Netherlands HAVO 4 (bovenbouw, 2e fase) Arts: drama
अध्याय: 2
1. Drama theory
Drama and society · Meaning and conventions · Viewing a performance
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।
2. Acting and shaping
Acting · Shaping roles and scenes
- अभिनय: किरदार को ज़िंदा करना – अभिनय यानी किसी किरदार को दर्शकों के सामने सच्चाई से दिखाना। अभिनेता पहले परिस्थितियाँ (कौन, कहाँ, कब) और किरदार का लक्ष्य (उसे क्या चाहिए) समझता है। फिर शरीर (मुद्रा, हाव-भाव, स्तर, रुतबा) और आवाज़ (ज़ोर, रफ़्तार, सुर, ठहराव) से उसे दिखाता है। मंच पर अभिनय क्रिया और प्रतिक्रिया है: साथी को सुनो और जवाब दो। टाइमिंग, पॉज़ और तनाव दृश्य को आकार देते हैं, और रंगमंच असली सामाजिक मुद्दों को भी उठा सकता है।
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।