Spain 1º Bachillerato Philosophy
अध्याय: 3
1. Philosophy and the human being
Philosophical reflection on philosophy itself · The human being as subject and object of philosophy
- दर्शनशास्त्र क्या है? सवाल, शाखाएँ और तर्क – दर्शन (फ़िलॉसफ़ी) का अर्थ है "ज्ञान से प्रेम"। यह बड़े सवाल पूछता है (असली क्या है, हम कैसे जानते हैं, सही क्या है, सुंदर क्या है) और उनके जवाब साफ़ कारणों से देता है। इसकी शाखाएँ हैं तत्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा, नीतिशास्त्र, तर्कशास्त्र, सौंदर्यशास्त्र आदि, और यह हमारा विश्व-दृष्टिकोण बनाता है।
- दार्शनिक मानवशास्त्र: इंसान क्या है? – दार्शनिक मानवशास्त्र पूछता है कि इंसान क्या है। इंसान पूछने वाला भी है और जिसे जाँचा जाता है वह भी (कर्ता और विषय)। विचारक हमारी तुलना पशुओं से करते हैं: कुछ को गहरा फ़र्क दिखता है (विवेक, भाषा, खुली दुनिया), कुछ को सिर्फ़ मात्रा का। मुख्य नज़रिये इंसान को विवेकशील प्राणी, शरीर और मन का मेल (द्वैतवाद) या एक ही जीवित सत्ता (एकत्ववाद), सामाजिक और सांस्कृतिक प्राणी, और अस्तित्ववादियों के अनुसार स्वतंत्र, अधूरा प्राणी मानते हैं जो अपने चुनावों से खुद को बनाता है। विज्ञान और तकनीक (विकासवाद, दिमाग पर शोध, AI) यह सवाल बार-बार खोलते हैं।
2. Knowledge and reality
The philosophical problem of knowledge and truth · The ultimate nature of reality
- ज्ञानमीमांसा: ज्ञान क्या है? – ज्ञानमीमांसा दर्शन की वह शाखा है जो पूछती है कि ज्ञान क्या है, हमें कैसे मिलता है और हम कितने पक्के हो सकते हैं। एक पुराना उत्तर: ज्ञान वह विश्वास है जो सच हो और जिसके अच्छे कारण हों (औचित्यपूर्ण सत्य विश्वास)। पर संयोग वाले उदाहरण (गेटियर) दिखाते हैं कि इतना शायद काफ़ी नहीं। ज्ञान तर्क (बुद्धिवाद) और इंद्रियों के अनुभव (अनुभववाद) से आता है; कांट ने कहा दोनों चाहिए। सत्य के सिद्धांत: संवाद (तथ्यों से मेल), संगति (दूसरे विश्वासों से मेल) और व्यावहारिक (काम करे)। संदेहवाद याद दिलाता है कि इंद्रियाँ और तर्क धोखा दे सकते हैं, इसलिए हम जाँचते हैं।
- तत्वमीमांसा: असल में वास्तविक क्या है? – तत्वमीमांसा (metaphysics) दर्शन का वह हिस्सा है जो पूछता है कि दुनिया सबसे गहरे स्तर पर कैसी है। सत्तामीमांसा (ontology) पूछती है कि क्या-क्या अस्तित्व में है: मूर्त चीज़ें, संख्या जैसी अमूर्त चीज़ें, या दोनों। तत्वमीमांसा द्रव्य और गुण, परिवर्तन और पहचान (थीसियस का जहाज़), मन और शरीर (द्वैतवाद, भौतिकवाद, प्रत्ययवाद), काल और कार्य-कारण, और स्वतंत्र इच्छा बनाम नियतिवाद पर सोचती है। ब्रह्मांड, प्रकृति और जीवन के बड़े सवाल भी इसी में आते हैं। पारमेनाइडीज़, हेराक्लिटस, प्लेटो, अरस्तू, देकार्त, ह्यूम, कांट और भारत के न्याय व अद्वैत वेदांत ने अलग-अलग उत्तर दिए।
3. Action and creation
Human action: ethics and political philosophy · Philosophical reflection on artistic creation
- नीतिशास्त्र: कैसे तय करें कि क्या सही है – नीतिशास्त्र (नैतिक दर्शन) पूछता है कि हमें क्या करना चाहिए और क्यों। ईमानदारी, दया, न्याय और सम्मान जैसे मूल्य चुनाव में राह दिखाते हैं। तीन मुख्य सिद्धांत: परिणाम (उपयोगितावाद, बेंथम और मिल: ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का ज़्यादा भला), कर्तव्य (कांट: ऐसा नियम अपनाओ जो सब अपना सकें; लोगों को साध्य मानो, सिर्फ़ साधन नहीं) और सद्गुण (अरस्तू: अच्छा चरित्र बनाओ; सद्गुण दो अतियों का मध्य है)। अंतरात्मा सही-ग़लत की भीतरी समझ है। स्वतंत्रता ज़िम्मेदारी लाती है। अधिनीतिशास्त्र पूछता है "अच्छा" का अर्थ क्या है और मूल्य सार्वभौमिक हैं या सापेक्ष। व्यावहारिक नीतिशास्त्र पर्यावरण, पशु, काम, मित्रता और शांति पर लागू होता है।
- कला का दर्शन: कला क्या है, और क्यों ज़रूरी है? – कला का दर्शन (सौंदर्यशास्त्र का हिस्सा) पूछता है: कला क्या है, सुंदरता क्या है, क्या रुचि सिर्फ़ निजी है, रचनाकार कौन है, और क्या कला सच दिखा सकती है? जवाब बदलते रहे हैं: "कला प्रकृति की नक़ल है" से "कला भावना है" तक और "विचार ही कला है" तक।