शब्दांश: पंक्ति की धड़कनें गिनना
शब्दांश शब्द में ध्वनि की एक धड़कन है। "बूँद" में दो हैं (बूँ-द), "बादल" में तीन (बा-द-ल), "रात" में एक। आसान तरीका: ठोड़ी के नीचे हाथ रखिए और गिनिए कि शब्द बोलते समय जबड़ा कितनी बार गिरा।
कई पुरानी कविताएँ तय गिनती पर चलती हैं। जापानी छोटी कविता हाइकु में पंक्तियाँ 5, 7 और 5 ध्वनि-इकाइयों की होती हैं, और पुराना वाका रूप 5-7-5-7-7 का होता है। भारतीय दोहे में दो पंक्तियाँ होती हैं, लगभग 13 और 11 मात्राओं की (मात्रा ध्वनि की लंबाई की इकाई है, लघु या दीर्घ)। इकाइयाँ भाषा के अनुसार अलग हैं, पर विचार वही है: गिनती कविता को आकार देती है।
कोशिश कीजिए: "Morning rain on leaves" में 5 शब्दांश हैं (Mor-ning rain on leaves)।
लय: ज़ोरदार और हल्की धड़कनें
लय ज़ोरदार (बलाघात वाली) और हल्की धड़कनों का पैटर्न है। बोलिए "बा-रिश ज़ोर से आई": हल्का, ज़ोरदार, हल्का, ज़ोरदार। यह स्थिर "ता-ताम, ता-ताम, ता-ताम" छंद की चाल (metre) कहलाती है।
लय कविता को संगीत देती है। तेज़ लय उत्साह जैसी लगती है, धीमी लय शांति या उदासी जैसी। जब पैटर्न जानबूझकर टूटता है तो वह शब्द अलग से ध्यान खींचता है।
ध्वनि की गूँज: तुक और अनुप्रास
तुक तब होती है जब शब्द एक-सी ध्वनि पर खत्म हों: रात और बात। पंक्तियों के अंत की तुक "खट" से बैठने का एहसास देती है।
अनुप्रास तब होता है जब पास-पास के शब्द एक-सी ध्वनि से शुरू हों: "बड़ी बूँदें बरसीं"। स्वर-गूँज (assonance) शब्दों के भीतर किसी स्वर को दोहराती है: "धीमे-धीमे चलो"। गूँज से पंक्तियाँ बोलने और याद रखने में आसान होती हैं, इसीलिए कहावतें और नारे इनका उपयोग करते हैं।
शब्दों का खेल: कड़ी-शब्द और तय विशेषण-शब्द
कड़ी-शब्द (जापानी शास्त्रीय कविता में केकेकोतोबा) एक ऐसा शब्द है जिसके दो अर्थ हों और जो इसलिए दो विचारों को जोड़ दे। उदाहरण: "जो बीत गया वह कल / कल फिर सूरज निकलेगा": पहला कल बीता दिन है, दूसरा आने वाला दिन, और एक शब्द दोनों आधे भाग जोड़ता है। संस्कृत और हिंदी कविता में श्लेष (दो अर्थ वाला शब्द-खेल) भी ऐसा ही काम करता है।
तय विशेषण-शब्द (जापानी में मकुरकोतोबा, "तकिया-शब्द") एक तय सहायक शब्द है जो किसी एक खास शब्द से पहले हमेशा आता है, जैसे "चाँद" से पहले "रुपहला" या धावक से पहले "तेज़-पाँव"। वह मनःस्थिति बनाता है और लय भरता है। पुरानी मौखिक कविताओं में गायक को याद रखने और ताल बनाए रखने के लिए ऐसे तय वाक्यांश होते थे।
वाक्पटुता: मनाने के लिए भाषण को ढालना
वाक्पटुता का अर्थ है शब्दों की ध्वनि और ढाँचे से श्रोताओं को प्रभावित करना। आम औज़ार:
- दोहराव: किसी मुख्य शब्द या वाक्यांश को फिर कहना।
- समान ढाँचा: विचारों को एक-सा व्याकरणिक रूप देना ("आए, देखा, सीखा")।
- तीन का नियम: तीन चीज़ें पूरी लगती हैं, और बढ़ते आकार में (उठो। जुटो। चमको।) चढ़ाई जैसी।
- प्रश्नालंकार: असर के लिए पूछा सवाल, उत्तर के लिए नहीं।
- विरोध: बात को तीखा बनाने के लिए उलटी चीज़ें साथ रखना।
करके देखिए
- बारिश या सुबह के दृश्य पर 5, 7 और 5 शब्दांश की तीन पंक्तियाँ लिखिए। ताली बजाकर जाँचिए।
- एक-सी ध्वनि से शुरू होने वाले दो शब्दों को रेखांकित कीजिए। क्या पंक्ति 1 और 3 के अंत में तुक जोड़ सकते हैं?
- दो अर्थों वाला शब्द खोजिए (जैसे कल, आम, पत्र) और उससे दो छोटे विचार जोड़िए।
- अपनी कक्षा के लिए तीन भागों वाला नारा लिखिए, हर भाग पिछले से थोड़ा लंबा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शब्दांश = शब्द में ध्वनि की एक धड़कन
- हाइकु गिनती = 5 - 7 - 5 (17 इकाइयाँ); वाका = 5 - 7 - 5 - 7 - 7 (31 इकाइयाँ)
- लय = ज़ोरदार और हल्की धड़कनों का पैटर्न
- तुक = अंत की एक-सी ध्वनि; अनुप्रास = शुरुआत की एक-सी ध्वनि
- कड़ी-शब्द = एक शब्द, दो अर्थ; तय विशेषण-शब्द = नाम से पहले जुड़ा तय सहायक शब्द
- तीन का नियम = वही ढाँचा x 3, चढ़ता हुआ
हल किए गए उदाहरण
1. शब्दांश गिनिए: "Quiet drops tap the old roof"।
Qui-et (2) + drops (1) + tap (1) + the (1) + old (1) + roof (1) = 7। यह 5-7-5 कविता की बीच की पंक्ति के लिए ठीक है।
2. ज़ोरदार धड़कनें चिह्नित कीजिए: "The rain came down at night"।
the RAIN came DOWN at NIGHT। पैटर्न: हल्का-ज़ोरदार, हल्का-ज़ोरदार, हल्का-ज़ोरदार। छह शब्दांश, तीन ज़ोरदार धड़कनें।
3. हर एक में अलंकार का नाम बताइए: (a) "बड़ी बूँदें बरसीं" (b) "रात / बात" (c) "रुपहला चाँद" (d) "उठो। जुटो। चमको।"
(a) अनुप्रास (शुरू की एक-सी ध्वनि)। (b) तुक (अंत की एक-सी ध्वनि)। (c) तय विशेषण-शब्द। (d) समान ढाँचे वाला तीन का नियम।
4. हाइकु में 3 पंक्तियाँ हैं। पंक्ति 1 में 4 शब्दांश, पंक्ति 2 में 7, पंक्ति 3 में 6। 5-7-5 बनाने के लिए क्या जोड़ें या घटाएँ?
पंक्ति 1: 1 जोड़ें (4 से 5)। पंक्ति 2: ठीक (7)। पंक्ति 3: 1 घटाएँ (6 से 5)। कुल 17 ही रहता है।
आम गलतियाँ
- शब्दांश की जगह शब्द गिन लेना। "तितली" एक शब्द है पर उसमें तीन शब्दांश हैं।
- तुक और लय को एक समझना। तुक अंत की ध्वनि है; लय धड़कनों का पैटर्न है।
- अनुप्रास को अक्षर का मेल समझना। ध्वनि मायने रखती है, केवल अक्षर नहीं।
- हर जगह अलंकार भर देना। बहुत दोहराव या बहुत चालें भाषण को थका देती हैं।