CBSE कक्षा 10 स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा
अध्याय: 4
1. खेल
चुना हुआ खेल
- शारीरिक फिटनेस (Physical Fitness) – शारीरिक फिटनेस शरीर की वह क्षमता है जिससे रोज़ का काम, खेल और स्पर्धा ऊर्जा बचाकर की जा सके। इसके पाँच स्वास्थ्य संबंधी घटक (हृदय-श्वसन सहनशक्ति, पेशीय शक्ति, पेशीय सहनशक्ति, लचीलापन, शरीर संरचना) और छह कौशल संबंधी घटक (गति, फुर्ती, विस्फोटक शक्ति, संतुलन, तालमेल, प्रतिक्रिया समय) हैं। इसे FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) और अधिभार, प्रगति, विशिष्टता, विश्राम, उत्क्रमणीयता जैसे सिद्धांतों वाली योजना से बढ़ाते हैं।
2. स्वास्थ्य और फिटनेस
फिटनेस और योग
- योग: शरीर, साँस और मन का मेल – योग का अर्थ है जोड़ना: यह शरीर, साँस और मन को जोड़ता है। अष्टांग योग के 8 अंग हैं: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि। आसन स्थिर और सुखद मुद्राएँ हैं; प्राणायाम साँस पर नियंत्रण (पूरक–कुंभक–रेचक) है; षट्कर्म छह शुद्धि क्रियाएँ हैं। नियमित योग से लचीलापन, ताक़त, संतुलन, एकाग्रता और मनोदशा सुधरती है, तनाव घटता है, और मोटापा, मधुमेह, दमा, उच्च रक्तचाप, कमर दर्द व गठिया जैसे जीवनशैली रोगों से बचाव और नियंत्रण में मदद मिलती है।
3. सेवा
सामुदायिक सेवा
- स्वयंसेवा: अपना समय देकर दुनिया बेहतर बनाना – स्वयंसेवा का अर्थ है अपनी मर्ज़ी से, बिना पैसे लिए, दूसरों या प्रकृति की मदद में अपना समय और हुनर देना। इसकी जड़ में परोपकार (दूसरों की भलाई की चिंता), मानवीय गरिमा (हर व्यक्ति सम्मान का हक़दार) और एकजुटता जैसे मूल्य हैं। इसके कई प्रकार हैं: लोगों की मदद, पर्यावरण, पशु कल्याण, संस्कृति और खेल, आपदा सहायता और ऑनलाइन सेवा। अच्छा प्रोजेक्ट एक चक्र अपनाता है: असली ज़रूरत पहचानो, प्रभावित लोगों के साथ योजना बनाओ, सुरक्षित काम करो, फिर सोचो और सुधारो। इससे समाज को भी लाभ होता है और स्वयंसेवक को भी: नए हुनर, दोस्त, आत्मविश्वास। यह नागरिक समाज में भाग लेने और स्थानीय फ़ैसलों पर असर डालने का एक तरीका है।
4. स्वास्थ्य एवं कल्याण
कल्याण
- स्वास्थ्य और रोग – स्वास्थ्य का मतलब है शरीर, मन और सामाजिक जीवन तीनों में पूरी तरह ठीक होना, केवल बीमार न होना नहीं। संक्रामक रोग रोगाणुओं (जीवाणु, विषाणु, कवक, प्रोटिस्ट) से होते हैं और हवा, पानी, भोजन, छूने या जानवरों से एक से दूसरे में फैलते हैं। हृदय रोग, मधुमेह, कई कैंसर और उच्च रक्तचाप जैसे असंक्रामक रोग नहीं फैलते; ये जीन, उम्र और जीवनशैली से जुड़े हैं। बचाव: स्वच्छता, साफ़ पानी, टीके, संतुलित आहार, व्यायाम, नींद, धूम्रपान से दूरी, नियमित जाँच और स्व-जाँच। एंटीबायोटिक जीवाणु मारते हैं, विषाणु नहीं; इनके ग़लत उपयोग से प्रतिरोधी जीवाणु पनपते हैं। दवा पर्चे या डॉक्टर के कहे अनुसार ही लें।