यथार्थवाद: जीवन जैसा वह है
यथार्थवाद (Realism) लिखने का ऐसा ढंग है जो साधारण लोगों और रोज़ के जीवन को जितना हो सके सच्चाई से दिखाता है। 19वीं सदी में कई उपन्यासकार असली गलियाँ, पैसे की चिंताएँ और सामाजिक समस्याएँ दिखाना चाहते थे, सिर्फ़ राजा और नायक नहीं। चार्ल्स डिकेंस ने अपने उपन्यासों में विक्टोरियाई लंदन की भीड़-भरी, धुएँ वाली गलियाँ, ग़रीब बच्चे, दुकानें और कारख़ाने दिखाए और अन्याय के प्रति पाठकों को संवेदनशील बनाया। लियो टॉल्स्टॉय ने परिवार, सैनिक और किसान बारीक ब्योरे के साथ दिखाए और कई पात्रों के विचारों का पीछा किया।
यथार्थवाद की पहचान: विश्वसनीय परिवेश, साधारण काम और पैसे की उलझनें, धीमे और सावधान ब्योरे, और पात्र जो असली घटनाओं से बदलते हैं।
आधुनिकतावाद: कहने के नए ढंग
आधुनिकतावाद (Modernism) 20वीं सदी की शुरुआत में आया। युद्धों और शहरों के तेज़ बदलाव के बाद कई लेखकों को लगा कि कहानी कहने के पुराने ढंग नई दुनिया में फिट नहीं हैं। उन्होंने नए रूप आज़माए: छोटे वाक्य, टूटा हुआ समय-क्रम, भीतरी विचार और चुप्पी, जहाँ पाठक को ख़ुद सोचना पड़ता है। अर्नेस्ट हेमिंग्वे इसका प्रसिद्ध उदाहरण हैं। उन्होंने सादे, छोटे वाक्य लिखे और भावनाएँ अनकही छोड़ीं।
उनके विचार को हिमशैल सिद्धांत (iceberg theory) कहते हैं: कहानी की सतह बहुत छोटा हिस्सा है। गहरा अर्थ, हिमशैल के पानी के नीचे वाले हिस्से की तरह, लिखा नहीं जाता, महसूस किया जाता है। 3D में छोटी सफ़ेद नोक शब्द हैं और नीचे का बड़ा नीला हिस्सा वह है जो पाठक ख़ुद समझता है।
कथन-शैलियाँ: कहानी कौन सुनाता है?
कथन-शैली तीन सवालों का जवाब है: कौन सुना रहा है? कहाँ से? कितना बता रहा है?
- प्रथम पुरुष: कोई पात्र 'मैं' कहता है। हम वही देखते हैं जो 'मैं' देखता और महसूस करता है।
- सीमित तृतीय पुरुष: 'वह', पर हम एक ही मन के भीतर रहते हैं।
- सर्वज्ञ कथावाचक: बाहर की आवाज़ जो सब जानती है, कई पात्रों के विचार और आगे क्या होगा, यह भी। टॉल्स्टॉय अक्सर ऐसे चलते हैं: एक मन से दूसरे मन तक, एक कमरे से पूरे युद्ध-मैदान तक।
शैली बदलने से हम पात्रों के कितने क़रीब महसूस करते हैं और कहने वाले पर कितना भरोसा करते हैं, यह बदल जाता है।
जादुई यथार्थवाद: रोज़ के जीवन में एक चमत्कार
जादुई यथार्थवाद (Magic realism) रोज़मर्रा के जीवन में एक-दो असंभव घटनाएँ मिलाता है, और उन्हें उसी शांत आवाज़ में कहता है जिसमें बाक़ी सब कहा जाता है। पात्र चौंकते नहीं। गैब्रियल गार्सिया मार्केज़ ने एक छोटे क़स्बे के परिवार पर अपने उपन्यासों में यह शैली अपनाई: सालों तक चलती बारिश, या आसमान से गिरते पीले फूल, मौसम की ख़बर की तरह कहे जाते हैं। शांत स्वर पाठक से चमत्कार मनवा लेता है और वह सोचता है कि इसका प्रतीक क्या है, जैसे स्मृति, शोक या अकेलापन।
जादुई यथार्थवाद ड्रैगन वाली कल्पना कथा नहीं है। दुनिया साधारण है; सिर्फ़ एक चीज़ साधारण नहीं।
ख़ुद करके देखें: एक घटना चार तरह से
10 मिनट में करें। एक सरल घटना लीजिए: बारिश में एक लड़के की छतरी खो जाती है। चार छोटे संस्करण लिखिए, हर एक दो पंक्ति का। (1) यथार्थवाद: पाँच सच्चे ब्योरे जोड़िए। (2) सर्वज्ञ: बताइए लड़का, दुकानदार और आसमान क्या 'जानते' हैं। (3) हिमशैल: सिर्फ़ वही कहिए जो दिखता है, उदासी छिपी रहने दीजिए। (4) जादुई यथार्थ: एक असंभव बात बहुत शांत स्वर में जोड़िए। अब 3D में चारों बटन दबाइए। क्या आपका संस्करण चित्र से मिलता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- यथार्थवाद = जीवन जैसे सच्चे ब्योरे + साधारण लोग (डिकेंस, टॉल्स्टॉय)
- आधुनिकतावाद = नए रूप, भीतरी जीवन, चुप्पी (हेमिंग्वे)
- सर्वज्ञ कथावाचक = बाहर की आवाज़ जो सब के विचार जानती है
- हिमशैल सिद्धांत = शब्द नोक हैं; अर्थ पानी के नीचे है
- जादुई यथार्थवाद = साधारण दुनिया + एक असंभव घटना शांत स्वर में (गार्सिया मार्केज़)
हल किए गए उदाहरण
1. 'कमरे में गीले ऊन और उबली गोभी की गंध थी। चूल्हे के ऊपर टूटी घड़ी टिक-टिक कर रही थी और मकान-मालिक ने सिक्के दो बार गिने।' यह कौन-सी शैली है? क्यों?
यथार्थवाद। इसमें साधारण जीवन के कई छोटे, सच्चे ब्योरे हैं (गंध, घड़ी, सिक्के)।
2. 'उसे अपने भाई का ख़याल आया, जो युद्ध के बारे में सोच रहा था, जबकि सेनापति, जिसे सुबह से डर था, पूरी घाटी को ऊपर से देख रहा था।' यह कौन-सा कथावाचक है?
सर्वज्ञ कथावाचक। आवाज़ कई पात्रों के विचार जानती है और पूरे दृश्य को ऊपर से देखती है।
3. 'बूढ़े ने ख़ाली नाव को देखा। वह कुछ नहीं बोला और जाल तह करने लगा।' क्या अनकहा है? कौन-सी शैली?
नुक़सान और हार जैसी भावनाएँ अनकही हैं। यह हिमशैल शैली है: सतह पर सरल शब्द, नीचे गहरा अर्थ।
4. 'मंगलवार को फूलों की बारिश होने लगी। महापौर ने खिड़की बंद की और खाना खाता रहा।' कौन-सी शैली? क्या इसकी पहचान कराता है?
जादुई यथार्थवाद। असंभव घटना (फूलों की बारिश) शांत, सामान्य स्वर में कही गई है और कोई हैरान नहीं है।
5. 'मैं डर गया था' को हिमशैल शैली में बदलिए।
जैसे: 'मेरे हाथ चिट्ठी का कोना मोड़ते रुक नहीं रहे थे।' डर का नाम नहीं लिया गया, काम से दिखाया गया है।
आम गलतियाँ
- यथार्थवाद को उबाऊ समझना। उसमें भरपूर भावना हो सकती है; बस वह असली जीवन के पास रहता है।
- जादुई यथार्थवाद और कल्पना-कथा को एक समझना। जादुई यथार्थ में दुनिया साधारण है और एक चीज़ असंभव।
- लेखक और कथावाचक को एक मान लेना। कथावाचक वह आवाज़ है जिसे लेखक चुनता है।
- हिमशैल शैली का मतलब यह समझना कि लेखक समझाना भूल गया। छिपा अर्थ सोच-समझकर रखा गया है।