शब्द के हिस्से: मूल शब्द, उपसर्ग-प्रत्यय और शब्द परिवार
बहुत से शब्दों को अर्थ वाले छोटे हिस्सों में बाँटा जा सकता है।
- मूल शब्द (धातु / मूल): वह जड़ जिसमें मुख्य अर्थ होता है, जैसे योग, दया, बल।
- उपसर्ग: शब्द के आगे जुड़ने वाला हिस्सा: अ-, सु-, कु-, वि-, निर्-।
- प्रत्यय: शब्द के पीछे जुड़ने वाला हिस्सा: -ई, -वान, -लु।
- मूल या यौगिक: जो शब्द अकेला मूल है (योग), वह अव्युत्पन्न है; जो किसी और से बना है (योगी), वह व्युत्पन्न है।
- शब्द परिवार: एक ही मूल से बने सभी शब्द: योग, योगी, वियोग, सुयोग, कुयोग।
एक परिवार के शब्दों के अर्थ आपस में जुड़े होते हैं, इसलिए एक मूल जान लेने से कई शब्द समझ में आ जाते हैं।
उपसर्ग और प्रत्यय से शब्द बनाना
उपसर्ग या प्रत्यय जोड़कर नया शब्द बनाना व्युत्पत्ति / शब्द निर्माण कहलाता है। इसमें शब्द का रूप बदलता है।
- उपसर्ग से अर्थ बदलता है: अप + मान = अपमान; सम् + मान = सम्मान; वि + योग = वियोग; निर् + धन = निर्धन; सु + योग = सुयोग; कु + योग = कुयोग।
- प्रत्यय से शब्द का प्रकार अक्सर बदलता है: योग (संज्ञा) → योगी (संज्ञा, करने वाला); बल → बलवान (विशेषण); दया → दयालु (विशेषण)।
हर मेल से शब्द नहीं बनता: "अदया" जैसा मेल अलग अर्थ देता है और "सुबल" आम नहीं है। शब्दकोश में देखिए। कभी-कभी जुड़ते समय वर्ण बदलते हैं: सम् + मान = सम्मान (म् दोहरा होता है)।
समास: दो शब्दों का मेल
समास में दो (या अधिक) पूरे शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं, जिसका अपना अर्थ होता है: राज + महल = राजमहल, पाठ + शाला = पाठशाला, देश + भक्त = देशभक्त। जुड़ने पर बीच की विभक्ति या "का, के, को" जैसे शब्द छूट जाते हैं (राजा का महल → राजमहल)। अर्थ कभी-कभी सीधा जोड़ नहीं होता।
अंतर याद रखिए: उपसर्ग-प्रत्यय छोटे हिस्से हैं जो अकेले नहीं चलते; समास में दोनों हिस्से अकेले भी शब्द हैं।
शब्द बनाने के दूसरे तरीके
- रूप न बदले, प्रकार बदले: कुछ शब्द बिना बदले दूसरे प्रकार में चलते हैं। जैसे अंग्रेज़ी में water संज्ञा से क्रिया बनता है। हिंदी में "आगे" जैसे शब्द क्रिया-विशेषण और संबंधबोधक दोनों रूप में आते हैं।
- संक्षेपण: शब्द छोटा करना: टेलीफ़ोन → फ़ोन।
- मिश्रण: दो शब्दों के हिस्से मिलाना (अंग्रेज़ी smog = smoke + fog)।
- संक्षिप्त नाम: पहले अक्षरों से बनना: लेज़र, PIN।
आगत शब्द और व्युत्पत्ति
भाषा दूसरी भाषाओं से शब्द ले भी लेती है। इन्हें आगत (विदेशी) शब्द कहते हैं। हिंदी ने अंग्रेज़ी से स्कूल, ट्रेन, अरबी-फ़ारसी से कुर्सी, बाज़ार, किताब लिए। अंग्रेज़ी ने हिंदी से जंगल (jungle), बंगला (bungalow), पजामा (pyjamas) और शैम्पू (champo से) लिए। शब्द अक्सर नई भाषा की ध्वनि और वर्तनी में ढल जाता है।
व्युत्पत्ति (शब्दों की उत्पत्ति का अध्ययन) बताती है कि शब्द कहाँ से आया और उसका रूप-अर्थ कैसे बदला। अच्छे शब्दकोश में यह कोष्ठक में दी होती है। हिंदी के शब्द चार तरह के माने जाते हैं: तत्सम (संस्कृत जैसे), तद्भव (बदले रूप), देशज और विदेशी।
निवासी-बोधक शब्द, संबंध-बोधक रूप और लघुरूप
- निवासी के नाम जगह के नाम में प्रत्यय लगाकर बनते हैं: भारत → भारतीय, दिल्ली → दिल्लीवासी, बंगाल → बंगाली, इटली → इतालवी।
- अधिकार-बोधक रूप: हिंदी में "का, की, के" लगाते हैं (राम का)। कुछ भाषाओं (पोलिश, यूक्रेनी) में नाम से सीधे संबंधसूचक विशेषण बनता है।
- लघुरूप: छोटेपन या प्यार का भाव देते हैं: बेटी → बिटिया, चिड़ी → चिड़िया, डिब्बा → डिब्बी। बोलचाल और कहानियों में अपनापन आता है; औपचारिक लेखन में बचिए।
बोलना और लिखना: ध्वनि-बदलाव और बलाघात
हिस्से जुड़ने पर ध्वनि बदल सकती है। जैसे सम् + मान = सम्मान, सत् + जन = सज्जन। बोलने में जो ध्वनि सुनाई देती है, वह लिखावट से अलग हो सकती है। कई भाषाओं (जैसे पोलिश) में शब्द के अंत की सघोष ध्वनि अघोष बोली जाती है, पर लिखी मूल वर्तनी में जाती है।
बलाघात (किस अक्षर पर ज़ोर) भी शब्द बनने पर बदल सकता है। पोलिश में ज़ोर आमतौर पर अंतिम से पहले अक्षर पर पड़ता है, पर कुछ शब्दों (लैटिन-ग्रीक मूल, जैसे matematyka) में अंतिम से तीसरे पर। पहले नियम सीखिए, फिर अपवाद।
करके देखिए
3D शब्द-निर्माता में "योग" और "बल" से जितने सही शब्द बन सकें, बनाइए। घर पर: मूल "धर्म" या "कर" लेकर उससे बने सारे शब्द लिखिए। उपसर्ग नीले रंग से और प्रत्यय हरे रंग से घेरिए। फिर अपनी भाषा के तीन समास खोजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उपसर्ग + मूल + प्रत्यय (वि + योग; योग + ई = योगी)
- समास: शब्द + शब्द (राज + महल = राजमहल)
- संक्षेपण: टेलीफ़ोन → फ़ोन
- आगत शब्द: दूसरी भाषा से लिया शब्द (स्कूल, कुर्सी)
- शब्द परिवार: एक मूल से बने सभी शब्द
हल किए गए उदाहरण
1. "निर्धन" को हिस्सों में बाँटकर नाम बताइए।
निर् (उपसर्ग) + धन (मूल शब्द)। उपसर्ग ने "धन-रहित" अर्थ दिया।
2. "पाठशाला" उपसर्ग-प्रत्यय वाला शब्द है या समास? क्यों?
समास। इसमें दो पूरे शब्द हैं जो अकेले भी चलते हैं: पाठ + शाला।
3. "दयालु" किस तरह बना? इसका मूल शब्द बताइए।
मूल शब्द दया है और प्रत्यय "-लु" जुड़ा है। दया + लु = दयालु (विशेषण)।
आम गलतियाँ
- उपसर्ग और प्रत्यय में गड़बड़ करना। उपसर्ग मूल शब्द के आगे, प्रत्यय पीछे।
- हर लंबे शब्द को समास कहना। समास में दो पूरे शब्द होते हैं। "बलवान" (मूल + प्रत्यय) समास नहीं है।
- जुड़ते समय होने वाले बदलाव भूल जाना: सम् + मान = सम्मान।
- यह मानना कि कोई भी उपसर्ग किसी भी मूल से जुड़ जाए। हमेशा शब्दकोश में जाँचिए।