China 九年级(初三) Arts: Film and Digital Media
अध्याय: 8
1. Sem.1 U1 Capturing real life
Documentary snapshots of life
- डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म: असली ज़िंदगी फ़िल्म कैसे बनती है – डॉक्यूमेंट्री (वृत्तचित्र) असली लोगों और घटनाओं पर बनी फ़िल्म है। पर यह असलियत की सीधी नक़ल नहीं होती: फ़िल्मकार चुनता है कि क्या फ़िल्माना है, फ़्रेम कैसा हो और क्लिप किस क्रम में जुड़ें। डॉक्यूमेंट्री की कई शैलियाँ (modes) हैं। वॉटकिंस, ब्रूमफ़ील्ड, लॉन्गिनोटो और मूर जैसे फ़िल्मकार अलग-अलग सोचते हैं कि फ़िल्मकार कितना दिखे और कितना समझाए। डिजिटल तकनीक ने फ़िल्माना सस्ता किया, पर सच पर नए सवाल भी खड़े किए।
2. Sem.1 U2 Passing on Chinese culture
Rhythm, history, craftsmanship, cultural memory
- कारीगर पर फ़िल्म: लय, इतिहास और सांस्कृतिक याद – शिल्प पर डॉक्यूमेंट्री एक ऐसे हुनर को दिखाती है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है। काम की लय खोजो, इतिहास दिखाओ, कारीगर को चौड़े, मध्यम और क्लोज़ शॉट में शूट करो, और बातचीत, काम और पुरानी चीज़ें जोड़कर समाज की याद बचाओ।
3. Sem.1 U3 Stories of friendship
Write, direct, shoot, edit
जल्द आ रहा है
4. Sem.1 U4 New life for art
Interactive media; upcycling
- इंटरैक्टिव मीडिया और अपसाइक्लिंग: कला को नया जीवन – इंटरैक्टिव मीडिया में देखने वाला कुछ करता और चुनता है, इसलिए कहानी बदलती है। शाखाओं वाले वीडियो में चुनाव के बिंदु होते हैं; n दो-विकल्प चुनावों से 2^n रास्ते बनते हैं। अपसाइक्लिंग कचरे को गलाए बिना नया, बेहतर उपयोग देती है। दोनों कला को नया जीवन देने के तरीके हैं।
5. Sem.2 U1 Everyday life
Food and people documentaries
- खाना और लोग: डॉक्यूमेंट्री में कहानी कहना – खाने की डॉक्यूमेंट्री असल में लोगों की फ़िल्म है। खाने के सफ़र (खेत, बाज़ार, रसोई, थाली) के पीछे चलो, हर पड़ाव के इंसान से मिलो, फ़िल्म को चार हिस्सों (शुरुआत, बढ़त, चरम, अंत) में ढालो और वह दिखाओ जो चख नहीं सकते: भाप, आवाज़, रंग और हाथ।
6. Sem.2 U2 Art of concision
Visual essence; film poets
जल्द आ रहा है
7. Sem.2 U3 Poetic images
Montage: narrative and expressive
जल्द आ रहा है
8. Sem.2 U4 Art and technology
Virtual/real; IoT; AI and art
- कला और तकनीक: नए आविष्कार कला को कैसे बदलते हैं – नई तकनीक ने कला को बार-बार बदला है। छापाख़ाने (लगभग 1450) से एक चित्र की कई प्रतियाँ बनने लगीं, तो कला आम लोगों तक पहुँची। धातु की ट्यूब में रंग (1841) से चित्रकार बाहर जाकर पेंट करने लगे। फ़ोटोग्राफ़ी (1839) ने हूबहू नक़ल का काम ले लिया, तो चित्रकला रंग, भावना और देखने के नए तरीक़ों की ओर मुड़ी। सिनेमा (1895) ने समय और गति जोड़ी। कंप्यूटर (1960 से, 1980 के बाद आम) से डिजिटल, इंटरनेट और अब AI कला आई, जहाँ कॉपी मुफ़्त है और कलाकृति दर्शक के साथ बदल सकती है। कलाकार विज्ञान का भी उपयोग करते हैं: परिप्रेक्ष्य (ज्यामिति), रंग-सिद्धांत (प्रकाश और प्रिज़्म), नए पदार्थ, और आज 'कलात्मक शोध'। हर नया औज़ार सवाल उठाता है: मौलिक क्या है, लेखक कौन है, कला किसलिए है?