South 고등학교 2학년 Art Creation
अध्याय: 2
1. Planning and creating
Researching for your theme · Creative idea methods · Exploring techniques and media · Matching media to theme
- कला शिक्षा: कला के रूप, सृजन और कला प्रोजेक्ट – स्कूल की कला शिक्षा में कई क्षेत्र हैं: दृश्य कला, संगीत, नृत्य, रंगमंच, सिनेमा और दृश्य-श्रव्य कला, सर्कस कला और कला इतिहास। हर क्षेत्र में तीन काम होते हैं: अभ्यास और सृजन (बनाना), पेशेवर कलाकारों की कला देखना-सुनना (मिलना), और उस पर सोचना-बोलना (चिंतन)। कला प्रोजेक्ट एक चक्र है: विचार, खोज, प्रयोग, निर्माण, प्रस्तुति और चिंतन, और हर चरण पोर्टफोलियो में दर्ज होता है। कला के रूप अक्सर मिलते हैं: संगीत के साथ नृत्य, फ़िल्म के साथ रंगमंच। संग्रहालय, संगीत-सभा या नाटक देखना और कलाकारों से बात करना आपकी समझ और रुचि बनाता है।
- रचनात्मक सोच: बहुत सारे विचार बनाना और सबसे अच्छा चुनना – रचनात्मक सोच ऐसे विचार बनाना है जो नए भी हों और काम के भी। यह एक हुनर है जिसे कोई भी बढ़ा सकता है। इसकी दो चालें हैं: अपसारी (divergent) सोच, यानी फैलकर बहुत सारे विचार; और अभिसारी (convergent) सोच, यानी सिमटकर सबसे अच्छा विचार चुनना। औज़ार मदद करते हैं: ब्रेनस्टॉर्मिंग (बहुत विचार, कोई आलोचना नहीं), जोड़ (association: अलग-अलग चीज़ें मिलाना), SCAMPER (बदलो, जोड़ो, अपनाओ, रूप बदलो, नया उपयोग, हटाओ, उलटो) और उलटी सोच (समस्या को उलटो, फिर जवाबों को उलटो)। रचनात्मक लोग सोच-समझकर जोखिम लेते हैं, ग़लती से सीखते हैं और कोशिश जारी रखते हैं। कला, विज्ञान, इंजीनियरिंग, व्यापार और रोज़ की ज़िंदगी में रचनात्मकता काम आती है।
2. Extending creation
Active use of media · Challenging problem solving · Planning exhibitions · Linking process and outcome
- कला शिक्षा: कला के रूप, सृजन और कला प्रोजेक्ट – स्कूल की कला शिक्षा में कई क्षेत्र हैं: दृश्य कला, संगीत, नृत्य, रंगमंच, सिनेमा और दृश्य-श्रव्य कला, सर्कस कला और कला इतिहास। हर क्षेत्र में तीन काम होते हैं: अभ्यास और सृजन (बनाना), पेशेवर कलाकारों की कला देखना-सुनना (मिलना), और उस पर सोचना-बोलना (चिंतन)। कला प्रोजेक्ट एक चक्र है: विचार, खोज, प्रयोग, निर्माण, प्रस्तुति और चिंतन, और हर चरण पोर्टफोलियो में दर्ज होता है। कला के रूप अक्सर मिलते हैं: संगीत के साथ नृत्य, फ़िल्म के साथ रंगमंच। संग्रहालय, संगीत-सभा या नाटक देखना और कलाकारों से बात करना आपकी समझ और रुचि बनाता है।
- रचनात्मक सोच: बहुत सारे विचार बनाना और सबसे अच्छा चुनना – रचनात्मक सोच ऐसे विचार बनाना है जो नए भी हों और काम के भी। यह एक हुनर है जिसे कोई भी बढ़ा सकता है। इसकी दो चालें हैं: अपसारी (divergent) सोच, यानी फैलकर बहुत सारे विचार; और अभिसारी (convergent) सोच, यानी सिमटकर सबसे अच्छा विचार चुनना। औज़ार मदद करते हैं: ब्रेनस्टॉर्मिंग (बहुत विचार, कोई आलोचना नहीं), जोड़ (association: अलग-अलग चीज़ें मिलाना), SCAMPER (बदलो, जोड़ो, अपनाओ, रूप बदलो, नया उपयोग, हटाओ, उलटो) और उलटी सोच (समस्या को उलटो, फिर जवाबों को उलटो)। रचनात्मक लोग सोच-समझकर जोखिम लेते हैं, ग़लती से सीखते हैं और कोशिश जारी रखते हैं। कला, विज्ञान, इंजीनियरिंग, व्यापार और रोज़ की ज़िंदगी में रचनात्मकता काम आती है।
- कला प्रदर्शनी: योजना, सजावट और कला को देखना – प्रदर्शनी कलाकृतियों का योजना से किया गया सार्वजनिक प्रदर्शन है, जहाँ कृतियाँ, दर्शक और स्थान मिलते हैं। स्थान हो सकते हैं: संग्रहालय, कला-दीर्घा, सार्वजनिक जगह, ऑनलाइन। योजना में विषय और दर्शक चुनना, कृतियाँ छाँटना, फिर उन्हें सजाना, रोशनी देना और परिचय-पर्ची लगाना शामिल है। दर्शक वर्णन, विश्लेषण, व्याख्या और मूल्यांकन करते हैं।