CBSE कक्षा 10 कृषि (408)
अध्याय: 7
1. भाग क: रोज़गार कौशल – II
संचार कौशल-II · स्व-प्रबंधन कौशल-II · सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी कौशल-II · उद्यमशीलता कौशल-II · हरित कौशल-II
- संचार कौशल: अपनी बात साफ़ और प्यार से कैसे पहुँचाएँ – संचार यानी लोगों के बीच अर्थ बाँटना। प्रेषक (भेजने वाला) विचार को संदेश में बदलता है, उसे माध्यम से भेजता है, और प्राप्तकर्ता उसे समझकर प्रतिपुष्टि (फ़ीडबैक) देता है। शोर, कठिन शब्द, तेज़ भावनाएँ और सांस्कृतिक अंतर जैसी बाधाएँ संदेश को रोक या मोड़ सकती हैं। हम अर्थ शब्दों से (शाब्दिक), चेहरे, आँखों, हाव-भाव, मुद्रा और आवाज़ के लहजे से (अशाब्दिक), और चित्रों से (दृश्य) भेजते हैं। सक्रिय श्रवण — ध्यान, धैर्य, सवाल और अपने शब्दों में दोहराना — साबित करता है कि संदेश पहुँचा। अच्छा वक्ता संदर्भ के हिसाब से बदलता है: औपचारिक या अनौपचारिक, बोलकर या लिखकर, और विनम्र अनुरोध, सलीके से मना करना, सच्ची माफ़ी और दृढ़ (न दब्बू, न आक्रामक) भाषा अपनाता है।
- आत्म-प्रबंधन: अपनी भावनाओं, लक्ष्यों और समय की कमान अपने हाथ में – आत्म-प्रबंधन (self-management) यानी अपनी भावनाओं, विचारों और कामों को ख़ुद दिशा देना ताकि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचें। इसकी शुरुआत आत्म-जागरूकता से होती है: आप क्या महसूस कर रहे हैं और कितना तेज़। फिर प्रतिक्रिया से पहले ठहराव (रुको, सोचो, करो) और धीमी साँस जैसे उपाय। विचार भावनाओं को और भावनाएँ कामों को बनाती हैं, इसलिए 'मैं बेकार हूँ' को 'मैं अभी नहीं कर पाता' में बदलने से काम बदल जाता है। अच्छे आत्म-प्रबंधक SMART लक्ष्य बनाते हैं, ज़रूरी-महत्वपूर्ण देखकर समय बाँटते हैं, अच्छी आदतें बनाते हैं और असफलता के बाद फिर खड़े होते हैं (लचीलापन)।
- ICT की बुनियादी बातें: कंप्यूटर, क्लाउड और लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म का सुरक्षित उपयोग – ICT यानी सूचना और संचार प्रौद्योगिकी: वे उपकरण, सॉफ़्टवेयर और नेटवर्क जिनसे हम जानकारी बनाते, रखते और बाँटते हैं। हर कंप्यूटर इनपुट लेता है, प्रोसेस करता है, आउटपुट देता है और डेटा भंडारण में रखता है। भंडारण बाइट में मापा जाता है, और हर बड़ी इकाई (KB, MB, GB, TB) पिछली से लगभग 1000 गुना होती है। अच्छे डिजिटल विद्यार्थी फ़ाइलें साफ़ नाम वाले फ़ोल्डरों में रखते हैं, लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म पर काम लेते-जमा करते हैं, 3-2-1 नियम से बैकअप लेते हैं और लंबे पासफ़्रेज़ व दो-चरण लॉगिन से खाते बचाते हैं। ICT से वीडियो, वेबसाइट और पॉडकास्ट जैसे रचनात्मक प्रोजेक्ट भी बनते हैं।
2. भाग ख: कृषि उत्पादन और प्रबंधन
कृषि उत्पादन और प्रबंधन
- कृषि – कृषि यानी फ़सलें उगाना और पशु पालना। भारत में छोटे पारिवारिक खेतों से लेकर बड़े वाणिज्यिक खेत और बाग़ान तक हैं। फ़सलें तीन ऋतुओं में उगती हैं: ख़रीफ़, रबी और ज़ायद। हर मुख्य फ़सल को अपनी बारिश, तापमान और मिट्टी चाहिए। सरकार ने किसानों की मदद के लिए सुधार किए हैं।
3. भाग ख: बागवानी फसलों का उत्पादन
बागवानी फसलों का उत्पादन
- कृषि – कृषि यानी फ़सलें उगाना और पशु पालना। भारत में छोटे पारिवारिक खेतों से लेकर बड़े वाणिज्यिक खेत और बाग़ान तक हैं। फ़सलें तीन ऋतुओं में उगती हैं: ख़रीफ़, रबी और ज़ायद। हर मुख्य फ़सल को अपनी बारिश, तापमान और मिट्टी चाहिए। सरकार ने किसानों की मदद के लिए सुधार किए हैं।
4. भाग ख: पशुपालन और डेयरी
पशुपालन और डेयरी
- कृषि – कृषि यानी फ़सलें उगाना और पशु पालना। भारत में छोटे पारिवारिक खेतों से लेकर बड़े वाणिज्यिक खेत और बाग़ान तक हैं। फ़सलें तीन ऋतुओं में उगती हैं: ख़रीफ़, रबी और ज़ायद। हर मुख्य फ़सल को अपनी बारिश, तापमान और मिट्टी चाहिए। सरकार ने किसानों की मदद के लिए सुधार किए हैं।
5. भाग ख: उत्पादोत्तर प्रबंधन
उत्पादोत्तर प्रबंधन
- कृषि – कृषि यानी फ़सलें उगाना और पशु पालना। भारत में छोटे पारिवारिक खेतों से लेकर बड़े वाणिज्यिक खेत और बाग़ान तक हैं। फ़सलें तीन ऋतुओं में उगती हैं: ख़रीफ़, रबी और ज़ायद। हर मुख्य फ़सल को अपनी बारिश, तापमान और मिट्टी चाहिए। सरकार ने किसानों की मदद के लिए सुधार किए हैं।
6. भाग ख: बीज उत्पादन और नर्सरी
बीज उत्पादन और नर्सरी
- कृषि – कृषि यानी फ़सलें उगाना और पशु पालना। भारत में छोटे पारिवारिक खेतों से लेकर बड़े वाणिज्यिक खेत और बाग़ान तक हैं। फ़सलें तीन ऋतुओं में उगती हैं: ख़रीफ़, रबी और ज़ायद। हर मुख्य फ़सल को अपनी बारिश, तापमान और मिट्टी चाहिए। सरकार ने किसानों की मदद के लिए सुधार किए हैं।
7. भाग ख: उद्यमशीलता विकास
उद्यमशीलता विकास
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