France Première Humanities, Literature and Philosophy
अध्याय: 2
1. Semester 1: the powers of speech
The art of speech (rhetoric) · The authority of speech · The seductions of speech
- वाक्पटुता (Rhetoric): मनाने वाले भाषण की कला – वाक्पटुता यानी शब्दों से लोगों को मनाने की कला। हर भाषण में वक्ता, श्रोता, संदेश और मौक़ा होता है। वक्ता तीन तरीक़ों से मनाता है: ईथॉस (वक्ता पर भरोसा), लोगोस (तर्क और सबूत) और पैथॉस (भावना)। भाषण पाँच चरणों में बनता है — खोज, क्रम, शैली, याद और प्रस्तुति — और अलंकार उसे यादगार बनाते हैं। शब्दों में ताक़त है: वे जोड़ भी सकते हैं और बहका भी सकते हैं, इसलिए अच्छा श्रोता सबूत जाँचता है।
2. Semester 2: representations of the world
Discovering the world and cultural plurality · Describing, depicting, imagining · Humans and animals
- सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ – भारत में अनेक भाषाएँ, धर्म, क्षेत्र और जनजातियाँ हैं। विविधता का अर्थ है अंतर, ऊँच-नीच नहीं। समुदाय लोगों को अपनापन देते हैं, पर जब वे टकराते हैं तो राष्ट्र-राज्य को तय करना होता है कि उनसे कैसे बरते। भारत ने भाषाई राज्यों, संघवाद, अल्पसंख्यक अधिकारों और अपनी तरह की धर्मनिरपेक्षता से विविधता को स्वीकारा। इस पाठ में सामुदायिक पहचान, क्षेत्रवाद, धर्म, सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता और नागरिक समाज आसान भाषा में समझेंगे।
- प्रकृति का दर्शन: प्रकृति, संस्कृति और मानव स्वभाव – दार्शनिक "प्रकृति" शब्द तीन तरह से इस्तेमाल करते हैं: जो अपने आप उगता है, किसी चीज़ का मूल स्वभाव (मानव स्वभाव), और नकल करने का आदर्श। संस्कृति वह है जो इंसान जोड़ता है: भाषा, औज़ार, नियम। विचारक यह भी पूछते हैं कि इंसान पशुओं से कैसे अलग है और हम प्रकृति के प्रति क्या ऋणी हैं।