हंगुल क्यों बनी और किसने बनाई?
हंगुल से पहले कोरिया के लोग चीनी चिह्नों (Chinese characters) में लिखते थे। ये हज़ारों हैं और हर एक अलग से सीखना पड़ता है। आम किसानों और मज़दूरों के पास इतना समय नहीं होता था, इसलिए ज़्यादातर लोग पढ़-लिख नहीं पाते थे।
राजा सेजोंग (शासन 1418 से 1450) चाहते थे कि हर इंसान जो बोलता है वह लिख भी सके। विद्वानों की टोली के साथ उन्होंने 1443 में नई वर्णमाला बनाई और 1446 में हुनमिनजोंगउम नाम की किताब में उसे घोषित किया। इसका अर्थ है "जनता को सिखाने के सही स्वर"। दक्षिण कोरिया में 9 अक्टूबर को हंगुल दिवस मनाया जाता है।
सिद्धांत 1: व्यंजन मुँह की नक़ल हैं
पाँच मूल व्यंजन बोलते समय हमारे वाक्-अंगों (speech organs) की आकृति के चित्र हैं:
- ㄱ (ग/क): जीभ का पिछला भाग उठकर गले को रोकता है।
- ㄴ (न): जीभ की नोक ऊपरी दाँतों के पीछे की उभार को छूती है।
- ㅁ (म): बंद होंठ, यानी एक वर्ग।
- ㅅ (स): दाँतों की नुकीली आकृति।
- ㅇ (ङ या मौन): गोल गला।
यह बहुत अनोखा विचार है: अक्षर का आकार ही बताता है कि उसे कैसे बोलना है।
सिद्धांत 2: ज़्यादा ज़ोर के लिए एक रेखा जोड़ो
मुँह में एक ही जगह से बनने वाली ध्वनियाँ देखने में एक-सी लगती हैं। हर अतिरिक्त रेखा का मतलब है "ज़्यादा ज़ोर या ज़्यादा साँस"।
- ㄱ → ㅋ (ग → क, साँस के झोंके के साथ)
- ㄴ → ㄷ → ㅌ (न → द → त)
- ㅁ → ㅂ → ㅍ (म → ब → प)
- ㅅ → ㅈ → ㅊ (स → ज → च)
- ㅇ → ㅎ (मौन → ह)
अक्षर को दोहराने (ㄲ, ㄸ, ㅃ, ㅆ, ㅉ) से कसी हुई, तनी ध्वनि बनती है। इस तरह 24 मूल अक्षर और कुछ नियम सारी ध्वनियाँ बना देते हैं।
सिद्धांत 3: स्वर, आकाश-धरती-मनुष्य से
स्वर दुनिया को देखने के एक पुराने ढंग पर चलते हैं: गोल आकाश (बिंदु), चौड़ी धरती (आड़ी रेखा ㅡ) और खड़ा मनुष्य (खड़ी रेखा ㅣ)। आजकल बिंदु को छोटी रेखा की तरह लिखा जाता है।
- ㅣ + दाईं ओर रेखा = ㅏ (आ); बाईं ओर = ㅓ (अ/ऑ जैसा)
- ㅡ + ऊपर रेखा = ㅗ (ओ); नीचे = ㅜ (उ)
दूसरी रेखा जोड़ने पर य-वाली ध्वनियाँ बनती हैं: ㅑ ㅕ ㅛ ㅠ। कुल मिलाकर आधुनिक हंगुल में 14 मूल व्यंजन और 10 मूल स्वर हैं, यानी 24 अक्षर।
सिद्धांत 4: अक्षर खंडों (syllable blocks) में बैठते हैं
हंगुल वर्णमाला है, पर इसे वर्गाकार खंडों में लिखते हैं, हर अक्षर-ध्वनि (syllable) के लिए एक खंड। हर खंड व्यंजन से शुरू होता है और उसमें एक स्वर होता है। स्वर खड़ा हो (ㅏ ㅓ ㅣ) तो व्यंजन उसकी बाईं ओर बैठता है: 나। स्वर चौड़ा हो (ㅗ ㅜ ㅡ) तो व्यंजन ऊपर बैठता है: 고। अंतिम व्यंजन नीचे आ सकता है: 한।
जब ध्वनि स्वर से शुरू हो तो पहली जगह पर मौन ㅇ बैठता है, ताकि खंड पूरा दिखे। शब्द 한글 (हंगुल) दो खंडों का है: 한 + 글।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य विचार: आकार = बोलने का ढंग
- मूल व्यंजन: ㄱ ㄴ ㅁ ㅅ ㅇ (मुँह की आकृतियाँ)
- ज़्यादा ज़ोर = एक और रेखा (ㄱ → ㅋ)
- स्वर: बिंदु = आकाश, ㅡ = धरती, ㅣ = मनुष्य
- खंड = व्यंजन + स्वर (+ अंतिम व्यंजन)
- 24 मूल अक्षर: 14 व्यंजन + 10 स्वर
हल किए गए उदाहरण
1. ㄴ मुँह के किस भाग की नक़ल है और कौन-सी ध्वनि देता है?
यह जीभ की नोक की नक़ल है जो ऊपरी दाँतों के पीछे की उभार को छूती है। ध्वनि है न।
2. दिखाइए कि ㅁ से ㅍ कैसे बनता है और ये एक-से क्यों दिखते हैं।
ㅁ (म) + एक रेखा = ㅂ (ब); एक और रेखा = ㅍ (प)। तीनों ध्वनियाँ होंठों से बनती हैं, इसलिए आकार एक परिवार के हैं।
3. तीन मूल आकारों से स्वर ㅗ बनाइए।
धरती की चौड़ी रेखा (ㅡ) लीजिए। उस पर ऊपर की ओर छोटी रेखा जोड़िए। यही ㅗ है, जिसे "ओ" पढ़ते हैं।
4. "न" (na) का खंड बनाइए। हर अक्षर कहाँ बैठेगा?
व्यंजन ㄴ + स्वर ㅏ। ㅏ खड़ा स्वर है, इसलिए ㄴ उसकी बाईं ओर बैठता है: 나।
5. "गो" (go) हंगुल में लिखिए और बनावट समझाइए।
ㄱ + ㅗ। ㅗ चौड़ा स्वर है, इसलिए ㄱ ऊपर और ㅗ नीचे बैठता है: 고।
6. 아 (आ) जैसा खंड ㅇ से क्यों शुरू होता है?
हर खंड की शुरुआत में व्यंजन चाहिए। अक्षर-ध्वनि की शुरुआत में ㅇ मौन रहता है, वह सिर्फ़ जगह भरता है और खंड "आ" पढ़ा जाता है।
आम गलतियाँ
- हंगुल को चीनी चिह्नों जैसी चित्र-लिपि समझ लेना। यह वर्णमाला है: हर अक्षर एक ध्वनि है।
- खंड के भीतर अक्षर ग़लत क्रम में पढ़ना। पहले व्यंजन, फिर स्वर, फिर अंतिम व्यंजन पढ़िए।
- ㅇ को हमेशा "ङ" बोलना। खंड की शुरुआत में यह मौन है; अंत में यह ङ है।
- यह भूल जाना कि अतिरिक्त रेखा का मतलब ज़्यादा साँस या ज़ोर है, इसलिए ㅋ और ㄱ एक नहीं हैं।