Ukraine 10 клас Art
अध्याय: 5
1. Art of the African cultural region
African art
- विश्व कला: अलग-अलग संस्कृतियाँ कला कैसे बनाती हैं – हर सांस्कृतिक क्षेत्र की अपनी कला-भाषा है, जो उसकी आस्था, सामग्री और जीवन-शैली से बनती है। अफ़्रीकी कला मुखौटों, लकड़ी की मूर्तियों, काँसे और कपड़ों में साहसी, सरल आकार इस्तेमाल करती है, अक्सर अनुष्ठान और समुदाय के लिए, और इसने क्यूबिज़्म जैसी आधुनिक यूरोपीय कला को प्रेरित किया। भारतीय कला बारीकी और समरूपता से भरी है: मंदिर शिखर, स्तूप, मूर्तियाँ, लघु और लोक चित्र। सुदूर पूर्वी कला ब्रश-स्याही, सुलेख और खाली जगह को महत्व देती है। अरब-इस्लामी कला नियम से दोहराकर ज्यामितीय तारे, अरबेस्क और सुलेख बनाती है। कोलंबस-पूर्व अमेरिका ने सीढ़ीदार पिरामिड, कपड़े और सोने का काम बनाया; बाद में टोटम और मैक्सिकन भित्ति चित्र आए। यूरोपीय कला यूनानी स्तंभों से गॉथिक, पुनर्जागरण के परिप्रेक्ष्य और आधुनिक शैलियों तक जाती है। किसी कृति को समझने के लिए उसका वर्णन करें, उसकी संस्कृति से जोड़ें, अपनी भावना पहचानें, फिर उस शैली में ख़ुद कुछ बनाएँ।
2. Art of the American cultural region
North and Latin American art
- विश्व कला: अलग-अलग संस्कृतियाँ कला कैसे बनाती हैं – हर सांस्कृतिक क्षेत्र की अपनी कला-भाषा है, जो उसकी आस्था, सामग्री और जीवन-शैली से बनती है। अफ़्रीकी कला मुखौटों, लकड़ी की मूर्तियों, काँसे और कपड़ों में साहसी, सरल आकार इस्तेमाल करती है, अक्सर अनुष्ठान और समुदाय के लिए, और इसने क्यूबिज़्म जैसी आधुनिक यूरोपीय कला को प्रेरित किया। भारतीय कला बारीकी और समरूपता से भरी है: मंदिर शिखर, स्तूप, मूर्तियाँ, लघु और लोक चित्र। सुदूर पूर्वी कला ब्रश-स्याही, सुलेख और खाली जगह को महत्व देती है। अरब-इस्लामी कला नियम से दोहराकर ज्यामितीय तारे, अरबेस्क और सुलेख बनाती है। कोलंबस-पूर्व अमेरिका ने सीढ़ीदार पिरामिड, कपड़े और सोने का काम बनाया; बाद में टोटम और मैक्सिकन भित्ति चित्र आए। यूरोपीय कला यूनानी स्तंभों से गॉथिक, पुनर्जागरण के परिप्रेक्ष्य और आधुनिक शैलियों तक जाती है। किसी कृति को समझने के लिए उसका वर्णन करें, उसकी संस्कृति से जोड़ें, अपनी भावना पहचानें, फिर उस शैली में ख़ुद कुछ बनाएँ।
3. Art of the Far East cultural region
Far Eastern art
- विश्व कला: अलग-अलग संस्कृतियाँ कला कैसे बनाती हैं – हर सांस्कृतिक क्षेत्र की अपनी कला-भाषा है, जो उसकी आस्था, सामग्री और जीवन-शैली से बनती है। अफ़्रीकी कला मुखौटों, लकड़ी की मूर्तियों, काँसे और कपड़ों में साहसी, सरल आकार इस्तेमाल करती है, अक्सर अनुष्ठान और समुदाय के लिए, और इसने क्यूबिज़्म जैसी आधुनिक यूरोपीय कला को प्रेरित किया। भारतीय कला बारीकी और समरूपता से भरी है: मंदिर शिखर, स्तूप, मूर्तियाँ, लघु और लोक चित्र। सुदूर पूर्वी कला ब्रश-स्याही, सुलेख और खाली जगह को महत्व देती है। अरब-इस्लामी कला नियम से दोहराकर ज्यामितीय तारे, अरबेस्क और सुलेख बनाती है। कोलंबस-पूर्व अमेरिका ने सीढ़ीदार पिरामिड, कपड़े और सोने का काम बनाया; बाद में टोटम और मैक्सिकन भित्ति चित्र आए। यूरोपीय कला यूनानी स्तंभों से गॉथिक, पुनर्जागरण के परिप्रेक्ष्य और आधुनिक शैलियों तक जाती है। किसी कृति को समझने के लिए उसका वर्णन करें, उसकी संस्कृति से जोड़ें, अपनी भावना पहचानें, फिर उस शैली में ख़ुद कुछ बनाएँ।
4. Art of the Indian cultural region
Indian art
- विश्व कला: अलग-अलग संस्कृतियाँ कला कैसे बनाती हैं – हर सांस्कृतिक क्षेत्र की अपनी कला-भाषा है, जो उसकी आस्था, सामग्री और जीवन-शैली से बनती है। अफ़्रीकी कला मुखौटों, लकड़ी की मूर्तियों, काँसे और कपड़ों में साहसी, सरल आकार इस्तेमाल करती है, अक्सर अनुष्ठान और समुदाय के लिए, और इसने क्यूबिज़्म जैसी आधुनिक यूरोपीय कला को प्रेरित किया। भारतीय कला बारीकी और समरूपता से भरी है: मंदिर शिखर, स्तूप, मूर्तियाँ, लघु और लोक चित्र। सुदूर पूर्वी कला ब्रश-स्याही, सुलेख और खाली जगह को महत्व देती है। अरब-इस्लामी कला नियम से दोहराकर ज्यामितीय तारे, अरबेस्क और सुलेख बनाती है। कोलंबस-पूर्व अमेरिका ने सीढ़ीदार पिरामिड, कपड़े और सोने का काम बनाया; बाद में टोटम और मैक्सिकन भित्ति चित्र आए। यूरोपीय कला यूनानी स्तंभों से गॉथिक, पुनर्जागरण के परिप्रेक्ष्य और आधुनिक शैलियों तक जाती है। किसी कृति को समझने के लिए उसका वर्णन करें, उसकी संस्कृति से जोड़ें, अपनी भावना पहचानें, फिर उस शैली में ख़ुद कुछ बनाएँ।
5. Art of the Arab-Muslim cultural region
Arab-Muslim art
- विश्व कला: अलग-अलग संस्कृतियाँ कला कैसे बनाती हैं – हर सांस्कृतिक क्षेत्र की अपनी कला-भाषा है, जो उसकी आस्था, सामग्री और जीवन-शैली से बनती है। अफ़्रीकी कला मुखौटों, लकड़ी की मूर्तियों, काँसे और कपड़ों में साहसी, सरल आकार इस्तेमाल करती है, अक्सर अनुष्ठान और समुदाय के लिए, और इसने क्यूबिज़्म जैसी आधुनिक यूरोपीय कला को प्रेरित किया। भारतीय कला बारीकी और समरूपता से भरी है: मंदिर शिखर, स्तूप, मूर्तियाँ, लघु और लोक चित्र। सुदूर पूर्वी कला ब्रश-स्याही, सुलेख और खाली जगह को महत्व देती है। अरब-इस्लामी कला नियम से दोहराकर ज्यामितीय तारे, अरबेस्क और सुलेख बनाती है। कोलंबस-पूर्व अमेरिका ने सीढ़ीदार पिरामिड, कपड़े और सोने का काम बनाया; बाद में टोटम और मैक्सिकन भित्ति चित्र आए। यूरोपीय कला यूनानी स्तंभों से गॉथिक, पुनर्जागरण के परिप्रेक्ष्य और आधुनिक शैलियों तक जाती है। किसी कृति को समझने के लिए उसका वर्णन करें, उसकी संस्कृति से जोड़ें, अपनी भावना पहचानें, फिर उस शैली में ख़ुद कुछ बनाएँ।