Italy Secondaria di secondo grado – classe 4ª Arti figurative: painting and sculpture disciplines + workshop
अध्याय: 2
1. Painting and sculpture disciplines
Painting design · Sculpture design
- कला सामग्री और तकनीकें: सही माध्यम कैसे चुनें – कलाकार वह सामग्री (माध्यम) चुनते हैं जिससे मनचाहा असर मिले। हर रंग (पेंट) में पिगमेंट यानी रंगीन चूर्ण और बाइंडर यानी चिपकाने वाला द्रव होता है: तैल रंग में अलसी का तेल, जल रंग में गोंद (गम अरेबिक), एक्रेलिक में एक्रेलिक राल, टेम्परा में अंडा। सूखे माध्यम हैं ग्रेफ़ाइट पेंसिल (H = सख़्त और हल्की, B = नरम और गहरी), चारकोल, पेस्टल और रंगीन पेंसिल। गीले माध्यम हैं स्याही, जल रंग, गुआश, एक्रेलिक और तैल रंग। पारदर्शी माध्यम में नीचे की परत दिखती है, अपारदर्शी उसे ढक देता है। सपोर्ट वह सतह है जिस पर काम होता है: कागज़, कैनवास, लकड़ी, दीवार। त्रि-आयामी काम में मिट्टी से गढ़ना, तराशना, जोड़ना और ढलाई आते हैं; छापा कला में एक ब्लॉक या स्क्रीन से कई प्रतियाँ बनती हैं। डिजिटल माध्यम में टैबलेट, फ़ोटो और वीडियो हैं। अच्छे कलाकार सामग्री को परखते हैं, प्रयोग से काम निखारते हैं और उसे सुरक्षित व टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल करते हैं।
- मूर्तिकला की तकनीकें – मूर्तिकला तीन आयामों की कला है। यह उभार (पृष्ठभूमि से जुड़ी: निम्न या उच्च) या पूर्ण मूर्ति (अलग खड़ी, हर तरफ़ से दिखे) हो सकती है। बनाने के चार मुख्य तरीके: तराशना (पत्थर या लकड़ी से सामग्री हटाना), गढ़ना (मिट्टी या मोम जोड़ना, अक्सर आर्मेचर पर), ढलाई (साँचे में पिघला कांसा जैसा द्रव डालना) और निर्माण (हिस्से जोड़ना)। मूर्तिकार रेखाचित्र और मैकेट से योजना बनाते हैं, यथार्थवादी से अमूर्त तक यथार्थ का स्तर चुनते हैं, और मुद्रा, दिशा या असली गति से हलचल दिखाते हैं।
2. Figuration workshop
Painting workshop · Sculpture workshop
- कला सामग्री और तकनीकें: सही माध्यम कैसे चुनें – कलाकार वह सामग्री (माध्यम) चुनते हैं जिससे मनचाहा असर मिले। हर रंग (पेंट) में पिगमेंट यानी रंगीन चूर्ण और बाइंडर यानी चिपकाने वाला द्रव होता है: तैल रंग में अलसी का तेल, जल रंग में गोंद (गम अरेबिक), एक्रेलिक में एक्रेलिक राल, टेम्परा में अंडा। सूखे माध्यम हैं ग्रेफ़ाइट पेंसिल (H = सख़्त और हल्की, B = नरम और गहरी), चारकोल, पेस्टल और रंगीन पेंसिल। गीले माध्यम हैं स्याही, जल रंग, गुआश, एक्रेलिक और तैल रंग। पारदर्शी माध्यम में नीचे की परत दिखती है, अपारदर्शी उसे ढक देता है। सपोर्ट वह सतह है जिस पर काम होता है: कागज़, कैनवास, लकड़ी, दीवार। त्रि-आयामी काम में मिट्टी से गढ़ना, तराशना, जोड़ना और ढलाई आते हैं; छापा कला में एक ब्लॉक या स्क्रीन से कई प्रतियाँ बनती हैं। डिजिटल माध्यम में टैबलेट, फ़ोटो और वीडियो हैं। अच्छे कलाकार सामग्री को परखते हैं, प्रयोग से काम निखारते हैं और उसे सुरक्षित व टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल करते हैं।
- मूर्तिकला की तकनीकें – मूर्तिकला तीन आयामों की कला है। यह उभार (पृष्ठभूमि से जुड़ी: निम्न या उच्च) या पूर्ण मूर्ति (अलग खड़ी, हर तरफ़ से दिखे) हो सकती है। बनाने के चार मुख्य तरीके: तराशना (पत्थर या लकड़ी से सामग्री हटाना), गढ़ना (मिट्टी या मोम जोड़ना, अक्सर आर्मेचर पर), ढलाई (साँचे में पिघला कांसा जैसा द्रव डालना) और निर्माण (हिस्से जोड़ना)। मूर्तिकार रेखाचित्र और मैकेट से योजना बनाते हैं, यथार्थवादी से अमूर्त तक यथार्थ का स्तर चुनते हैं, और मुद्रा, दिशा या असली गति से हलचल दिखाते हैं।