ई-कचरा क्या है?
ई-कचरा वे इलेक्ट्रॉनिक या बिजली के उपकरण हैं जो टूटने, पुराने होने या बदले जाने पर फेंक दिए जाते हैं: मोबाइल, कंप्यूटर, प्रिंटर, TV, बैटरी, चार्जर, तार, CFL।
इनमें कीमती पदार्थ (सोना, चाँदी, तांबा, प्लास्टिक) और ख़तरनाक पदार्थ (सोल्डर और पुराने मॉनिटर में सीसा, CFL में पारा, बैटरी में कैडमियम, प्लास्टिक में ब्रोमीनयुक्त अग्निरोधी) होते हैं। भारत सबसे ज़्यादा ई-कचरा बनाने वाले देशों में है।
ई-कचरे का पर्यावरण और सेहत पर प्रभाव
- मिट्टी: ढेर से ज़हरीली धातुएँ ज़मीन और फ़सलों में जाती हैं।
- पानी: बारिश इन्हें भूजल, नदियों और झीलों तक ले जाती है।
- हवा: धातु निकालने के लिए खुले में जलाने से ज़हरीला धुआँ।
- सेहत: सीसा तंत्रिका तंत्र और गुर्दों को, पारा दिमाग़ को, कैडमियम गुर्दों और हड्डियों को नुकसान पहुँचाता है। अनौपचारिक मज़दूर, अक्सर बच्चे, सबसे ज़्यादा ख़तरे में हैं।
गैजेट का सुरक्षित निपटान
- कम करें: ज़रूरत भर ही ख़रीदें, बदलने की जगह मरम्मत और अपग्रेड करें।
- दोबारा उपयोग: चालू उपकरण दान करें या बेचें, एक्सचेंज ऑफ़र लें। पहले सारा डेटा मिटाएँ (फ़ैक्टरी रीसेट)।
- रीसायकल: ख़राब सामान अधिकृत ई-कचरा रीसाइक्लर, संग्रह केंद्र या कंपनी की टेक-बैक योजना को दें। घर के कूड़ेदान में न डालें और न जलाएँ।
भारत में ई-कचरा (प्रबंधन) नियम उत्पादकों को अपने उत्पाद इकट्ठा करने और रीसायकल करने के लिए ज़िम्मेदार बनाते हैं (विस्तारित उत्पादक ज़िम्मेदारी)।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT अधिनियम)
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 इलेक्ट्रॉनिक व्यापार और साइबर अपराध पर भारत का मुख्य क़ानून है। यह:
- इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल हस्ताक्षर को क़ानूनी मान्यता देता है, जिससे ई-फ़ाइलिंग और ई-गवर्नेंस संभव है;
- साइबर अपराध और दंड तय करता है, और विवादों के लिए न्यायनिर्णायक अधिकारी और अधिकरण बनाता है।
IT (संशोधन) अधिनियम, 2008 ने अपराध जोड़े और मज़बूत किए, जैसे धारा 66 (बेईमानी से हैकिंग जैसे अपराध), 66C (पहचान चोरी, जैसे किसी का पासवर्ड इस्तेमाल करना), 66D (कंप्यूटर से रूप बदलकर धोखा), 66E (निजता का उल्लंघन), 67 (अश्लील सामग्री प्रकाशित करना), और CERT-In को साइबर घटनाओं पर कार्रवाई की भूमिका दी। पीड़ित साइबर सेल, cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत कर सकते हैं। (अब डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 भी निजी डेटा के उपयोग को नियंत्रित करता है।)
कंप्यूटिंग में लैंगिक मुद्दे
कंप्यूटर विज्ञान और कंप्यूटिंग करियर में लड़कियाँ कम आती हैं। कारण: सामाजिक रूढ़ियाँ ('कंप्यूटर लड़कों के लिए'), महिला रोल मॉडल कम, घर पर उपकरणों तक कम पहुँच, और मुख्यतः लड़कों को ध्यान में रखकर बने गेम और टूल।
उपाय: लड़कियों को बराबर प्रोत्साहन, तकनीक में सफल महिलाओं के उदाहरण, सुरक्षित और स्वागत करने वाली कक्षाएँ व क्लब, और सबके लिए बने टूल व गेम।
कंप्यूटिंग में दिव्यांगता के मुद्दे
दिव्यांग छात्रों के सामने बाधाएँ: विशेष शिक्षण साधनों की कमी, जागरूकता की कमी, और ढाँचे की कमी (रैंप, उपयुक्त लैब, सुलभ सॉफ़्टवेयर)।
सहायक तकनीक मदद करती है: दृष्टिबाधित के लिए स्क्रीन रीडर और मैग्नीफ़ायर, ब्रेल कीबोर्ड और डिस्प्ले, वॉइस/स्पीच-टू-टेक्स्ट इनपुट, ऑन-स्क्रीन कीबोर्ड, और श्रवणबाधित के लिए कैप्शन। वेबसाइट और ऐप सुलभता दिशानिर्देश मानें ताकि सब उपयोग कर सकें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ई-कचरा = फेंके इलेक्ट्रॉनिक्स; कीमती + ज़हरीले (सीसा, पारा, कैडमियम)
- सुरक्षित निपटान: कम करें → दोबारा उपयोग → रीसायकल (अधिकृत); पहले डेटा मिटाएँ
- IT अधिनियम 2000: ई-रिकॉर्ड + डिजिटल हस्ताक्षर मान्य; साइबर अपराध
- IT (संशोधन) अधिनियम 2008: धारा 66, 66C, 66D, 66E, 67; CERT-In
- समावेशन: लैंगिक समानता + सहायक तकनीक
हल किए गए उदाहरण
1. ई-कचरे के तीन ज़हरीले पदार्थ और हर एक का एक नुकसान बताइए।
सीसा: तंत्रिका और गुर्दों को नुकसान। पारा: दिमाग़ को नुकसान। कैडमियम: गुर्दे और हड्डियों को नुकसान।
2. रिया का पुराना फ़ोन अभी चलता है। निपटान के सही चरण बताइए।
डेटा का बैकअप लेकर मिटाएँ (फ़ैक्टरी रीसेट), SIM और मेमोरी कार्ड निकालें, फिर दोबारा उपयोग (दान या बिक्री/एक्सचेंज)। काम का न हो तो अधिकृत ई-कचरा संग्राहक को दें।
3. कोई सहपाठी का चुराया पासवर्ड डालकर उसके अकाउंट से संदेश डालता है। कौन-सी धारा लगेगी?
पहचान चोरी: धारा 66C (और दूसरों को धोखा देने पर 66D)।
4. दृष्टिबाधित छात्रों को कंप्यूटिंग सिखाने के दो उपाय।
स्क्रीन रीडर और मैग्नीफ़ायर लगाएँ, ब्रेल कीबोर्ड/डिस्प्ले दें, और सुलभ, अच्छी तरह लेबल किए सॉफ़्टवेयर व वेबसाइट लें।
5. कंप्यूटिंग में लैंगिक अंतर के दो कारण और एक उपाय।
रूढ़ियाँ और महिला रोल मॉडल कम (उपकरण तक कम पहुँच भी)। उपाय: बराबर प्रोत्साहन, लड़कियों के कोडिंग क्लब, और तकनीक में महिलाओं के उदाहरण।
आम गलतियाँ
- बैटरी या CFL कूड़ेदान में डालना। इन्हें ई-कचरा संग्रह में देना चाहिए।
- डेटा मिटाए बिना फ़ोन दे देना। आपकी फ़ोटो और अकाउंट का दुरुपयोग हो सकता है।
- सोचना कि IT अधिनियम केवल हैकिंग पर है। यह ई-रिकॉर्ड और डिजिटल हस्ताक्षर को भी मान्य बनाता है।
- सोचना कि सुलभता कुछ ही लोगों के काम की है। कैप्शन और वॉइस इनपुट सबकी मदद करते हैं।