CBSE कक्षा 12 विपणन
अध्याय: 6
1. भाग क: रोज़गार कौशल
संचार कौशल · स्व-प्रबंधन कौशल · आईसीटी कौशल · उद्यमशीलता कौशल · हरित कौशल
- संचार कौशल: अपनी बात साफ़ और प्यार से कैसे पहुँचाएँ – संचार यानी लोगों के बीच अर्थ बाँटना। प्रेषक (भेजने वाला) विचार को संदेश में बदलता है, उसे माध्यम से भेजता है, और प्राप्तकर्ता उसे समझकर प्रतिपुष्टि (फ़ीडबैक) देता है। शोर, कठिन शब्द, तेज़ भावनाएँ और सांस्कृतिक अंतर जैसी बाधाएँ संदेश को रोक या मोड़ सकती हैं। हम अर्थ शब्दों से (शाब्दिक), चेहरे, आँखों, हाव-भाव, मुद्रा और आवाज़ के लहजे से (अशाब्दिक), और चित्रों से (दृश्य) भेजते हैं। सक्रिय श्रवण — ध्यान, धैर्य, सवाल और अपने शब्दों में दोहराना — साबित करता है कि संदेश पहुँचा। अच्छा वक्ता संदर्भ के हिसाब से बदलता है: औपचारिक या अनौपचारिक, बोलकर या लिखकर, और विनम्र अनुरोध, सलीके से मना करना, सच्ची माफ़ी और दृढ़ (न दब्बू, न आक्रामक) भाषा अपनाता है।
- आत्म-प्रबंधन: अपनी भावनाओं, लक्ष्यों और समय की कमान अपने हाथ में – आत्म-प्रबंधन (self-management) यानी अपनी भावनाओं, विचारों और कामों को ख़ुद दिशा देना ताकि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचें। इसकी शुरुआत आत्म-जागरूकता से होती है: आप क्या महसूस कर रहे हैं और कितना तेज़। फिर प्रतिक्रिया से पहले ठहराव (रुको, सोचो, करो) और धीमी साँस जैसे उपाय। विचार भावनाओं को और भावनाएँ कामों को बनाती हैं, इसलिए 'मैं बेकार हूँ' को 'मैं अभी नहीं कर पाता' में बदलने से काम बदल जाता है। अच्छे आत्म-प्रबंधक SMART लक्ष्य बनाते हैं, ज़रूरी-महत्वपूर्ण देखकर समय बाँटते हैं, अच्छी आदतें बनाते हैं और असफलता के बाद फिर खड़े होते हैं (लचीलापन)।
- आईसीटी कौशल: ऑफ़िस टूल, इंटरनेट, ई-मेल और सुरक्षित रहना – ICT का मतलब है सूचना और संचार तकनीक (Information and Communication Technology)। यानी वे सब औज़ार जिनसे हम जानकारी बनाते, रखते और भेजते हैं: कंप्यूटर, फ़ोन, सॉफ़्टवेयर और इंटरनेट। मुख्य कौशल हैं: वर्ड प्रोसेसर में लिखना, स्प्रेडशीट में गिनती, प्रेज़ेंटेशन से बात समझाना, इंटरनेट पर खोजना, ई-मेल भेजना और ऑनलाइन सुरक्षित रहना।
- हरित कौशल: सतत विकास, हरित अर्थव्यवस्था और हरित नौकरियाँ – हरित कौशल वह ज्ञान, आदतें और काम के हुनर हैं जिनसे हम धरती को नुकसान पहुँचाए बिना जी और काम कर सकें। इनकी नींव है सतत विकास: आज की ज़रूरतें पूरी करना और आने वाली पीढ़ी के लिए भी छोड़ना। हरित अर्थव्यवस्था प्रदूषण और कचरा घटाते हुए बढ़ती है, अक्सर घेरे में चलकर: बनाओ, इस्तेमाल करो, मरम्मत करो, रीसायकल करो। इससे सोलर तकनीशियन जैसी हरित नौकरियाँ बनती हैं। हर कोई 5R से हरित कौशल अपना सकता है।
2. उत्पाद
उत्पाद निर्णय
- उत्पाद निर्णय: स्तर, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग और जीवन चक्र – उत्पाद वह है जो किसी ज़रूरत को पूरा करे। इसके तीन स्तर हैं: मूल लाभ, वास्तविक उत्पाद और संवर्धित उत्पाद। ब्रांडिंग नाम और पहचान देती है, लेबल जानकारी देता है, और पैकेजिंग रक्षा व प्रचार करती है। हर उत्पाद एक जीवन चक्र से गुज़रता है: परिचय, वृद्धि, परिपक्वता, गिरावट, और हर अवस्था में अलग रणनीति चाहिए।
3. मूल्य निर्णय
मूल्य निर्धारण
- मूल्य निर्धारण: उद्देश्य, कारक और विधियाँ – कीमत वह पैसा है जो ग्राहक किसी चीज़ के लिए देता है। कंपनियाँ लक्ष्य के हिसाब से दाम रखती हैं: टिके रहना, लाभ, बाज़ार हिस्सा या गुणवत्ता। अंदरूनी कारक (लागत, उद्देश्य, उत्पाद) और बाहरी कारक (माँग, प्रतियोगिता, सरकार, अर्थव्यवस्था) दाम तय करते हैं। मुख्य विधियाँ: लागत-योग, प्रतियोगिता-आधारित, मूल्य-आधारित, स्किमिंग और पेनिट्रेशन।
4. स्थान निर्णय: वितरण माध्यम
वितरण
- वितरण माध्यम: सामान आप तक कैसे पहुँचता है – वितरण माध्यम वह रास्ता है जिससे सामान उत्पादक से उपभोक्ता तक जाता है। प्रत्यक्ष माध्यम में कोई मध्यस्थ नहीं; अप्रत्यक्ष में थोक और खुदरा विक्रेता सेवाएँ और अपना लाभ जोड़ते हैं। इंटरनेट से कंपनियाँ मध्यस्थ हटा सकती हैं, पर नए मध्यस्थ भी आते हैं। कंपनियाँ सघन, चयनात्मक या अनन्य पहुँच चुनती हैं, और क्योंकि ग्राहक ऑनलाइन और दुकान के बीच घूमते हैं, सब माध्यम ओमनीचैनल में जोड़े जाते हैं।
5. संवर्धन
संवर्धन
- संवर्धन मिश्रण (Promotion Mix) – संवर्धन यानी लोगों को उत्पाद के बारे में बताना और ख़रीदने के लिए मनाना। संवर्धन मिश्रण के चार मुख्य औज़ार हैं: विज्ञापन (पैसे देकर, बहुत लोगों तक), व्यक्तिगत विक्रय (आमने-सामने, गहरा असर), विक्रय संवर्धन (थोड़े समय के ऑफ़र) और प्रचार / जनसंपर्क (समाचार और साख)। कंपनियाँ उत्पाद, ग्राहक और बजट के हिसाब से इन्हें मिलाती हैं।
6. विपणन की उभरती प्रवृत्तियाँ
नई प्रवृत्तियाँ
- डिजिटल मार्केटिंग – विपणन की शुरुआत बाज़ार को समझने से होती है: ग्राहक कौन हैं, उन्हें क्या चाहिए और किस समूह (खंड) को लक्ष्य बनाना है। डिजिटल मार्केटिंग इन ग्राहकों तक इंटरनेट से पहुँचती है: सर्च इंजन (SEO और पेड सर्च), सोशल मीडिया, ईमेल और संदेश, कंटेंट और इन्फ़्लुएंसर। यह फ़नल पर चलती है: जागरूकता, रुचि, ख़रीद, वफ़ादारी। अख़बार के विज्ञापन के उलट इसे मापा जा सकता है: CTR = क्लिक ÷ व्यू, कन्वर्ज़न दर = ख़रीदार ÷ विज़िटर। सेवाएँ (बाल कटाना, ट्यूशन) छुई नहीं जा सकतीं और रखी नहीं जा सकतीं, इसलिए उन पर अलग ध्यान चाहिए। इंटरनेट ने सदस्यता, फ़्रीमियम, मार्केटप्लेस और साझा प्लेटफ़ॉर्म जैसे नए व्यापार मॉडल भी बनाए।