कढ़ाई: कपड़े के ऊपर नमूना
कढ़ाई यानी सुई और धागे से कपड़ा सजाना। कपड़ा आधार है; टाँके उसके ऊपर बैठते हैं। आम टाँके हैं: रनिंग स्टिच (टूटी रेखा), बैक स्टिच (पक्की रेखा) और साटन स्टिच (भरे हुए आकार)।
उपयोग: कॉलर, किनारी, जेब, दुपट्टे और बैज। कपड़े के हिसाब से धागा चुनिए: मोटे कपड़े में मोटा धागा। एक जगह में जितने ज़्यादा टाँके, नमूना उतना घना और सख़्त।
निटिंग और क्रोशिया: फंदों से कपड़ा
निटिंग में फंदे को फंदे में से खींचकर पंक्ति-दर-पंक्ति कपड़ा बनता है। क्रोशिया यही काम एक हुक से करता है। फंदे खुल-बंद हो सकते हैं, इसलिए निट कपड़ा खिंचता है और हवा रोकता है, यानी गर्म रहता है।
उपयोग: स्वेटर, मोज़े, टोपी और मफ़लर। मोटी ऊन बड़े फंदे और जल्दी बनने वाला गर्म कपड़ा देती है; पतली ऊन छोटे फंदे और मुलायम महीन कपड़ा देती है। आकार तय करने के लिए आड़े फंदे और पंक्तियाँ गिनिए।
पैचवर्क और एप्लीक: टुकड़े जोड़ना
पैचवर्क में कपड़े के छोटे टुकड़े साथ-साथ सिलकर नमूने वाला बड़ा टुकड़ा बनता है। एप्लीक में कटा हुआ आकार आधार कपड़े के ऊपर सिला जाता है। दोनों बचे कपड़े काम में लाते हैं, इसलिए कपड़ा बचता है।
उपयोग: रज़ाई, थैले, कुशन और जैकेट। पहले रंग तय कीजिए, सिलाई-छोड़ बराबर रखकर टुकड़े काटिए, और एक जैसी टाँके की लंबाई से सिलिए ताकि सतह सपाट रहे।
रोधी रंगाई और छपाई
रोधी रंगाई में कपड़े के कुछ हिस्सों को ढककर, बाँधकर या मोम लगाकर रंग से बचाया जाता है। रंगने और खोलने के बाद वे हिस्से पुराना रंग रखते हैं। टाई-डाई और बाँधनी में गाँठें बाँधते हैं; बाटिक में मोम लगाते हैं; शिबोरी में तह और क्लैंप लगाते हैं। ब्लॉक प्रिंटिंग में खुदे हुए ठप्पे पर रंग लगाकर कपड़े पर दबाते हैं।
उपयोग: दुपट्टे, कुर्ते, साड़ियाँ। कपड़े वाला या प्राकृतिक रंग लीजिए, और कपड़ा पहले धो लीजिए ताकि रंग बराबर चढ़े।
करके देखें: चार नमूनों की तुलना
पुराने कपड़े के चार छोटे टुकड़े लीजिए (हथेली जितने)। पहले पर रंगीन धागे से 10 रनिंग टाँके लगाइए; दूसरे पर मार्कर से नमूना बनाकर उस पर सिलाई कीजिए; तीसरे पर चार छोटे टुकड़े सिलकर जोड़िए; चौथे के बीच में रबर बैंड बाँधकर हल्दी या चाय के पतले पानी में डुबोइए (किसी बड़े की मदद से)। हर एक के लिए एक शब्द लिखिए: टाँके, नमूना, टुकड़े, छल्ले। 3D में हर तकनीक दबाइए और टाँके स्लाइडर चलाकर गिनती का बदलना देखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कढ़ाई = कपड़े के ऊपर टाँकों का नमूना
- निटिंग / क्रोशिया = फंदों की पंक्तियों से बना कपड़ा; खिंचता है और गर्म है
- पैचवर्क = टुकड़े साथ-साथ जोड़ना; एप्लीक = आकार ऊपर सिलना
- रोधी रंगाई = कुछ जगह रंग रोकना (बाँधना, मोम, तह) जिससे नमूना बने
- फंदों की गिनती = आड़े फंदे x पंक्तियाँ
हल किए गए उदाहरण
1. एक बुनने वाली आड़े 20 फंदे डालती है और 15 पंक्तियाँ बुनती है। कुल कितने फंदे?
फंदे = 20 x 15 = 300।
2. इनके लिए कौन-सी तकनीक चुनेंगे: (क) खिंचने वाली गर्म टोपी, (ख) कॉलर पर फूल, (ग) पुरानी कमीज़ों से बना थैला?
(क) निटिंग, क्योंकि फंदे खिंचते हैं और गर्म हवा रोकते हैं। (ख) कढ़ाई, क्योंकि नमूना कपड़े के ऊपर बैठता है। (ग) पैचवर्क, क्योंकि वह बचे टुकड़े जोड़ता है।
3. एक चौकोर पैचवर्क में आड़े 6 पैच और 5 पंक्तियाँ हैं। कुल पैच कितने? अगर हर पैच अलग कमीज़ से कटा है तो कितने टुकड़े चाहिए?
पैच = 6 x 5 = 30। हर पैच अलग कमीज़ से हो तो 30 टुकड़े चाहिए।
4. रोधी रंगाई के बाद दुपट्टे का बँधा बीच का हिस्सा सफ़ेद रहा। समझाइए।
बाँधने से उस हिस्से तक रंग नहीं पहुँचा, इसलिए वह पहले जैसा रंग रखे रहा। इसी तरह रोधी रंगाई नमूना बनाती है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि कढ़ाई कपड़ा बनाती है। कढ़ाई बने कपड़े को सजाती है; निटिंग खुद कपड़ा बनाती है।
- टाँके बहुत कसकर खींचना, जिससे कपड़े में सिकुड़न आ जाती है। तनाव बराबर और ढीला रखिए।
- रंगाई के लिए बिना धोया कपड़ा लेना। पहले धोइए, फिर बराबर रंगिए।
- पैचवर्क के टुकड़े अलग-अलग नाप के काटना। सतह सपाट नहीं बैठेगी।