South 고등학교 2학년 Climate Change and a Sustainable World
अध्याय: 4
1. Humans and climate change
Global climate change · Natural and human causes
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
2. Climate justice and regional issues
Regional climate impacts · Unequal impacts · Climate justice responses
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
- जलवायु न्याय: जलवायु परिवर्तन कौन करता है और कीमत कौन चुकाता है? – जलवायु न्याय का विचार कहता है कि जलवायु परिवर्तन सिर्फ़ विज्ञान की नहीं, न्याय की भी समस्या है। उत्सर्जन और नुकसान बहुत असमान बँटे हैं। दुनिया के सबसे अमीर 10% लोग लगभग आधा उत्सर्जन करते हैं, जबकि सबसे गरीब आधे लोग लगभग आठवाँ हिस्सा। फिर भी गरीब देश और समुदाय, महिलाएँ, बच्चे, बुज़ुर्ग, बाहर काम करने वाले मज़दूर और आदिवासी समुदाय अक्सर सबसे सुभेद्य होते हैं, क्योंकि सुभेद्यता खतरे के सामने होने, संवेदनशीलता और अनुकूलन क्षमता पर निर्भर है। आज का उत्सर्जन आने वाली पीढ़ियों पर भी असर डालता है। न्यायपूर्ण जवाब: ज़्यादा ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी और क्षमता वाले तेज़ी से कटौती करें (साझा लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व), अनुकूलन के लिए पैसा और तकनीक, हानि-क्षति कोष, प्रदूषक उद्योगों के मज़दूरों के लिए न्यायपूर्ण संक्रमण, और पानी, ज़मीन व बचे कार्बन बजट का न्यायपूर्ण बँटवारा।
3. Ecological transition
International cooperation · National climate policy · Local ecological transition · Appropriate technology
- जलवायु नीति: दुनिया जलवायु परिवर्तन पर कैसे कदम उठाती है – जलवायु नीति वे समझौते, कानून और योजनाएँ हैं जो ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटाती हैं (शमन, mitigation) और लोगों को बदलती जलवायु से निपटने में मदद करती हैं (अनुकूलन, adaptation)। वायुमंडल सबका साझा है, इसलिए कोई देश अकेले यह समस्या हल नहीं कर सकता। देश संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन ढाँचा सम्मेलन (UNFCCC, 1992), क्योटो प्रोटोकॉल (1997) और पेरिस समझौते (2015) से मिलकर काम करते हैं। पेरिस में हर देश अपना लक्ष्य (NDC) तय करता है और हर पाँच साल में उसे बढ़ाता है, ताकि गर्मी 2 °C से काफ़ी नीचे रहे और 1.5 °C की कोशिश हो। देश के भीतर सरकारें कार्बन टैक्स, कैप-एंड-ट्रेड, नियम-मानक और स्वच्छ ऊर्जा को सहायता देती हैं। कई देशों ने नेट ज़ीरो (कार्बन तटस्थता) का लक्ष्य रखा है। न्याय ज़रूरी है: अमीर देशों ने इतिहास में ज़्यादा उत्सर्जन किया, इसलिए "साझा परंतु विभेदित उत्तरदायित्व", जलवायु वित्त और तकनीक साझा करना ज़रूरी है।
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।
- उचित तकनीक (Appropriate Technology) – उचित तकनीक वह औज़ार या तरीक़ा है जो उसे इस्तेमाल करने वाले लोगों, जगह और पैसे के हिसाब से ठीक बैठे। यह अक्सर सरल, सस्ती, गाँव में ही ठीक हो सकने वाली और पर्यावरण के लिए अच्छी होती है। सबसे अच्छी तकनीक हमेशा सबसे नई या सबसे बड़ी नहीं होती। हम लागत, हुनर, मरम्मत, ऊर्जा, पर्यावरण और ज़रूरत देखकर चुनते हैं।
4. Coexistence and ecological citizens
Sustainable Development Goals · Everyday sustainable living · Ecological citizenship values
- सतत विकास लक्ष्य (SDGs): 2030 तक के 17 लक्ष्य – 2015 में संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों ने 2030 का एजेंडा अपनाया जिसमें 17 सतत विकास लक्ष्य और 169 उप-लक्ष्य हैं। ये लोग (गरीबी, भूख, स्वास्थ्य, शिक्षा, समानता), धरती (पानी, जलवायु, महासागर, भूमि), समृद्धि (ऊर्जा, काम, उद्योग, शहर), शांति और साझेदारी को छूते हैं। सभी 17 जुड़े हुए हैं: एक में प्रगति दूसरों की मदद करती है।
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।
- वैश्विक नागरिकता – वैश्विक नागरिक एक साथ स्थानीय, राष्ट्रीय और विश्व समुदाय का हिस्सा होता है। दुनिया आपस में जुड़ी है और ग़रीबी, भूख, संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ साझा हैं। वैश्विक नागरिक अपने अधिकार और कर्तव्य जानता है, दूर के लोगों की परवाह करता है, अपना पारिस्थितिक पदचिह्न घटाता है और सोचता वैश्विक, करता स्थानीय है।