चरण 1: बहुत से विचार बनाइए
पाँच मिनट लीजिए और जितने विचार आएँ सब लिख लीजिए, मूर्खतापूर्ण भी। अपने आसपास देखिए: घर, स्कूल, गली, शौक, परेशान करने वाली समस्याएँ। अभी परखिए मत। लंबी सूची से चुनने को कुछ मिलता है।
चरण 2: तीन छन्नियाँ (द्वार)
हर विचार को तीन द्वारों पर परखिए:
- रुचि: क्या मुझे सच में इसकी परवाह है? आप इस पर हफ़्तों लगाएँगे।
- समय और साधन: क्या मैं अपने समय, पैसे, औज़ारों और मदद से यह कर सकता हूँ? "बीमारी का इलाज" या "रॉकेट बनाना" यहाँ अटकता है।
- नतीजा: क्या अंत में मैं कुछ नाप सकता हूँ या साफ़ उत्पाद दिखा सकता हूँ? "कौन-सा रंग सबसे अच्छा है?" अटकता है क्योंकि नापने को कुछ नहीं।
जो विचार तीनों द्वार पार करें वही उम्मीदवार हैं। जो विचार आपको पसंद है पर अटकता है, उसे तब तक छोटा कीजिए जब तक वह पार हो जाए।
चरण 3: विषय को संकरा कीजिए
विषय बहुत बड़ा, सही या बहुत छोटा हो सकता है। उसे एक-एक क़दम संकरा कीजिए:
पानी (बहुत बड़ा) → स्कूल का पानी (क़रीब) → क्या हमारे स्कूल का नल-जल पीने लायक़ साफ़ है? (सही)।
अच्छा विषय ऐसा एक सवाल है जिसका उत्तर आप आँकड़ों से दे सकें या ऐसा उत्पाद जो आप अपने समय में बना सकें। अगर वह ऐसा छोटा तथ्य है जो एक मिनट में देखा जा सके, तो वह बहुत छोटा है।
चरण 4: लक्ष्य लिखिए
लक्ष्य आपके प्रोजेक्ट का निशाना है, एक साफ़ वाक्य में लिखा हुआ। एक काम का सूत्र: मैं [क्या करूँगा या बनाऊँगा] [किसके लिए] [कब तक]।
उदाहरण: "सत्र के अंत तक मैं स्कूल में पाँच जगहों के नल-जल की जाँच करूँगा और प्रधानाचार्य को बताऊँगा कि वह पीने लायक़ है या नहीं।"
अच्छा लक्ष्य विशिष्ट होता है (ठीक-ठीक क्या), मापने योग्य (पता चले कि कब पूरा हुआ), आपके समय में संभव और किसी के काम का।
चरण 5: लक्ष्य को कार्यों में बाँटिए
कार्य (जिन्हें उद्देश्य भी कहते हैं) वे छोटे क़दम हैं जो लक्ष्य तक पहुँचाते हैं। हर कार्य क्रिया-शब्द से शुरू होता है और उसका अंत होता है: "सुरक्षित पानी के बारे में पढ़ो", "पाँच नलों का पानी जाँचो", "नतीजे तालिका में दर्ज करो", "छोटी रिपोर्ट लिखो और प्रस्तुत करो"। चार से छह कार्य काफ़ी हैं। उन्हें क्रम में रखिए और हर एक को तारीख़ दीजिए।
करके देखिए: विषय को छोटा कीजिए
कोई बड़ा विषय चुनिए जो आपको पसंद हो (जैसे "संगीत" या "प्लास्टिक")। उसे तीन बार छोटा कीजिए जब तक वह एक सवाल न बन जाए। लक्ष्य-वाक्य और चार कार्य लिखिए। फिर 3D में विषय-आकार स्लाइडर चलाकर अपने विषय की उदाहरणों से तुलना कीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तीन द्वार: रुचि, समय और साधन, नापा या दिखाया जा सकने वाला नतीजा।
- संकरा करना: बड़ा विषय → क़रीबी विषय → एक सवाल।
- लक्ष्य-वाक्य: मैं [क्या करूँगा/बनाऊँगा] [किसके लिए] [कब तक]।
- अच्छा लक्ष्य: विशिष्ट, मापने योग्य, संभव, उपयोगी, तारीख़ के साथ।
- कार्य: 4 से 6 छोटे क़दम, हर एक क्रिया-शब्द से शुरू।
हल किए गए उदाहरण
1. क्या "अंतरिक्ष" अच्छा प्रोजेक्ट विषय है? क्यों या क्यों नहीं?
नहीं। वह बहुत बड़ा है, कोई उसे पूरा नहीं कर सकता। उसे संकरा कीजिए, जैसे "मेरे यहाँ साल भर में दिन की लंबाई कैसे बदलती है?"
2. "कौन-सा रंग सबसे अच्छा है?" किस द्वार पर अटकता है?
नतीजे वाले द्वार पर। "सबसे अच्छा" को नापने का साफ़ तरीक़ा नहीं। उसे "30 सहपाठियों को किस रंग का काग़ज़ पढ़ने में सबसे आसान लगता है?" बनाइए और आप उत्तर गिन सकते हैं।
3. स्कूल कैंटीन में खाने की बर्बादी पर प्रोजेक्ट के लिए लक्ष्य-वाक्य लिखिए।
"मार्च के अंत तक मैं दस स्कूली दिनों में कैंटीन में फेंके गए खाने को तौलूँगा और कैंटीन प्रबंधक को उसे घटाने के दो तरीक़े सुझाऊँगा।"
4. प्रोजेक्ट के 12 हफ़्ते हैं और 4 बराबर कार्य। हर कार्य को कितने हफ़्ते? 5 नलों से 3-3 नमूने लें तो कुल कितने नमूने?
12 / 4 = हर कार्य के 3 हफ़्ते। 5 × 3 = 15 नमूने।
आम गलतियाँ
- बहुत बड़ा विषय चुनना, जैसे "पानी" या "अंतरिक्ष"। उसे एक सवाल तक संकरा कीजिए।
- ऐसा विषय चुनना जिसमें नापने या दिखाने को कुछ नहीं। हमेशा पूछिए कि नतीजा क्या होगा।
- विषय और लक्ष्य मिला देना। विषय क्षेत्र है; लक्ष्य वह है जो आप उसमें करेंगे।
- बहुत बड़े या धुँधले कार्य लिखना, जैसे "प्रोजेक्ट करो"। हर कार्य छोटा और साफ़ अंत वाला बनाइए।