सीखना क्या है?
सीखना यानी अनुभव से किसी के ज्ञान, कौशल या भावना में टिकने वाला बदलाव। थक जाना या लंबाई बढ़ना सीखना नहीं है। अगले हफ़्ते तक नया शब्द याद रहना सीखना है।
मनोवैज्ञानिक और शिक्षक यह बदलाव समझाने के लिए सिद्धांत (साफ़ विचार) इस्तेमाल करते हैं। कोई एक सिद्धांत सब नहीं समझाता, इसलिए अच्छे शिक्षक कई को मिलाते हैं।
व्यवहारवाद: इनाम से सीखना
व्यवहारवादी कहते हैं कि सीखना व्यवहार का बदलाव है, जो क्रिया के बाद की घटना से तय होता है। क्रिया पर इनाम मिले तो हम उसे दोहराते हैं। बुरा नतीजा मिले तो कम करते हैं।
उदाहरण: होमवर्क पूरा करने पर तारा पाने वाला बच्चा उसे ज़्यादा पूरा करने लगता है। अभ्यास और तुरंत फ़ीडबैक आदत बनाते हैं। सीमा: यह समझ को नहीं समझाता, जैसे अचानक कोई बात "समझ आ जाना"।
संज्ञानात्मक और संरचनावादी दृष्टि
संज्ञानात्मक दृष्टि दिमाग़ के अंदर देखती है: हम ध्यान देते हैं, सोचते हैं, रखते हैं और याद करते हैं। नई बात पुराने ज्ञान से जुड़े तो ज़्यादा टिकती है। इसका एक मॉडल: जानकारी लो, उस पर काम करो, रखो, फिर इस्तेमाल करो।
संरचनावाद कहता है कि हर सीखने वाला अपना अर्थ खुद बनाता है; शिक्षक सिर्फ़ बताते नहीं, काम देते हैं और सवाल पूछते हैं। इसके सामाजिक रूप में हम बातचीत और साथ काम से ज्ञान बनाते हैं। जितनी ज़रूरत हो उतनी मदद देना और सुधार के साथ हटाना स्कैफ़ोल्डिंग (सहारा) कहलाता है।
प्रेरणा और सीखने वालों में अंतर
प्रेरणा वह कारण है जिससे आप शुरू करते हैं और चलते रहते हैं। भीतरी प्रेरणा रुचि या गर्व से आती है। बाहरी प्रेरणा अंकों, इनाम या तारीफ़ से आती है। दोनों मदद करती हैं, पर भीतरी ज़्यादा टिकती है।
सीखने वाले उम्र, पहले के ज्ञान, गति, भाषा, रुचि और ज़रूरी मदद में अलग होते हैं। अच्छा पाठ अलग-अलग विद्यार्थियों को एक ही लक्ष्य तक अलग रास्ते देता है।
रुकावटें और मददगार बातें
रुकावटें: तनाव और डर, शोर, भूख, कम नींद, अस्पष्ट निर्देश, उबाऊ काम, कम आत्मविश्वास।
मददगार बातें: पूरी नींद, नियमित अभ्यास, साफ़ लक्ष्य, उपयोगी फ़ीडबैक, शांत जगह, शिक्षक और दोस्तों का साथ।
करके देखिए: कुछ छोटा सीखिए
कोई नया छोटा काम चुनिए, जैसे काग़ज़ की नाव मोड़ना। दिन 1: अकेले कोशिश। दिन 2: दोस्त की मदद (सामाजिक)। दिन 3: किसी जाने हुए मोड़ से जोड़िए (संज्ञानात्मक)। दिन 4: हर सफलता पर खुद को तारा दीजिए (इनाम)। देखिए किस दिन सबसे अच्छा लगा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- व्यवहारवाद: क्रिया, फिर इनाम या नतीजा, फिर दोहराव
- संज्ञानात्मक: लेना, प्रक्रिया करना, रखना, याद करना
- संरचनावाद: सीखने वाला अर्थ बनाता है; शिक्षक राह दिखाता है
- स्कैफ़ोल्डिंग: मदद दो, फिर धीरे-धीरे हटाओ
- मुख्य शब्द: प्रेरणा (भीतरी, बाहरी), बाधा, सहायक, फ़ीडबैक
हल किए गए उदाहरण
1. हर बार ज़ोर से एक पन्ना पढ़ने पर स्टिकर पाने वाली बच्ची अब ज़्यादा पढ़ती है। यह कौन-सी दृष्टि है?
व्यवहारवाद: क्रिया के बाद का इनाम उसे दोहराने को प्रेरित करता है।
2. रोटी बाँटने से जोड़कर भिन्न जल्दी समझ आती है। यह कौन-सी दृष्टि है?
संज्ञानात्मक दृष्टि: नया विचार जाने हुए से जुड़ा।
3. शिक्षक पहले कदम दिखाता है, फिर संकेत देता है, फिर बच्चे को अकेले करने देता है। इसे क्या कहते हैं?
स्कैफ़ोल्डिंग, सामाजिक-संरचनावादी दृष्टि से।
4. शोर वाली कक्षा और भूखा विद्यार्थी: ये बाधा हैं या मदद?
दोनों बाधाएँ हैं, सीखना घटाती हैं।
आम गलतियाँ
- सीखने को सिर्फ़ रटना समझना। समझना और इस्तेमाल करना भी सीखना है।
- मान लेना कि एक ही सिद्धांत हमेशा सही है। अच्छा शिक्षण कई दृष्टियाँ मिलाता है।
- सोचना कि इनाम हमेशा मदद करता है। बहुत बाहरी इनाम भीतरी प्रेरणा घटा सकता है।
- नींद और खाने को नज़रअंदाज़ करना। ये सीखने की असली मदद हैं।