Discourse (पाठ/संवाद) क्या है?
Discourse असली स्थिति में इस्तेमाल हुई भाषा है। यह एक वाक्य से लंबी होती है: बातचीत, भाषण, समाचार, पत्र, पोस्ट।
इसे पढ़ने के लिए चार सवाल पूछिए।
- कौन बोल या लिख रहा है?
- किसके लिए?
- क्यों: बताने, मनाने, मनोरंजन या भावना बाँटने के लिए?
- कहाँ: कक्षा में, फ़ोन पर, अख़बार में?
इन चारों को मिलाकर संदर्भ (context) बनता है। शब्द संदर्भ के हिसाब से चुने जाते हैं।
संसक्ति (Cohesion) और जोड़ने वाले शब्द
संसक्ति का अर्थ है वे दिखने वाले जोड़ जो वाक्यों को बाँधते हैं।
- Connectives (योजक): and, but, so, because, however, then, finally; हिंदी में और, पर, इसलिए, क्योंकि, फिर।
- सर्वनाम: मीरा ... वह ... उसे।
- दोहराए या मिलते शब्द: बस, सड़क, पैदल।
- शब्द बदलना या छोड़ना: "पैदल चलना" की जगह "इसमें"। "मीरा की बस छूटी और (वह) पैदल गई" में भी जोड़ है।
काम के हिसाब से योजक चुनिए: इसलिए (नतीजा), पर (विरोध), क्योंकि (कारण), फिर (क्रम)।
संगति (Coherence) और बनावट
संगति का अर्थ है कि पूरा पाठ मिलकर समझ में आता है। जोड़ बहुत हों तब भी पाठ बेतुका हो सकता है, जैसे "बस पीली है। इसलिए चाँद दूर है।"
ज़्यादातर पाठों की एक बनावट होती है।
- शुरुआत: विषय बताती है।
- बीच: ब्योरे, कारण या घटनाएँ देता है।
- अंत: सार देता है या समाप्त करता है।
हर genre की अपनी बनावट है। कहानी में समस्या और हल होता है। समाचार में मुख्य बात पहले आती है। तर्क में दावा, कारण और निष्कर्ष। पत्र में संबोधन और अंत की पंक्ति।
संदर्भ, Register और Genre
Register वह शैली है जो स्थिति के हिसाब से चुनते हैं: प्रधानाचार्य से औपचारिक, दोस्त से बातचीत वाली। Genre पाठ का प्रकार है: पोस्टर, समीक्षा, भाषण, व्यंजन-विधि।
- बातचीत वाली: छोटे शब्द, अधूरे वाक्य, अनौपचारिक शब्द, emoji।
- औपचारिक: पूरे वाक्य, भारी शब्द, "परिणामस्वरूप" जैसे योजक।
अर्थ साझा जानकारी पर भी निर्भर है। "यहाँ ठंड है" तथ्य भी हो सकता है और खिड़की बंद करने का विनम्र अनुरोध भी। संदर्भ बताता है कि कौन सा।
भाषा पर विचार व्यक्त करने वाले पाठ
कुछ लेखक भाषा के बारे में ही लिखते हैं: क्या slang आलस है, क्या कोई भाषा मर रही है, क्या बच्चों को टोकना चाहिए। ऐसे पाठ को पढ़ते समय चार बातें देखिए।
- भाषा का चित्रण: लेखक भाषा को कैसे बताता है? "पतन" या "रचनात्मक" जैसे शब्द उसका विचार दिखाते हैं।
- लेखक की पहचान: वह कैसा व्यक्ति दिखता है: शिक्षक, अभिभावक, युवा? उसकी आवाज़ और उदाहरण यह बनाते हैं।
- पाठक को दिशा देना: "हम सब जानते हैं" कहकर सहमत कराता है, या प्रश्न पूछकर सोचने देता है?
- बड़ी बहसें: पाठ को बड़े सवालों से जोड़िए, जैसे सही-गलत कौन तय करता है, तकनीक लेखन को कैसे बदलती है, भाषाएँ कैसे बचाई जाएँ।
भाषा के आँकड़े पढ़ना और नतीजे बाँटना
असली भाषा समझने के लिए छोटा नमूना लीजिए: दस संदेश, एक भाषण, कुछ विज्ञापन। फिर:
- एक सवाल पूछिए, जैसे "कौन से योजक सबसे ज़्यादा आए?"
- जो मिले उसे गिनिए या निशान लगाइए।
- पैटर्न और संदर्भ से जुड़ा कारण खोजिए।
- नतीजे बाँटिए: क्या मिला बताइए, दो उदाहरण दिखाइए, और यह भी कहिए कि नमूना छोटा है इसलिए पक्का नहीं।
करके देखिए: किसी चैट की तीन पंक्तियाँ लीजिए और उन्हें औपचारिक सूचना बनाइए। लिखिए कि कौन से जोड़ आपने जोड़े।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पाठ = वाक्य + जोड़ (संसक्ति) + बनावट (संगति) + संदर्भ
- संदर्भ = वक्ता + श्रोता + उद्देश्य + जगह
- मुख्य योजक: so (नतीजा), but (विरोध), because (कारण), then (क्रम)
- भाषा पर विचार = भाषा का चित्रण + लेखक की पहचान + पाठक को दिशा
हल किए गए उदाहरण
1. जोड़ने वाला साधन पहचानिए: "मीरा की बस छूट गई। तो वह पैदल गई।"
"तो" नतीजे का योजक है। "वह" सर्वनाम है जो मीरा की ओर इशारा करता है।
2. क्या यह संगत है: "परीक्षा नौ बजे है। केला पीला होता है। पेन लाइए।"?
नहीं। बीच का वाक्य विषय से नहीं जुड़ता। उसे हटाने पर पाठ ठीक हो जाता है, इसलिए वह संगति तोड़ता है।
3. "बस छूटी, पैदल गई" को स्कूल की सूचना में बदलिए।
छात्रा की बस छूट गई, इसलिए वह पैदल विद्यालय आई। (पूरे वाक्य, औपचारिक योजक, बोलचाल के शब्द नहीं।)
4. लेखक कहता है "सब जानते हैं कि मैसेज से वर्तनी बिगड़ती है।" इसका क्या असर है?
यह पाठक को सहमत कराने की कोशिश है, मानो बात सबकी मानी हुई हो। सावधान पाठक सबूत माँगता है।
आम गलतियाँ
- संसक्ति और संगति को एक मानना। संसक्ति दिखने वाले जोड़ हैं; संगति पूरे पाठ का अर्थ।
- योजक ज़रूरत से ज़्यादा डालना। बहुत सारे "हालाँकि" और "इसलिए" अस्पष्ट विचार को ठीक नहीं करते।
- संदर्भ भूल जाना। एक जगह विनम्र शब्द दूसरी जगह अशिष्ट हो सकता है।
- एक register को "सही" और दूसरे को "गलत" कहना। हर एक अपनी स्थिति में ठीक है।