ई-कचरा क्या है?
ई-कचरा (इलेक्ट्रॉनिक कचरा) वह हर बिजली या इलेक्ट्रॉनिक सामान है जो पुराना, टूटा या बेकार हो गया: मोबाइल, चार्जर, कंप्यूटर, प्रिंटर, टीवी, फ़्रिज, बैटरी और तार। हम फ़ोन-लैपटॉप जल्दी बदलते हैं, इसलिए यह ढेर हर साल बढ़ता है। भारत दुनिया के सबसे ज़्यादा ई-कचरा पैदा करने वाले देशों में है।
ई-कचरे के ख़तरे
ई-कचरे में काम की धातुएँ (ताँबा, सोना, चाँदी) भी हैं और हानिकारक भी। खुले में फेंकने या धातु निकालने के लिए जलाने पर ये ज़हर बाहर आते हैं।
- सीसा (Lead) (पुरानी स्क्रीन, सोल्डर): दिमाग़, नसों और गुर्दों को नुकसान, ख़ासकर बच्चों में।
- पारा (Mercury) (कुछ लैंप, स्विच): नसों और दिमाग़ को नुकसान।
- कैडमियम (बैटरी): गुर्दे और हड्डियाँ।
- प्लास्टिक जलाने से डाइऑक्सिन जैसी ज़हरीली गैसें; साँस की बीमारी।
पर्यावरण पर असर
मिट्टी: धातुएँ रिसकर फ़सलों में। पानी: भूजल और नदियों तक। हवा: जलाने का धुआँ। हाथ से ई-कचरा तोड़ने वाले अनौपचारिक मज़दूर, कई बार बच्चे, सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं।
ई-कचरा प्रबंधन
सबसे अच्छा तरीका है 3R, इसी क्रम में:
- कम करें (Reduce): ज़रूरत भर ख़रीदें, उपकरण ज़्यादा समय चलाएँ।
- दोबारा उपयोग (Reuse): मरम्मत, अपग्रेड, बेचना या दान; पुर्ज़ों का फिर उपयोग।
- पुनर्चक्रण (Recycle): बाकी को अधिकृत रीसाइक्लर को दें, जो सुरक्षित तरीके से धातु और प्लास्टिक निकालता है।
भारत में ई-कचरा नियम
ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 (पर्यावरण मंत्रालय, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत) विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) पर आधारित हैं: जो कंपनी सामान बनाती या बेचती है, उसे पुराना सामान वापस लेकर रीसायकल करवाना होता है। उपभोक्ता ई-कचरा केवल अधिकृत कलेक्शन सेंटर या टेक-बैक योजना को दें, कूड़ेदान में कभी नहीं।
तकनीक के उपयोग का स्वास्थ्य पर असर: शरीर
कंप्यूटर और फ़ोन घंटों चलाने से हो सकता है:
- आँखों पर ज़ोर (सूखी, थकी, धुँधली आँखें): तेज़ स्क्रीन को घूरना और कम पलक झपकाना।
- गर्दन और कमर दर्द: फ़ोन पर झुकना या नीची स्क्रीन ('टेक्स्ट नेक')।
- बार-बार के ज़ोर से चोट (RSI) और कार्पल टनल: लंबी टाइपिंग या गेमिंग से कलाई-उँगलियों में दर्द।
एर्गोनॉमिक्स
एर्गोनॉमिक्स यानी काम की जगह ऐसी बनाना कि शरीर आराम में रहे। सुझाव: स्क्रीन का ऊपरी भाग आँख की ऊँचाई पर, लगभग एक हाथ दूर; पीठ सीधी और सहारे वाली; पैर ज़मीन पर सपाट; टाइप करते समय कलाई सीधी; कमरे में अच्छी रोशनी, चमक नहीं।
तकनीक के उपयोग का स्वास्थ्य पर असर: मन
इंटरनेट या गैजेट की लत यानी पढ़ाई, नींद या रिश्तों को नुकसान होने पर भी स्क्रीन पर काबू न रहना। लक्षण: फ़ोन के बिना बेचैनी, समय का पता न चलना, खाना या नींद छोड़ना। रात में ज़्यादा स्क्रीन नींद बिगाड़ती है क्योंकि तेज़ रोशनी दिमाग़ को जगाए रखती है। सोशल मीडिया पर तुलना से तनाव और उदासी भी हो सकती है।
अच्छी आदतें: आँखों के लिए 20-20-20 नियम, सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन बंद, खाने और परिवार के समय बिना स्क्रीन, बाहर खेल और व्यायाम, फ़ोन में स्क्रीन-टाइम सीमा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ई-कचरा = फेंका गया बिजली/इलेक्ट्रॉनिक सामान
- ज़हरीली धातुएँ: सीसा, पारा, कैडमियम (+ जलाने से डाइऑक्सिन)
- प्रबंधन का क्रम: कम करें → दोबारा उपयोग → पुनर्चक्रण (अधिकृत रीसाइक्लर)
- ई-कचरा (प्रबंधन) नियम 2022: EPR = बनाने वाला वापस ले
- आँखों की देखभाल: 20-20-20 (20 मिनट, 20 फ़ुट, 20 सेकंड)
हल किए गए उदाहरण
1. 3R की पसंद के क्रम में लगाइए: (a) पुराना लैपटॉप अधिकृत रीसाइक्लर को भेजना, (b) लैपटॉप ठीक करवाकर चचेरे भाई को देना, (c) पुराना चल रहा है तो नया न ख़रीदना।
पहले कम करें (c), फिर दोबारा उपयोग (b), फिर पुनर्चक्रण (a)। कम करने से कचरा बनता ही नहीं, इसलिए वह पहले।
2. एक कबाड़ी ताँबा निकालने के लिए खुले में तार जलाता है। दो नुकसान बताइए।
प्लास्टिक जलने से डाइऑक्सिन जैसी ज़हरीली गैसें निकलती हैं जो साँस की बीमारी करती हैं; धातु के अवशेष आस-पास की मिट्टी और पानी को दूषित करते हैं।
3. रोहन 4 घंटे गोद में लैपटॉप रखकर सिर झुकाए पढ़ता है। दो समस्याएँ और दो उपाय बताइए।
समस्याएँ: गर्दन/कमर दर्द और आँखों पर ज़ोर। उपाय: लैपटॉप मेज़ पर रखें और स्टैंड से स्क्रीन आँख की ऊँचाई पर लाएँ; छोटे ब्रेक के साथ 20-20-20 अपनाएँ।
4. मोबाइल कंपनी के लिए विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) का क्या अर्थ है?
कंपनी को अपने पुराने फ़ोन वापस लेने (टेक-बैक) की व्यवस्था करनी होगी और उन्हें अधिकृत रीसाइक्लर से रीसायकल करवाकर हर साल के संग्रह लक्ष्य पूरे करने होंगे।
आम गलतियाँ
- पुरानी बैटरी और फ़ोन सामान्य कूड़ेदान में डालना। इन्हें ई-कचरा कलेक्शन पॉइंट पर देना चाहिए।
- पुनर्चक्रण को पहला विकल्प मानना। कम करना और दोबारा उपयोग पहले आते हैं।
- यह सोचना कि स्क्रीन से केवल आँखों पर असर होता है। मुद्रा, कलाई, नींद और मन पर भी असर पड़ता है।
- ज़्यादा पैसे के लालच में ई-कचरा जलाने वाले अनौपचारिक लोगों को बेचना। इससे मज़दूर और पर्यावरण दोनों ज़हरीले होते हैं; अधिकृत रीसाइक्लर को दें।