बच्चों की संस्कृति का अर्थ
संस्कृति किसी समूह का जीने का तरीका है: वे क्या गाते, खाते, पहनते, खेलते और मानते हैं। बच्चों की संस्कृति संस्कृति का वह हिस्सा है जो बच्चों का है। इसके दो स्रोत हैं:
- बड़ों द्वारा बच्चों के लिए बना: चित्र वाली किताबें, कार्टून, लोरियाँ, खिलौने, बच्चों के त्योहार और नाटक।
- बच्चों का खुद बनाया: गली के खेल, गिनती की तुकबंदियाँ, गुप्त संकेत, कल्पना की दुनिया, पहेलियाँ।
यह दो तरह से आगे जाती है: दादा-दादी और माता-पिता से बच्चों तक, और गली या स्कूल के मैदान में बड़े बच्चों से छोटों तक। कोई तुकबंदी बिना लिखे सैकड़ों साल चल सकती है।
बच्चों की संस्कृति ज़रूरी है क्योंकि इससे बच्चा अपनापन महसूस करता है, खुशी पाता है और बिना पाठ के भाषा, नियम और मूल्य सीखता है।
बच्चों का खेल और अभिव्यक्ति
खेल वह है जो बच्चा अपनी मर्ज़ी से, मज़े के लिए करता है, बिना तय नतीजे के। चार आम तरह के खेल:
- दौड़-भाग (शारीरिक) खेल: पकड़म-पकड़ाई, कूदना, चढ़ना। मज़बूत शरीर और संतुलन बनता है।
- नकल का खेल: घर-घर, दुकान या डॉक्टर खेलना। कल्पना, भाषा और दूसरों की भावनाओं की समझ बढ़ती है।
- बनाने का खेल: ब्लॉक, मिट्टी, रेत। सोच, योजना और उँगलियों की निपुणता बढ़ती है।
- नियम वाले खेल: लूडो, इक्कड़-दुक्कड़, फ़ुटबॉल। बारी का इंतज़ार, ईमानदारी और हार सहना सीखते हैं।
बच्चा अकेले, दूसरों के पास या साथ मिलकर भी खेल सकता है। साथ में खेलना उम्र के साथ आता है।
अभिव्यक्ति यानी विचार और भावनाएँ दिखाना। बच्चे यह चित्र और रचना (कला), बोलने और कहानी सुनाने (भाषा) और गाने, नाचने और हिलने-डुलने (संगीत और गति) से करते हैं। बड़े सामग्री, समय और सुरक्षित, दयालु श्रोता देकर मदद करते हैं, सुधारकर नहीं। सुंदर नतीजे से ज़्यादा बच्चे की कोशिश मायने रखती है।
मीडिया और बदलाव। आज बच्चे स्क्रीन भी देखते हैं: कार्टून, खेल, वीडियो। स्क्रीन सिखा सकती है पर दौड़ने, नकल करने और बनाने की जगह नहीं ले सकती। विशेषज्ञ थोड़ा, साथ में देखा गया स्क्रीन समय और खूब असली खेल की सलाह देते हैं।
बच्चों की संस्कृति को सहारा देने वाली जगहें
- घर: लोरियाँ, कहानियाँ, परिवार के त्योहार, पहले खिलौने।
- स्कूल और प्री-स्कूल: समूह के खेल, कला, संगीत, नाटक और खेलकूद।
- पुस्तकालय: किताबें, कहानी का समय और पढ़ने की शांत जगह।
- खेल का मैदान और खुली जगहें: दौड़ने, चढ़ने और दूसरों के साथ खेलने की सुरक्षित जगह।
- संग्रहालय और सामुदायिक केंद्र: हाथ से करने वाली प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ, उत्सव और बाल रंगमंच।
जो शहर अपने पार्क, पुस्तकालय और सांस्कृतिक केंद्र सुरक्षित रखता है और सभी बच्चों के लिए खुले रखता है, जिनमें दिव्यांग और गरीब परिवारों के बच्चे भी हैं, वह बच्चों की संस्कृति को सबसे अच्छा सहारा देता है।
करके देखो: खेल की डायरी
एक हफ़्ते तक तालिका में लिखो कि हर दिन कौन-सा खेल खेला (दौड़-भाग, नकल, बनाना, नियम, स्क्रीन) और कितनी देर। क्या झूला संतुलन में है? जो तरह छूट गई उसे जोड़ो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बच्चों की संस्कृति = बच्चों के लिए बनी + बच्चों की खुद बनाई
- खेल की चार तरह: दौड़-भाग, नकल, बनाना, नियम
- अभिव्यक्ति के तीन तरीके: चित्र/रचना, बोलना/कहानी, गाना/हिलना
- सहारा देने वाली जगहें: घर, स्कूल, पुस्तकालय, मैदान, संग्रहालय/केंद्र
- मुख्य शब्द: संस्कृति, खेल, अभिव्यक्ति, कल्पना, पीढ़ी
हल किए गए उदाहरण
1. बच्चों के खुद बनाई संस्कृति के दो उदाहरण और बच्चों के लिए बनी के दो उदाहरण दो।
बच्चों की खुद बनाई: खेल से पहले की गिनती की तुकबंदी; दोस्तों का गुप्त संकेत। बच्चों के लिए बनी: चित्र वाली किताब; लोरी या कार्टून।
2. बच्चा ब्लॉक से मीनार बनाता है, वह गिर जाती है, फिर बनाता है। यह कौन-सा खेल है और क्या सीखा?
बनाने का खेल। बच्चा योजना, संतुलन, धैर्य और गलती के बाद फिर कोशिश करना सीखता है।
3. बच्चा दोस्तों के साथ 'दुकानदार' खेलता है। कौन-से कौशल बढ़ते हैं?
नकल के खेल से भाषा, कल्पना, गिनती, बारी लेना और दूसरों की भूमिका और भावनाओं की समझ बढ़ती है।
4. कॉलोनी में पार्क नहीं है। बच्चों के खेलने के दो उपाय सुझाओ।
गली में कुछ समय वाहन बंद करके सुरक्षित खेल का घंटा रखो और स्कूल का मैदान स्कूल के बाद खोलो। एक छोटा सामुदायिक पुस्तकालय कोना भी मदद करेगा।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि खेल समय की बर्बादी है। खेल ही छोटे बच्चों के सीखने का तरीका है।
- यह सोचना कि बच्चों की संस्कृति सिर्फ़ दुकान के खिलौने हैं। तुकबंदियाँ और गली के खेल भी संस्कृति हैं।
- बच्चे के चित्र को बहुत सुधारना। बच्चा खुला महसूस करे तभी अभिव्यक्ति बढ़ती है।
- स्क्रीन से सारा खेल बदल देना। बच्चों को हिलना, बनाना और बात करना भी चाहिए।