Ontario Grade 12 BBB4E International Business Essentials (Grade 12, Workplace Preparation)
अध्याय: 4
1. Working in International Markets
1 Ethical Issues · 2 Working Conditions in International Markets · 3 Border Issues
- नीतिशास्त्र: कैसे तय करें कि क्या सही है – नीतिशास्त्र (नैतिक दर्शन) पूछता है कि हमें क्या करना चाहिए और क्यों। ईमानदारी, दया, न्याय और सम्मान जैसे मूल्य चुनाव में राह दिखाते हैं। तीन मुख्य सिद्धांत: परिणाम (उपयोगितावाद, बेंथम और मिल: ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का ज़्यादा भला), कर्तव्य (कांट: ऐसा नियम अपनाओ जो सब अपना सकें; लोगों को साध्य मानो, सिर्फ़ साधन नहीं) और सद्गुण (अरस्तू: अच्छा चरित्र बनाओ; सद्गुण दो अतियों का मध्य है)। अंतरात्मा सही-ग़लत की भीतरी समझ है। स्वतंत्रता ज़िम्मेदारी लाती है। अधिनीतिशास्त्र पूछता है "अच्छा" का अर्थ क्या है और मूल्य सार्वभौमिक हैं या सापेक्ष। व्यावहारिक नीतिशास्त्र पर्यावरण, पशु, काम, मित्रता और शांति पर लागू होता है।
- माँग, पूर्ति और बाज़ार संतुलन – माँग का नियम कहता है कि कीमत बढ़ने पर खरीदार कम चाहते हैं; पूर्ति का नियम कहता है कि विक्रेता ज़्यादा लाते हैं। बाज़ार कीमत संतुलन पर टिकती है, जहाँ माँगी गई मात्रा = पूर्ति की गई मात्रा, और माँग या पूर्ति के खिसकने से यह बदलती है। कुछ वस्तुएँ सामान्य नियम तोड़ती हैं (गिफ़ेन, वेब्लेन, घबराहट में खरीद)। संतुलन से नीचे तय अधिकतम कीमत कमी पैदा करती है। बाज़ार विफल भी हो सकता है, जैसे प्रदूषण या स्ट्रीट लाइट जैसी सार्वजनिक वस्तुओं में, तब सरकार आगे आती है।
- अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय – अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय वह हर व्यावसायिक काम है जो देश की सीमा पार करता है: वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, लाइसेंसिंग, फ़्रैंचाइज़िंग, संयुक्त उद्यम और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)। कंपनियाँ नए ग्राहक, सस्ता कच्चा माल और विकास पाने विदेश जाती हैं, पर जोखिम भी झेलती हैं: विनिमय दर में बदलाव, व्यापार बाधाएँ (टैरिफ़, कोटा, प्रतिबंध), सीमा-शुल्क के नियम, राजनीतिक-आर्थिक जोखिम और संस्कृति का फ़र्क़, जिसकी वजह से उत्पाद और बातचीत बदलनी पड़ सकती है। व्यापार समझौते और संगठन बाधाएँ घटाते हैं और देशों को एक-दूसरे पर निर्भर बनाते हैं; तकनीक और ई-कॉमर्स से छोटी कंपनियाँ भी दुनिया भर में बेच पाती हैं।
2. Canada in the Global Marketplace
1 The Importance of International Business · 2 Reasons for Involvement in International Business · 3 Changes in Canada's International Business Activity · 4 The Effects of International Business on Canada
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार – देशों की सीमाओं के पार वस्तुओं और सेवाओं का ख़रीदना-बेचना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार है। बाहर बेचना निर्यात और बाहर से ख़रीदना आयात है। इससे देश को विदेशी मुद्रा, विकास और रोज़गार मिलते हैं, और कंपनियों को लाभ और नए बाज़ार। निर्यात और आयात तय चरणों से होते हैं और इनमें साख पत्र, बिल ऑफ़ लेडिंग जैसे कई प्रलेख लगते हैं। WTO (1995) व्यापार के नियम बनाता है और बाधाएँ घटाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: आधार, संतुलन, WTO और पत्तन – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देशों के बीच सामान और सेवाओं का आदान-प्रदान है। यह वस्तु-विनिमय से शुरू हुआ, रेशम मार्ग जैसे रास्तों पर बढ़ा, क्रूर दास व्यापार और औपनिवेशिक व्यापार से गुज़रा, और उद्योगों के साथ फैला। देश इसलिए व्यापार करते हैं क्योंकि वे संसाधन, जनसंख्या, विकास, विदेशी निवेश और परिवहन में अलग हैं। व्यापार संतुलन निर्यात और आयात की तुलना है। व्यापार द्विपक्षीय या बहुपक्षीय हो सकता है; मुक्त व्यापार रुकावटें घटाता है, जबकि राशिपातन विदेश में लागत से कम पर माल बेचता है। WTO विश्व नियम बनाता है, प्रादेशिक समूह पड़ोसियों को जोड़ते हैं, और कई तरह के पत्तन व्यापार के द्वार हैं।
- अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय – अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय वह हर व्यावसायिक काम है जो देश की सीमा पार करता है: वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, लाइसेंसिंग, फ़्रैंचाइज़िंग, संयुक्त उद्यम और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)। कंपनियाँ नए ग्राहक, सस्ता कच्चा माल और विकास पाने विदेश जाती हैं, पर जोखिम भी झेलती हैं: विनिमय दर में बदलाव, व्यापार बाधाएँ (टैरिफ़, कोटा, प्रतिबंध), सीमा-शुल्क के नियम, राजनीतिक-आर्थिक जोखिम और संस्कृति का फ़र्क़, जिसकी वजह से उत्पाद और बातचीत बदलनी पड़ सकती है। व्यापार समझौते और संगठन बाधाएँ घटाते हैं और देशों को एक-दूसरे पर निर्भर बनाते हैं; तकनीक और ई-कॉमर्स से छोटी कंपनियाँ भी दुनिया भर में बेच पाती हैं।
3. International Markets
1 Business Opportunities · 2 Operational Challenges · 3 Import and Export Considerations
- माँग, पूर्ति और बाज़ार संतुलन – माँग का नियम कहता है कि कीमत बढ़ने पर खरीदार कम चाहते हैं; पूर्ति का नियम कहता है कि विक्रेता ज़्यादा लाते हैं। बाज़ार कीमत संतुलन पर टिकती है, जहाँ माँगी गई मात्रा = पूर्ति की गई मात्रा, और माँग या पूर्ति के खिसकने से यह बदलती है। कुछ वस्तुएँ सामान्य नियम तोड़ती हैं (गिफ़ेन, वेब्लेन, घबराहट में खरीद)। संतुलन से नीचे तय अधिकतम कीमत कमी पैदा करती है। बाज़ार विफल भी हो सकता है, जैसे प्रदूषण या स्ट्रीट लाइट जैसी सार्वजनिक वस्तुओं में, तब सरकार आगे आती है।
- अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय – अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय वह हर व्यावसायिक काम है जो देश की सीमा पार करता है: वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, लाइसेंसिंग, फ़्रैंचाइज़िंग, संयुक्त उद्यम और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)। कंपनियाँ नए ग्राहक, सस्ता कच्चा माल और विकास पाने विदेश जाती हैं, पर जोखिम भी झेलती हैं: विनिमय दर में बदलाव, व्यापार बाधाएँ (टैरिफ़, कोटा, प्रतिबंध), सीमा-शुल्क के नियम, राजनीतिक-आर्थिक जोखिम और संस्कृति का फ़र्क़, जिसकी वजह से उत्पाद और बातचीत बदलनी पड़ सकती है। व्यापार समझौते और संगठन बाधाएँ घटाते हैं और देशों को एक-दूसरे पर निर्भर बनाते हैं; तकनीक और ई-कॉमर्स से छोटी कंपनियाँ भी दुनिया भर में बेच पाती हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार – देशों की सीमाओं के पार वस्तुओं और सेवाओं का ख़रीदना-बेचना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार है। बाहर बेचना निर्यात और बाहर से ख़रीदना आयात है। इससे देश को विदेशी मुद्रा, विकास और रोज़गार मिलते हैं, और कंपनियों को लाभ और नए बाज़ार। निर्यात और आयात तय चरणों से होते हैं और इनमें साख पत्र, बिल ऑफ़ लेडिंग जैसे कई प्रलेख लगते हैं। WTO (1995) व्यापार के नियम बनाता है और बाधाएँ घटाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार: आधार, संतुलन, WTO और पत्तन – अंतर्राष्ट्रीय व्यापार देशों के बीच सामान और सेवाओं का आदान-प्रदान है। यह वस्तु-विनिमय से शुरू हुआ, रेशम मार्ग जैसे रास्तों पर बढ़ा, क्रूर दास व्यापार और औपनिवेशिक व्यापार से गुज़रा, और उद्योगों के साथ फैला। देश इसलिए व्यापार करते हैं क्योंकि वे संसाधन, जनसंख्या, विकास, विदेशी निवेश और परिवहन में अलग हैं। व्यापार संतुलन निर्यात और आयात की तुलना है। व्यापार द्विपक्षीय या बहुपक्षीय हो सकता है; मुक्त व्यापार रुकावटें घटाता है, जबकि राशिपातन विदेश में लागत से कम पर माल बेचता है। WTO विश्व नियम बनाता है, प्रादेशिक समूह पड़ोसियों को जोड़ते हैं, और कई तरह के पत्तन व्यापार के द्वार हैं।
4. Conducting International Business
1 Ethical Issues · 2 Culture and Customs · 3 International Marketing · 4 Effects of Technology
- नीतिशास्त्र: कैसे तय करें कि क्या सही है – नीतिशास्त्र (नैतिक दर्शन) पूछता है कि हमें क्या करना चाहिए और क्यों। ईमानदारी, दया, न्याय और सम्मान जैसे मूल्य चुनाव में राह दिखाते हैं। तीन मुख्य सिद्धांत: परिणाम (उपयोगितावाद, बेंथम और मिल: ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का ज़्यादा भला), कर्तव्य (कांट: ऐसा नियम अपनाओ जो सब अपना सकें; लोगों को साध्य मानो, सिर्फ़ साधन नहीं) और सद्गुण (अरस्तू: अच्छा चरित्र बनाओ; सद्गुण दो अतियों का मध्य है)। अंतरात्मा सही-ग़लत की भीतरी समझ है। स्वतंत्रता ज़िम्मेदारी लाती है। अधिनीतिशास्त्र पूछता है "अच्छा" का अर्थ क्या है और मूल्य सार्वभौमिक हैं या सापेक्ष। व्यावहारिक नीतिशास्त्र पर्यावरण, पशु, काम, मित्रता और शांति पर लागू होता है।
- मानवशास्त्र और संस्कृति – मानवशास्त्र (anthropology) इंसान का पूरा अध्ययन है: हमारा शरीर, हमारा अतीत, हमारी भाषाएँ और जीने का ढंग। संस्कृति किसी समूह का सीखा हुआ और साझा जीवन-ढंग है: लोग क्या बनाते, करते, बोलते और मानते हैं। संस्कृति सीखी जाती है, साझा होती है, प्रतीकों से भरी होती है, आपस में जुड़ी होती है और बदलती रहती है। मानवशास्त्री लोगों के साथ रहकर (सहभागी अवलोकन) इसे समझते हैं, और हर संस्कृति को उसकी अपनी नज़र से देखने की कोशिश करते हैं (सांस्कृतिक सापेक्षवाद), अपनी संस्कृति के पैमाने से नहीं (नृजातीय-केंद्रवाद)।
- माँग, पूर्ति और बाज़ार संतुलन – माँग का नियम कहता है कि कीमत बढ़ने पर खरीदार कम चाहते हैं; पूर्ति का नियम कहता है कि विक्रेता ज़्यादा लाते हैं। बाज़ार कीमत संतुलन पर टिकती है, जहाँ माँगी गई मात्रा = पूर्ति की गई मात्रा, और माँग या पूर्ति के खिसकने से यह बदलती है। कुछ वस्तुएँ सामान्य नियम तोड़ती हैं (गिफ़ेन, वेब्लेन, घबराहट में खरीद)। संतुलन से नीचे तय अधिकतम कीमत कमी पैदा करती है। बाज़ार विफल भी हो सकता है, जैसे प्रदूषण या स्ट्रीट लाइट जैसी सार्वजनिक वस्तुओं में, तब सरकार आगे आती है।
- अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय – अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय वह हर व्यावसायिक काम है जो देश की सीमा पार करता है: वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, लाइसेंसिंग, फ़्रैंचाइज़िंग, संयुक्त उद्यम और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)। कंपनियाँ नए ग्राहक, सस्ता कच्चा माल और विकास पाने विदेश जाती हैं, पर जोखिम भी झेलती हैं: विनिमय दर में बदलाव, व्यापार बाधाएँ (टैरिफ़, कोटा, प्रतिबंध), सीमा-शुल्क के नियम, राजनीतिक-आर्थिक जोखिम और संस्कृति का फ़र्क़, जिसकी वजह से उत्पाद और बातचीत बदलनी पड़ सकती है। व्यापार समझौते और संगठन बाधाएँ घटाते हैं और देशों को एक-दूसरे पर निर्भर बनाते हैं; तकनीक और ई-कॉमर्स से छोटी कंपनियाँ भी दुनिया भर में बेच पाती हैं।