पहनावे की विविधता
लोग इतने अलग क्यों पहनते हैं? चार मुख्य कारण:
- जलवायु: गर्मी में हल्का ढीला सूती; ठंड में फर, ऊन और परतें।
- सामग्री: सूत, रेशम, ऊन, छाल का कपड़ा, चमड़ा, घास: हर जगह वही जो वहाँ मिले या व्यापार से आए।
- हुनर और औज़ार: बुनाई, रंगाई, कढ़ाई और सिलाई की परंपराएँ परिवारों और गाँवों में चलती हैं।
- संस्कृति और विश्वास: शालीनता, हैसियत, धर्म, त्योहार और सुंदरता की सोच। रंगों के मतलब अलग हैं: सफ़ेद कहीं शादी में पहना जाता है, कहीं शोक में।
कोई "बेहतर" नहीं है। हर एक अपनी जगह और लोगों के लिए ठीक जवाब है।
पोशाक बनाने के तीन तरीके
- लपेटा हुआ (draped): एक बिना कटा कपड़ा मोड़ा या लपेटा जाता है। उदाहरण: साड़ी, धोती, लुंगी, प्राचीन रोमन टोगा। हल्का, बनाने में आसान, एक नाप कई लोगों को।
- सीधी कटाई: आयत सिले जाते हैं। उदाहरण: किमोनो, कई चोगे और कुर्ते। कपड़ा बर्बाद नहीं होता और तह हो जाता है।
- नाप वाला (fitted): शरीर के आकार में डार्ट और सीवन के साथ कटे टेढ़े टुकड़े। उदाहरण: पश्चिमी सूट, फ़्रॉक, जीन्स। कसा हुआ पर सही नाप और ज़्यादा कपड़ा चाहिए।
3D देखो: चपटे पैटर्न टुकड़े एक लंबी पट्टी से, आयतों से, टेढ़े आकारों तक बदलते हैं।
इतिहास में जापानी पहनावा
- प्रारंभिक समय: भांग और दूसरे पौधों के रेशों के सरल कुर्ते और पायजामे।
- हेआन दरबार (लगभग 800 से 1100 के दशक): कुलीन रेशम की कई परतें पहनते थे। महिलाओं का दरबारी वेश जुनि-हितोए ("बारह परतें") कहलाता था। परतों के रंग मौसम से मेल खाते चुने जाते थे।
- किमोनो: एदो काल (1603 से 1868) से किमोनो सब वर्गों का रोज़ का पहनावा बना। सीधी कटाई हर शरीर पर आ जाती है और ओबी उसे बाँधे रखती है। रंग, नमूना और आस्तीन की लंबाई उम्र, मौसम और मौक़ा बताते हैं। धोने के लिए किमोनो खोला जाता है और फिर सिला जाता है।
- यूकाता: त्योहारों और नहाने के बाद पहना जाने वाला हल्का सूती गर्मी का किमोनो।
- पश्चिमी पोशाक: 1800 के उत्तरार्ध (मेइजी काल) से पश्चिमी कपड़े दफ़्तरों, स्कूलों और सेना में आए। अब वे रोज़ के कपड़े हैं।
- आज: लोग शादियों, चाय-समारोह, वयस्कता दिवस और त्योहारों में किमोनो पहनते हैं। बुनाई, रंगाई और कढ़ाई जैसे शिल्प आगे बढ़ाए जाते हैं और नए डिज़ाइनर पुराने नमूनों को नई शैली से मिलाते हैं।
दुनिया के पहनावे
- दक्षिण एशिया: साड़ी, धोती, सलवार-कमीज़, कुर्ता; सूती और रेशमी कपड़े, छपाई, बुनाई और कढ़ाई के साथ।
- पूर्वी एशिया: जापानी किमोनो, कोरियाई हानबोक (छोटी जैकेट के साथ घेरदार स्कर्ट या पायजामा), चीनी क़िपाओ (कसी पोशाक जो 1900 के शुरुआती दशकों में लोकप्रिय हुई)।
- अफ़्रीका: केंते (घाना, बुनी पट्टियों का कपड़ा), छपे लपेटने के कपड़े और चोगे; रंग और नमूनों के मतलब होते हैं।
- एंडीज़: पोंचो और बुना ऊनी कपड़ा, ठंडे पहाड़ों में गर्म।
- आर्कटिक क्षेत्र: फर या गर्म पार्का, परतदार और कलाई व टोपी पर कसे हुए ताकि गर्मी बनी रहे।
- यूरोप और पश्चिम: सिले सूट और फ़्रॉक; नाप वाली शैली मध्यकाल के अंत में बढ़ी और व्यापार तथा बाद में कारख़ानों से फैली।
कपड़े व्यापार, यात्रा और विचारों से भी फैलते हैं, इसलिए शैलियाँ एक-दूसरे से उधार लेती हैं। खुद करो: अपने क्षेत्र का एक पारंपरिक वस्त्र चुनो। उसकी जलवायु, सामग्री, कटाई का प्रकार (लपेटा, सीधा, नाप वाला) और कब पहना जाता है, लिखो।
पहनावे की संस्कृति को आगे बढ़ाना
पहनावे की संस्कृति हुनर (कताई, बुनाई, रंगाई, सिलाई, कढ़ाई), नमूनों और रंगों में और इस रीति में रहती है कि कब क्या पहनें। परिवार, शिल्प-गाँव और स्कूल इन्हें आगे देते हैं। इन्हें सीखना, हाथ का बना कपड़ा खरीदना और कपड़े सुधारकर पहनना संस्कृति को ज़िंदा रखता है और कचरा घटाता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तीन कटाइयाँ: लपेटा (एक कपड़ा) · सीधी कटाई (आयत) · नाप वाला (टेढ़े टुकड़े)
- पहनावा = जलवायु + सामग्री + हुनर + संस्कृति
- जापान: सरल कुर्ते → हेआन परतें → एदो किमोनो (रोज़) → मेइजी पश्चिमी पोशाक → समारोहों में किमोनो
- किमोनो = सीधे आयत + ओबी · यूकाता = हल्का सूती गर्मी का किमोनो
हल किए गए उदाहरण
1. एक साड़ी कई लोगों को क्यों आ जाती है, पर नाप वाली जैकेट नहीं?
साड़ी एक बिना कटा कपड़ा है, इसलिए पहनने वाले के हिसाब से लपेटी जाती है। नाप वाली जैकेट में टेढ़े टुकड़े एक ही नाप के लिए कटे हैं, इसलिए वह उसी नाप पर आती है।
2. सिलाई मशीन के बिना समाज के लिए किमोनो अच्छा क्यों था?
यह सीधे आयतों से बना है, जिन्हें हाथ से काटना-सिलना जल्दी होता है। कपड़ा बर्बाद नहीं होता और उसे खोलकर चपटा धोया और फिर सिला जा सकता है।
3. धोती, किमोनो और ट्राउज़र सूट की कटाई का प्रकार बताओ।
धोती: लपेटा हुआ। किमोनो: सीधी कटाई। ट्राउज़र सूट: नाप वाला (सिला)।
4. आर्कटिक पार्का में फर की टोपी और कसी कलाई क्यों होती है?
सिर और कलाइयों से गर्मी निकलती है। टोपी और कसी कलाई गर्म हवा रोकती हैं और फर चेहरे से हवा दूर रखता है।
आम गलतियाँ
- किसी संस्कृति के कपड़ों को "पिछड़ा" या "बेहतर" कहना। हर एक अपनी जगह ठीक है।
- सोचना कि किमोनो सिर्फ़ समारोहों के लिए है। यह सैकड़ों साल रोज़ का पहनावा था।
- कटाई के प्रकार गड़बड़ाना: साड़ी लपेटी जाती है, आकार में सिली नहीं जाती।
- कपड़े अलग क्यों हैं पूछते समय जलवायु और सामग्री को भूल जाना।