Poland Liceum ogólnokształcące, klasa III Business and Management (extended level)
अध्याय: 2
1. Personal finance and financial markets
Risk and investment strategy · Instruments and the stock exchange · Insurance, money and consumer protection
- निवेश की बुनियादी बातें: शेयर, बॉन्ड, फ़ंड और जोखिम – बचत पैसे को सुरक्षित रखती है; निवेश पैसे को काम पर लगाता है ताकि वह महँगाई से तेज़ बढ़ सके। शेयर से तुम कंपनी के छोटे हिस्सेदार बनते हो, बॉन्ड एक उधार है जिस पर तय ब्याज मिलता है, और फ़ंड बहुत सारे शेयरों या बॉन्डों की टोकरी है। ज़्यादा संभावित कमाई के साथ ज़्यादा जोखिम आता है। पैसे को कई जगह बाँटना (विविधीकरण) और लंबे समय तक टिके रहना (चक्रवृद्धि) दो सबसे सुरक्षित आदतें हैं।
- शेयर बाज़ार: शेयर कैसे ख़रीदे-बेचे जाते हैं – शेयर कंपनी के स्वामित्व का छोटा हिस्सा है। कंपनी IPO (प्राथमिक बाज़ार) में नए शेयर बेचकर पैसा जुटाती है। उसके बाद निवेशक ब्रोकर के ज़रिए स्टॉक एक्सचेंज (द्वितीयक बाज़ार) पर आपस में शेयर ख़रीदते-बेचते हैं; शेयर डिपॉज़िटरी में डीमैट खाते में रहते हैं, और SEBI या SEC जैसा नियामक निवेशकों की रक्षा करता है। भाव ऑर्डर बुक में ख़रीद और बिक्री आदेशों के मिलने से तय होता है: ज़्यादा ख़रीदार भाव ऊपर, ज़्यादा विक्रेता नीचे। सूचकांक (निफ़्टी 50, S&P 500, WIG20) बड़ी कंपनियों की टोकरी दर्शाता है। निवेशक बॉन्ड, ट्रेज़री बिल और फ़ंड यूनिट भी ख़रीद सकते हैं। शेयर जोखिम भरे हैं, इसलिए विविधीकरण करो, लंबी अवधि सोचो और भीड़ के पीछे चलना, घबराकर बेचना, अति-आत्मविश्वास जैसे जाल से बचो।
- उपभोक्ता संरक्षण – उपभोक्ता संरक्षण का मतलब है ख़रीदारों को नकली माल, कम तौल, ज़्यादा कीमत और भ्रामक विज्ञापन जैसे अनुचित कामों से बचाना। यह उपभोक्ता और व्यवसाय दोनों के लिए ज़रूरी है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 छह अधिकार देता है (सुरक्षा, सूचना, चुनाव, सुनवाई, क्षतिपूर्ति, उपभोक्ता शिक्षा), उपभोक्ता से ज़िम्मेदारी की उम्मीद करता है, बताता है कि कौन शिकायत कर सकता है, और तीन स्तर बनाता है: ज़िला (₹50 लाख तक), राज्य (₹2 करोड़ तक) और राष्ट्रीय आयोग (₹2 करोड़ से ऊपर)। उपचार में मरम्मत, बदलना, कीमत वापसी और हर्जाना आते हैं। उपभोक्ता संगठन और NGO उपभोक्ताओं को शिक्षित करते और मदद करते हैं।
2. Labour market and employment
How the labour market works · Career and job search · Employment terms and ethics
- श्रम बाज़ार (Labour Market) – श्रम बाज़ार में मज़दूर अपना समय और हुनर बेचते हैं और नियोक्ता उसे खरीदते हैं। कंपनी को मज़दूर इसलिए चाहिए क्योंकि लोग उसका सामान खरीदते हैं (व्युत्पन्न माँग)। मज़दूरी बढ़े तो ज़्यादा लोग काम को तैयार होते हैं। मज़दूरी वहाँ तय होती है जहाँ माँग और पूर्ति मिलती हैं। न्यूनतम मज़दूरी वेतन बढ़ा सकती है पर नौकरियाँ घटा भी सकती है। यूनियन, एक बड़ा नियोक्ता (मोनोप्सनी), हुनर, भेदभाव और नई तकनीक भी मज़दूरी बदलते हैं।
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।
- रोज़गार क़ानून: किसी के लिए काम करने के नियम – रोज़गार क़ानून (श्रम क़ानून) नियोक्ता और कर्मचारी के रिश्ते के नियम हैं। रोज़गार अनुबंध तब बनता है जब कोई व्यक्ति वेतन के बदले, नियोक्ता के निर्देश में (अधीनता) काम करता है। अनुबंध स्थायी, निश्चित अवधि, एजेंसी के ज़रिए अस्थायी, अंशकालिक या दूरस्थ हो सकता है; सिविल या फ़्रीलांस अनुबंध नौकरी नहीं है। कर्मचारी के अधिकार हैं (कम से कम न्यूनतम वेतन, सीमित घंटे, आराम और सवेतन छुट्टी, सुरक्षित कार्यस्थल, बराबर व्यवहार, उत्पीड़न से मुक्ति) और कर्तव्य हैं (सावधान काम, वैध निर्देश मानना, वफ़ादारी, सुरक्षा नियम)। नियोक्ता क़ानून के भीतर काम व्यवस्थित कर सकता है और अनुशासन दे सकता है। सकल वेतन कर और सामाजिक बीमा से पहले का है, शुद्ध बाद का; नियोक्ता की कुल लागत ज़्यादा होती है। ट्रेड यूनियन सामूहिक समझौते करती हैं। अनुबंध इस्तीफ़े, वैध कारण और निष्पक्ष प्रक्रिया वाली बर्ख़ास्तगी, आपसी सहमति या अवधि ख़त्म होने से समाप्त होता है।