अलग तरह का प्राकृतिक वातावरण
ऑस्ट्रेलिया सबसे छोटा महाद्वीप है और अकेला ऐसा महाद्वीप जो एक ही देश भी है। यह हिंद और प्रशांत महासागरों के बीच है। बीच का बड़ा भाग, आउटबैक, सूखा है: मरुस्थल और अर्ध-मरुस्थल, लाल मिट्टी और बहुत कम बारिश। पूर्व में ग्रेट डिवाइडिंग रेंज है। उत्तर की जलवायु उष्णकटिबंधीय है; दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम में जलवायु नरम और ज़्यादा बारिश वाली है। उत्तर-पूर्व तट के पास ग्रेट बैरियर रीफ है, जो दुनिया की सबसे बड़ी प्रवाल-भित्ति प्रणाली है।
ऑस्ट्रेलिया बहुत लंबे समय तक दूसरी ज़मीनों से अलग रहा। इसलिए यहाँ के कई जानवर कहीं और नहीं मिलते: कंगारू, कोआला, वॉम्बैट और अंडे देने वाला प्लैटिपस। इसीलिए यहाँ के आवासों को बचाना बहुत ज़रूरी है।
लोग कहाँ रहते हैं
ऑस्ट्रेलिया बड़ा है पर यहाँ लगभग 2.6 करोड़ लोग ही हैं। वे बराबर फैले नहीं हैं। ज़्यादातर तट के पास बड़े शहरों में रहते हैं, खासकर दक्षिण-पूर्व में, जहाँ बारिश ज़्यादा भरोसेमंद है और ज़मीन खेती व बंदरगाहों के लिए अच्छी है। सूखा भीतरी भाग लगभग खाली है, जहाँ दूर-दूर कुछ कस्बे, खेत और खदानें हैं। इसलिए पूरे देश में जनसंख्या घनत्व, यानी प्रति वर्ग किलोमीटर लोग, बहुत कम है, पर तटीय शहरों में बहुत ज़्यादा।
ओशिनिया में न्यूज़ीलैंड भी है, जिसमें पहाड़, घास के टीले और ज़्यादातर शहरी लोग हैं, और प्रशांत के हज़ारों छोटे द्वीप जिनमें गाँव तट पर बसे हैं।
ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था की मुख्य बातें
ऑस्ट्रेलिया उच्च-आय वाला देश है और उसकी अर्थव्यवस्था के तीन मुख्य भाग हैं:
- खनन: लौह-अयस्क, कोयला, सोना और प्राकृतिक गैस निकालकर ज़्यादातर एशियाई देशों को बेची जाती है।
- खेती: बहुत बड़े खेतों और चरागाहों से गेहूँ, ऊन और गोमांस, मशीनों से और कम मज़दूरों के साथ।
- सेवाएँ और पर्यटन: बैंक, शिक्षा, स्वास्थ्य, दुकानें और यात्रा। यह सबसे बड़ा भाग है और ज़्यादातर नौकरियाँ यहीं हैं।
ऑस्ट्रेलिया कच्चा माल और खाना बेचता है और मशीनें व उपभोक्ता सामान खरीदता है। दूसरे देशों को बेचने पर निर्भर होने से दुनिया में कीमतें गिरने का असर उस पर पड़ता है।
ओशिनिया: ऊँचे द्वीप, नीचे एटोल और समुद्र-स्तर
ओशिनिया में मुख्यतः दो तरह के द्वीप हैं। ऊँचे द्वीप ज्वालामुखियों की चोटियाँ हैं जिनमें पहाड़ियाँ और उपजाऊ मिट्टी है। नीचे प्रवाल एटोल मूँगे की रेत के छल्ले हैं जो समुद्र से बस एक-दो मीटर ऊँचे होते हैं। एटोल पर मीठा पानी और ज़मीन बहुत कम है। समुद्र का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने से बाढ़ और खारा पानी उनके खेतों और कुओं तक पहुँचता है, इसलिए वहाँ के लोग जलवायु परिवर्तन का असर सबसे पहले झेलते हैं। द्वीपों की अर्थव्यवस्था मछली पकड़ने, पर्यटन, छोटी खेती और विदेश में काम करने वाले रिश्तेदारों के भेजे पैसों पर टिकी है।
करके देखें: तट और भीतरी कस्बे की तुलना
दो डिब्बे बनाएँ: एक तटीय शहर का, एक आउटबैक के भीतरी कस्बे का। हर एक के नीचे लिखें: बारिश (ज़्यादा या कम), काम-धंधे, लोगों की संख्या। फिर 3D में समुद्र का स्तर धीरे-धीरे बढ़ाएँ। स्लाइडर आधे पर पहुँचने पर गिनें कितने एटोल डूब गए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऑस्ट्रेलिया: द्वीप-महाद्वीप; बीच में सूखा आउटबैक; पूर्व में ग्रेट डिवाइडिंग रेंज; उत्तर-पूर्व में ग्रेट बैरियर रीफ
- अनोखे जीव: कंगारू, कोआला, वॉम्बैट, प्लैटिपस
- लोग: लगभग 2.6 करोड़, ज़्यादातर दक्षिण-पूर्व के तटीय शहरों में
- अर्थव्यवस्था: खनन, खेती और (सबसे बड़ी) सेवाएँ व पर्यटन
- ओशिनिया: ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और प्रशांत के द्वीप (ऊँचे ज्वालामुखी + नीचे प्रवाल एटोल)
- जनसंख्या घनत्व = लोग ÷ क्षेत्रफल
हल किए गए उदाहरण
1. ज़्यादातर ऑस्ट्रेलियाई बीच में नहीं, तट के पास क्यों रहते हैं?
भीतरी भाग सूखा, गर्म और खेती के लिए कठिन है। तट पर, खासकर दक्षिण-पूर्व में, बारिश ज़्यादा है, व्यापार के बंदरगाह हैं और अच्छी खेती की ज़मीन है, इसलिए शहर वहीं बसे।
2. ऑस्ट्रेलिया में लगभग 2.6 करोड़ लोग और लगभग 77 लाख वर्ग किमी क्षेत्रफल है। घनत्व निकालें।
घनत्व = 2.6 करोड़ ÷ 77 लाख वर्ग किमी = 26 ÷ 7.7 ≈ 3.4 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी। बहुत कम, क्योंकि ज़्यादातर ज़मीन खाली है।
3. ग्रेट बैरियर रीफ को बचाने की दो वजहें बताएँ।
यह समुद्री जीवन की भारी विविधता का घर है, और गर्म होते समुद्र, प्रदूषण और बहुत ज़्यादा पर्यटकों से इसे नुकसान होता है। मूँगा मर जाए तो ठीक होने में बहुत साल लगते हैं।
4. नीचा प्रवाल एटोल ऊँचे ज्वालामुखी द्वीप से ज़्यादा खतरे में क्यों है?
एटोल समुद्र से बस एक-दो मीटर ऊँचा है, इसलिए थोड़ी बढ़त से भी ज़मीन और कुओं में खारा पानी आ जाता है। ऊँचे द्वीप की पहाड़ियाँ सूखी रहती हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पूरा ऑस्ट्रेलिया मरुस्थल है। तटों पर जंगल, खेत और शहर हैं; मरुस्थल मुख्यतः बीच में है।
- ओशिनिया और ऑस्ट्रेलिया को एक ही समझना। ओशिनिया बड़ा क्षेत्र है: ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और प्रशांत के द्वीप।
- कहना कि ऑस्ट्रेलिया का जनसंख्या घनत्व ज़्यादा है। कुल मिलाकर यह दुनिया के सबसे कम घनत्व वालों में है।
- सोचना कि खनन अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा है। सेवाओं में सबसे ज़्यादा लोग काम करते हैं।