननी है। एक समय में एक व्यक्ति बोलेगा, और जवाब देने से पहले हम सुनेंगे।" इसमें विषय, लक्ष्य, समय और नियम हैं।
2. राहुल पाँच मिनट बोल चुका है और सना ने अभी तक नहीं बोला। संचालक क्या कह सकता है?
"धन्यवाद राहुल, बात साफ़ है। सना, हमने अभी आपको नहीं सुना। आप क्या सोचती हैं?" संचालक लंबे वक्ता को धन्यवाद देता है और चुप सदस्य को बारी देता है।
3. आशा कहती है "चलो संग्रहालय चलें।" देव कहता है "संग्रहालय का टिकट महँगा है।" एक जोड़ने वाला वाक्य और सहमति का एक विचार लिखो।
जोड़ने वाला वाक्य: "देव खर्च के बारे में सही है, और आशा सीखना चाहती है। इसलिए हमें ऐसी यात्रा चाहिए जो सस्ती हो और सिखाए भी।" सहमति का विचार: संग्रहालय के निःशुल्क प्रवेश वाले दिन जाना। फिर पूछो: "क्या सब इसे मान सकते हैं?"
4. समूह बँट गया: 2 पार्क के पक्ष में, 2 किले के पक्ष में। संचालक सहमति की ओर कैसे बढ़े?
हर पक्ष से पूछो कि उसे क्या चाहिए। पार्क वाले: खेलने की जगह। किले वाले: इतिहास। सुझाओ कि बगीचे वाला ऐतिहासिक स्थल चुना जाए। जाँचो कि दोनों पक्ष मान सकते हैं या नहीं। न मानें तो समय खत्म होने से पहले मतदान जैसा उचित तरीका तय करो।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि संचालक फ़ैसला करता है। संचालक प्रक्रिया चलाता है; फ़ैसला समूह करता है।
- दो-तीन ऊँची आवाज़ों को सारा समय लेने देना और चुप सदस्यों को कभी न बुलाना।
- सर्वसम्मति को "सबको पसंद है" समझना। इसका मतलब है कि सब मान सकते हैं।
- फ़ैसला ज़ोर से बोले बिना चर्चा खत्म करना, जिससे किसी को पक्का पता नहीं रहता कि क्या तय हुआ।