South 고등학교 3학년 Art
अध्याय: 3
1. Experience
Knowing my inner world · Visual culture shaping life · Art and social issues · Art in careers
- सौंदर्य बोध (Aesthetic Perception) – सौंदर्य बोध का मतलब है सभी इंद्रियों से दुनिया के रंग, आकार, रेखा और बनावट को ध्यान से देखना, यह महसूस करना कि वह हम पर क्या असर डालती है, और फिर अपनी प्रतिक्रिया दिखाना। कोई एक सही एहसास नहीं होता। धीरे और ध्यान से देखना ऐसा हुनर है जो अभ्यास से बढ़ता है।
- दृश्य साक्षरता: चित्रों को चरण-दर-चरण पढ़ना – दृश्य साक्षरता का मतलब है चित्रों को उतने ही ध्यान से पढ़ना जितना शब्दों को। चार चरण: देखो, वर्णन करो, विश्लेषण करो, अर्थ निकालो। जो दिखता है उसका वर्णन करो (लोग, चीज़ें, तीन परतें: अग्रभूमि, मध्य भूमि, पृष्ठभूमि)। औपचारिक तत्वों का विश्लेषण करो: रंग, रोशनी, रेखा, आकार, फ़्रेम और रचना (तिहाई का नियम, मार्गदर्शक रेखाएँ, देखने का कोण)। फिर अर्थ निकालो: क्या भाव या संदेश है, किसने किसके लिए बनाया? याद रखो, फ़्रेम कुछ चीज़ें छिपा देता है, और पास लिखे शब्द चित्र का अर्थ बदल देते हैं।
- कला और समाज: कला हमारी दुनिया को कैसे गढ़ती है – कला सिर्फ़ दीवार पर टाँगने की चीज़ नहीं है। यह भावनाओं की भाषा है, जिससे लोग वह कहते हैं जो शब्दों में नहीं कहा जाता। कला निजी हो सकती है, यानी एक व्यक्ति का नज़रिया, या सामूहिक, यानी समूह द्वारा और समूह के लिए, जो भित्तिचित्रों, लोक कला, गीतों और त्योहारों के ज़रिए समुदाय की याद और पहचान लेकर चलती है। कला समस्याओं की ओर इशारा करके बदलाव ला सकती है, इसीलिए उस पर अक्सर रोक (सेंसरशिप) लगी है; अभिव्यक्ति की आज़ादी और उसकी सीमाओं पर आज भी बहस होती है। कला यह भी दिखाती है कि ताकत किसके पास है: कला कौन बनाता है, किसे दिखाया जाता है, और रूढ़ छवियाँ दोहराई जाती हैं या तोड़ी जाती हैं। आखिर में, कला हर क्षेत्र से जुड़ी है: विज्ञान, तकनीक, संगीत, नृत्य और शहर नियोजन तक। किसी कृति को समझने के लिए पूछो: किसने बनाई, किसके लिए, क्यों, और उसने क्या बदला?
- करियर प्लानिंग: ख़ुद को जानने से पहली नौकरी तक – करियर प्लानिंग के पाँच कदम हैं। 1) ख़ुद को जानो: रुचियाँ, कौशल और मूल्य। 2) करियर परिवार खोजो और जानो कि काम क्या है, कौन-सी पढ़ाई चाहिए, वेतन और माँग कितनी है। 3) SMART लक्ष्य और प्लान B के साथ रास्ता बनाओ। 4) CV, आवेदन पत्र, डिजिटल पोर्टफ़ोलियो और इंटरव्यू अभ्यास से नौकरी खोजो। 5) स्कूल से काम की ओर बढ़ो और सीखते रहो, क्योंकि ज़िंदगी भर करियर बदलता है।
2. Expression
Idea generation · Elements and principles · Combining media · Matching theme and method · Reflecting on work
- रचनात्मक सोच: बहुत सारे विचार बनाना और सबसे अच्छा चुनना – रचनात्मक सोच ऐसे विचार बनाना है जो नए भी हों और काम के भी। यह एक हुनर है जिसे कोई भी बढ़ा सकता है। इसकी दो चालें हैं: अपसारी (divergent) सोच, यानी फैलकर बहुत सारे विचार; और अभिसारी (convergent) सोच, यानी सिमटकर सबसे अच्छा विचार चुनना। औज़ार मदद करते हैं: ब्रेनस्टॉर्मिंग (बहुत विचार, कोई आलोचना नहीं), जोड़ (association: अलग-अलग चीज़ें मिलाना), SCAMPER (बदलो, जोड़ो, अपनाओ, रूप बदलो, नया उपयोग, हटाओ, उलटो) और उलटी सोच (समस्या को उलटो, फिर जवाबों को उलटो)। रचनात्मक लोग सोच-समझकर जोखिम लेते हैं, ग़लती से सीखते हैं और कोशिश जारी रखते हैं। कला, विज्ञान, इंजीनियरिंग, व्यापार और रोज़ की ज़िंदगी में रचनात्मकता काम आती है।
- कला के तत्व और डिज़ाइन के सिद्धांत – कला के तत्व वे ईंटें हैं जिनसे हर कलाकृति बनती है: रेखा, आकार, रूप, रंग, मान (हल्का-गहरा), बनावट और स्थान; कई शिक्षक बिंदु को भी जोड़ते हैं। डिज़ाइन के सिद्धांत बताते हैं कि इन ईंटों को कैसे जमाएँ: संतुलन, विरोधाभास (कंट्रास्ट), बल (एम्फ़ेसिस), गति, लय और पैटर्न, अनुपात और पैमाना, एकता और विविधता।
- कला शिक्षा: कला के रूप, सृजन और कला प्रोजेक्ट – स्कूल की कला शिक्षा में कई क्षेत्र हैं: दृश्य कला, संगीत, नृत्य, रंगमंच, सिनेमा और दृश्य-श्रव्य कला, सर्कस कला और कला इतिहास। हर क्षेत्र में तीन काम होते हैं: अभ्यास और सृजन (बनाना), पेशेवर कलाकारों की कला देखना-सुनना (मिलना), और उस पर सोचना-बोलना (चिंतन)। कला प्रोजेक्ट एक चक्र है: विचार, खोज, प्रयोग, निर्माण, प्रस्तुति और चिंतन, और हर चरण पोर्टफोलियो में दर्ज होता है। कला के रूप अक्सर मिलते हैं: संगीत के साथ नृत्य, फ़िल्म के साथ रंगमंच। संग्रहालय, संगीत-सभा या नाटक देखना और कलाकारों से बात करना आपकी समझ और रुचि बनाता है।
3. Appreciation
Art in context · Styles by era and region · Criticism viewpoints · Stating a view
- कला का इतिहास: गुफा की दीवारों से आज तक – मनुष्य कम से कम 40,000 साल से कला बना रहा है। प्रागैतिहासिक कला में गुफा की दीवारों पर जानवर और हाथ की छाप हैं। प्राचीन सभ्यताओं ने शासकों, देवताओं और परलोक के लिए कला बनाई। शास्त्रीय परंपराएँ यूनान-रोम, भारत, चीन, अफ़्रीका और अमेरिका में पनपीं। पुनर्जागरण ने परिप्रेक्ष्य और यथार्थ दिया; आधुनिक कला (लगभग 1860 से) ने ये नियम तोड़े; समकालीन कला कोई भी सामग्री अपनाती है। किसी कलाकृति को समझने के लिए वर्णन, विश्लेषण, संदर्भ में व्याख्या और कारण सहित निर्णय करें।
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।