France Terminale Physical Education, Sports Practices and Culture
अध्याय: 3
1. Physical practice
Deeper practice of chosen sports
- शारीरिक फिटनेस (Physical Fitness) – शारीरिक फिटनेस शरीर की वह क्षमता है जिससे रोज़ का काम, खेल और स्पर्धा ऊर्जा बचाकर की जा सके। इसके पाँच स्वास्थ्य संबंधी घटक (हृदय-श्वसन सहनशक्ति, पेशीय शक्ति, पेशीय सहनशक्ति, लचीलापन, शरीर संरचना) और छह कौशल संबंधी घटक (गति, फुर्ती, विस्फोटक शक्ति, संतुलन, तालमेल, प्रतिक्रिया समय) हैं। इसे FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) और अधिभार, प्रगति, विशिष्टता, विश्राम, उत्क्रमणीयता जैसे सिद्धांतों वाली योजना से बढ़ाते हैं।
2. Study themes
Sport in today’s world: health, ethics, environment, economy · Sports technology: strategy and analysis
- खेल और समाज – खेल समाजशास्त्र देखता है कि खेल और समाज एक-दूसरे को कैसे बदलते हैं। शारीरिक गतिविधि खुले खेल-कूद से शुरू होकर शारीरिक मनोरंजन और फिर खेल (स्पोर्ट) तक जाती है, जिसमें तय नियम, संगठन और गंभीर मुकाबला होता है। आधुनिक खेल ढीले-ढाले स्थानीय लोक खेलों से बने: औद्योगिक युग में लिखित नियम, क्लब और शासी निकाय आए, और लगभग 1950 के बाद टीवी, पैसे और यात्रा ने खेल को वैश्विक और पेशेवर बना दिया। आज खेल, मीडिया और प्रायोजक एक "सुनहरे त्रिकोण" में बँधे हैं। हर समूह बराबर नहीं खेलता: पैसा, समय, सुविधा, भेदभाव और रूढ़ियाँ बाधा बनती हैं, इसलिए सरकारें और क्लब महिलाओं, दिव्यांगों, बुज़ुर्गों और कम आय वाले परिवारों की बराबर पहुँच के लिए काम करते हैं। खेल का अँधेरा पक्ष भी है, यानी विचलन, जैसे डोपिंग, हिंसा और मैच फ़िक्सिंग, जिसे नियम, जाँच और क़ानून रोकते हैं। खेल सेहत, पहचान और एकता बना सकता है, पर बाँट भी सकता है।
- खेल विज्ञान और तकनीक – खेल विज्ञान माप, आँकड़ों और नए उपकरणों से खिलाड़ी को बेहतर बनाता है और खेल को निष्पक्ष रखता है। हम प्रदर्शन देखते हैं, मापते हैं (समय, चाल, हृदय गति), वीडियो और डेटा का विश्लेषण करते हैं, योजना बनाते हैं, और जाँचते हैं कि नई तकनीक निष्पक्ष है या नहीं। इससे कई नौकरियाँ बनती हैं: कोच, एनालिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, खेल वैज्ञानिक।
3. Project
Designing and leading a session
- खेल सत्र की योजना बनाना और संचालन – अच्छे सत्र का एक लक्ष्य और चार भाग होते हैं: वार्म-अप, कौशल अभ्यास, खेल, कूल-डाउन। कोच दिखाता है, समझाता है और खिलाड़ियों से अभ्यास कराता है। हर खिलाड़ी के हिसाब से काम आसान या कठिन बनाता है और अंत में जाँचता है: लक्ष्य पूरा हुआ? सब सुरक्षित रहे? सबको मज़ा आया?