Germany Jahrgangsstufe 12 Ethics
अध्याय: 2
1. Action theory and moral judgement in applied ethics
Theory of action and virtue ethics · Moral judgement in applied ethics
- सद्गुण नीतिशास्त्र: अच्छा इंसान कैसे बनें – सद्गुण नीतिशास्त्र पूछता है "मुझे कैसा इंसान बनना चाहिए?", सिर्फ़ "कौन-सा नियम मानूँ?" नहीं। हर कर्म में इरादा, साधन, कर्म और परिणाम होते हैं। सुकरात ने सिखाया कि सद्गुण ज्ञान है। प्लेटो ने आत्मा के तीन हिस्सों (बुद्धि, उत्साह, इच्छा) को चार मूल सद्गुणों से जोड़ा: प्रज्ञा, साहस, संयम और न्याय। अरस्तू ने कहा कि हर लक्ष्य अंत में यूडेमोनिया (अच्छा जीवन) की ओर जाता है, और हर नैतिक सद्गुण दो दोषों के बीच का स्वर्णिम मध्य है, जो आदत से बनता है और व्यावहारिक बुद्धि से पहचाना जाता है।
- व्यावहारिक नैतिकता: नैतिक विचारों को असली समस्याओं पर लगाना – व्यावहारिक (अनुप्रयुक्त) नैतिकता बड़े नैतिक विचारों को असली मामलों पर लगाती है: दोस्ती में ईमानदारी, तकनीक में निजता और AI, चिकित्सा में जीन संपादन, जंतुओं और प्रकृति के साथ व्यवहार, और संपत्ति व काम में न्याय। तीन लेंस मदद करते हैं: परिणाम (क्या होगा?), कर्तव्य (कौन से नियम और अधिकार?), और चरित्र (अच्छा इंसान क्या करता?)। एक साफ़ विधि राय को तर्क वाले फ़ैसले में बदलती है: तथ्य जानिए, हितधारक गिनिए, विकल्प खोजिए, सिद्धांतों पर परखिए, फिर फ़ैसला करके कारण बताइए।
2. Epistemology, freedom and determinism
Epistemology, free will and determinism
- स्वतंत्र इच्छा, नियतिवाद और स्वतंत्रता – स्वतंत्र इच्छा यानी अपने काम ख़ुद चुनने की ताक़त। नियतिवाद कहता है कि हर घटना, हर चुनाव भी, पिछले कारणों से तय है। कठोर नियतिवादी कहते हैं स्वतंत्र इच्छा भ्रम है; स्वेच्छावादी कहते हैं कुछ चुनाव तय नहीं; संगततावादी कहते हैं चुनाव तब स्वतंत्र है जब वह आपके अपने कारणों से हो और कोई ज़बरदस्ती न करे। अरस्तू ने स्वैच्छिक और ज़बरन कर्म अलग किए और इच्छाशक्ति की कमज़ोरी पहचानी। कांट ने स्वतंत्रता को स्वायत्तता से जोड़ा: ख़ुद को दिया तर्कसंगत नियम मानना। समाज में स्वतंत्रता के लिए क़ानून चाहिए ताकि हर एक की आज़ादी बाक़ी सबके साथ निभ सके।