साक्षरता क्या है?
साक्षरता (literacy) का मतलब पढ़ और लिख पाना। यह स्कूल से बहुत पहले शुरू होती है: जो बच्चा गाने-कहानियाँ सुनता है और बड़ों को पढ़ते देखता है, वह पहले से तैयारी कर रहा है।
बच्चे पहले बोलना सीखते हैं। लिखना दूसरी व्यवस्था है जो निशानों से बोली की नक़ल करती है। इसीलिए इसमें सालों का अभ्यास लगता है।
लिखना सीखने के चरण
शोधकर्ता लेखन के विकास को चरणों में बताते हैं। दो आसान तरीक़े:
- बार्कले के शुरुआती चरण: आड़ी-तिरछी लकीरें, लहरदार "नकली लिखावट", नकली अक्षर (अक्षर जैसे आकार), असली अक्षर, मनगढ़ंत वर्तनी, फिर सही वर्तनी।
- क्रोल के चार चरण: तैयारी (पेंसिल और अक्षरों पर पकड़), सुदृढ़ीकरण (जैसा बोलते हैं वैसा छोटा-सरल लिखते हैं), भेद (सीखते हैं कि लिखना बोलने से अलग है और पाठक के हिसाब से शैली बदलते हैं), एकीकरण (अपनी आवाज़ मिलती है)।
उम्र सिर्फ़ मोटा अंदाज़ा है। हर बच्चा अपनी रफ़्तार से चलता है।
पढ़ना सीखने के चरण
पढ़ना भी चरणों में बढ़ता है: कहानी सुनना और चित्र देखना; अक्षर पहचानना; डिकोडिंग (अक्षर से ध्वनि और ध्वनि से शब्द); धाराप्रवाह पढ़ना; और अंत में सीखने के लिए पढ़ना, जब किताबों से नया ज्ञान मिलता है।
- फ़ोनिक्स (ध्वनि-विधि) अक्षरों की ध्वनियाँ और उन्हें जोड़ना सिखाती है: क-म-ल से "कमल"।
- पूरा शब्द (सामान्य शब्द) विधि में आम शब्दों को तस्वीर की तरह सिखाते हैं, क्योंकि वे सरल नियम पर नहीं चलते।
- अच्छी पढ़ाई दोनों का इस्तेमाल करती है।
मनगढ़ंत वर्तनी: अच्छा संकेत
जब बच्चा "गया" की जगह "गाया" या "कमल" की जगह "कमल्" जैसा कुछ लिखता है, वह सुनी हुई ध्वनि को अक्षर से जोड़ रहा है। इसे मनगढ़ंत वर्तनी (invented spelling) कहते हैं। यह सोच दिखाती है, लापरवाही नहीं। आगे चलकर वह सही वर्तनी का नियम सीखता है।
बोलना, लिखना और बहु-माध्यम पाठ
माध्यम (mode) वह रास्ता है जिससे संदेश पहुँचता है।
- बोला हुआ: तेज़, ठहराव, दोहराव और आवाज़ के साथ। सुनने वाला तुरंत जवाब दे सकता है।
- लिखा हुआ: सोचा-समझा, सुधारा जा सकता है, बाद में पढ़ा जाता है। विराम-चिह्न और वर्तनी चाहिए।
- बहु-माध्यम (multimodal): शब्द के साथ चित्र, ध्वनि, वीडियो या ढाँचा, जैसे चित्र-कथा, कॉमिक या इमोजी वाला संदेश।
बच्चे माध्यमों के बीच आना-जाना सीखते हैं। ज़ुबानी कहानी लिखित कहानी बनती है, फिर कैप्शन वाला चित्र।
बच्चों के लिए बोलचाल और लेखन की विधाएँ
विधा (genre) अपने ढर्रे वाला पाठ-प्रकार है। बच्चे विधाओं से जल्दी मिलते हैं: सोते समय की कहानियाँ (कथा), विधि और नियम (निर्देश), "बताओ-दिखाओ" (वृत्तांत), पत्र और संदेश (निजी), जानकारी की किताबें (तथ्य)।
बड़े होकर वे सीखते हैं कि हर विधा के अपने शब्द और ढाँचा हैं। कहानी "एक बार की बात है" से शुरू होती है। पकवान-विधि सूची से।
बड़े और स्कूल कैसे मदद करें
- रोज़ ज़ोर से कहानी पढ़ो और उस पर बात करो।
- बच्चों को अपनी सूची और कार्ड "लिखने" दो।
- पहले विचार की तारीफ़ करो, फिर एक बार में एक वर्तनी ठीक कराओ।
- लिखने के असली कारण दो: कार्ड, लेबल, संदेश।
खुद करो
3D में उम्र 2 से 12 तक खिसकाओ और ज़ोर से बोलो कि हर पायदान पर बच्चा क्या पढ़ या लिख सकता है। घर पर किसी छोटे बच्चे से ख़रीदारी सूची "लिखने" को कहो, फिर उसे पढ़कर सुनाने को कहो। देखो उसे लिखने के बारे में पहले से क्या पता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सीढ़ी: निशान → अक्षर और ध्वनियाँ → शब्द जोड़ना → वाक्य और कहानी → धाराप्रवाह और लचीला
- बार्कले: लकीरें → नकली लिखावट → नकली अक्षर → असली अक्षर → मनगढ़ंत वर्तनी → सही वर्तनी
- क्रोल: तैयारी → सुदृढ़ीकरण → भेद → एकीकरण
- फ़ोनिक्स = अक्षर-ध्वनि संबंध; जोड़ना क + म + ल = कमल
- माध्यम: बोला हुआ, लिखा हुआ, बहु-माध्यम
हल किए गए उदाहरण
1. बच्चा "मैं सकूल जाता हूँ" लिखता है। उसके चरण के बारे में क्या कहोगे?
वह मनगढ़ंत वर्तनी के चरण में है। अक्षर उन ध्वनियों से मेल खाते हैं जो वह सुनता है, यानी उसे ध्वनि और अक्षर का रिश्ता समझ आ गया है। अब शिक्षक "स्कूल" की सही वर्तनी का ढर्रा दिखा सकता है।
2. सात साल का बच्चा बिलकुल बोलने जैसा लिखता है, बार-बार "फिर" लगाकर। यह क्रोल का कौन-सा चरण है?
सुदृढ़ीकरण। बच्चा जैसा बोलता है वैसा लिखता है। आगे भेद के चरण में वह सीखता है कि लिखने के लिए अलग शब्द और ढाँचा चाहिए।
3. कैप्शन वाली कॉमिक लिखित है या बहु-माध्यम? क्यों?
बहु-माध्यम, क्योंकि उसमें शब्द और चित्र मिले हैं। दोनों हिस्से मिलकर अर्थ देते हैं।
आम गलतियाँ
- वर्तनी की गलती का मतलब यह मान लेना कि बच्चा पढ़ नहीं सकता। अक्सर यह दिखाता है कि वह ध्वनियाँ अच्छी तरह इस्तेमाल कर रहा है।
- यह मानना कि हर बच्चा एक उम्र में एक ही चरण पर होगा। उम्र सिर्फ़ मोटा अंदाज़ा है।
- सिर्फ़ सामान्य शब्द या सिर्फ़ फ़ोनिक्स सिखाना। बच्चों को दोनों चाहिए।
- आड़ी-तिरछी लकीरों को समय की बर्बादी समझना। इनसे पकड़ बनती है और समझ आती है कि निशान अर्थ रखते हैं।