मौलिक शैली क्या है?
आपकी शैली आपके लिखने का ढंग है। मौलिक शैली वह है जो असली इंसान की आवाज़ लगे, नकल नहीं। यह तीन आदतों से बनती है: खास शब्द, ताज़ा चित्र और स्थिर स्वर। "मधुमक्खी की तरह व्यस्त" जैसे घिसे-पिटे वाक्यांशों से बचिए जो सब बोलते हैं; जो सच में देखते हैं उससे अपनी तुलना गढ़िए।
ब्योरे से शैली बनाइए
सामान्य शब्दों की जगह सटीक शब्द लीजिए: "अच्छा दिन" नहीं, "स्कूल की दीवार पर गुनगुनी धूप"। पाँचों इंद्रियाँ इस्तेमाल कीजिए: क्या दिखता, सुनाई देता, महकता, छूने में लगता और स्वाद में आता है? कमज़ोर क्रिया और फालतू शब्दों की जगह दमदार क्रिया ("पटका", "बह गया") चुनिए। एक मज़बूत ब्योरा तीन धुँधले ब्योरों से बेहतर है। ज़ोर से पढ़िए और जो शब्द कुछ नहीं जोड़ता उसे काट दीजिए।
अपना स्वर खोजना
स्वर (voice) लेखन में छिपा व्यक्तित्व है। जो लिखा उसे पढ़कर पूछिए: क्या मैं ऐसे बोलता? जिन लेखकों को पसंद करते हैं उनकी आदत देखिए और अपने शब्दों में आज़माइए। उनके वाक्य मत उतारिए; आदत लीजिए (जैसे छोटी चुटीली पंक्तियाँ या हल्का हास्य)। अपने अच्छे वाक्यांश नोटबुक में रखिए।
स्वर को पाठक और उद्देश्य से मिलाइए: औपचारिक (रिपोर्ट, अधिकारी को पत्र: लंबे शब्द, बोलचाल नहीं) या घरेलू (कहानी, दोस्त को संदेश: रोज़ के शब्द, छोटे वाक्य)।
वक्तृत्व: तीन का नियम और विरोध
वक्तृत्व (rhetoric) शब्दों को सोच-समझकर इस्तेमाल करने की कला है ताकि पाठक राज़ी हो या प्रभावित हो। दो आसान औज़ार:
- तीन का नियम: तीन की सूची पूरी लगती है और उसमें लय होती है: "तेज़, साफ़, सस्ता"।
- विरोध (antithesis): उलटी बातें साथ-साथ: "छोटे कदम, बड़ा बदलाव"।
वक्तृत्व के और औज़ार
- दोहराव: ज़ोर देने के लिए मुख्य वाक्यांश फिर कहना ("हम नहीं रुकेंगे। हम नहीं रुकेंगे।")।
- प्रश्नवाचक अलंकार: ऐसा प्रश्न जिसके उत्तर की ज़रूरत नहीं पर जो सोचने पर मजबूर करे।
- शुरुआती आकर्षण (hook): दमदार पहली पंक्ति (चौंकाने वाला तथ्य, छोटी कहानी, प्रश्न)।
- समानांतर रचना: एक ही वाक्य-ढाँचा दोहराना: "सीखना, बाँटना, बढ़ना"।
हर औज़ार किसी कारण से चुनिए। एक अनुच्छेद में बहुत औज़ार नकली लगते हैं; सही जगह पर एक औज़ार बेहतर है।
अपनी शैली जाँचें और सुधारें
- ज़ोर से पढ़िए: कहाँ अटकते हैं?
- घिसे वाक्यांश चिह्नित करके बदलिए।
- हर अनुच्छेद में कारण के साथ एक औज़ार देखिए।
- जाँचिए कि स्वर पाठक के अनुसार है।
- दोस्त से पूछिए: आपको कौन-सा चित्र दिखा?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सादा मूल + सटीक ब्योरा = जीवंत वाक्य
- तीन का नियम: क, ख और ग
- विरोध: यह, पर वह (उलटी बातें साथ)
- स्वर = शब्द-चयन + वाक्य-लंबाई + लहजा, पाठक से मेल
- हर अनुच्छेद में कारण के साथ एक औज़ार
हल किए गए उदाहरण
1. "बाज़ार में भीड़ थी।" को सटीक ब्योरे से सुधारिए।
"दुकानदार भाव चिल्ला रहे थे, स्कूटर हॉर्न बजा रहे थे और आमों की पेटियों पर गरम जलेबी की महक तैर रही थी।" इसमें आवाज़, महक और दृश्य तीनों हैं।
2. "भाषण अच्छा था" को तीन के नियम में बदलिए।
"भाषण साफ़, साहसी और दयालु था।" तीन छोटे गुण लय देते हैं और पूरे लगते हैं।
3. परीक्षा पर विरोध वाला वाक्य लिखिए।
"पिछली रात अंतहीन लगी; कमरे का एक घंटा एक मिनट जैसा लगा।" दो उलटे एहसास साथ-साथ हैं।
4. "सूचित किया जाता है कि प्रकाश-उपकरण अनुपलब्ध है" को घरेलू स्वर में लिखिए।
"माफ़ कीजिए, बत्ती खराब है।" रोज़ के छोटे शब्द स्वर को घरेलू बनाते हैं। औपचारिक रूप केवल सरकारी सूचना के लिए रखिए।
आम गलतियाँ
- घिसे-पिटे वाक्यांशों को मौलिक समझ लेना।
- एक सटीक शब्द की जगह ढेर सारे विशेषण भर देना।
- एक ही अनुच्छेद में सारे वक्तृत्व-औज़ार लगा देना।
- किसी लेखक के वाक्य उतारना, उसकी आदत सीखने की जगह।