South 고등학교 2학년 Sport Culture
अध्याय: 2
1. Sport and the humanities
What sport culture is · History and philosophy of sport · Sport in literature and art
- खेल और समाज – खेल समाजशास्त्र देखता है कि खेल और समाज एक-दूसरे को कैसे बदलते हैं। शारीरिक गतिविधि खुले खेल-कूद से शुरू होकर शारीरिक मनोरंजन और फिर खेल (स्पोर्ट) तक जाती है, जिसमें तय नियम, संगठन और गंभीर मुकाबला होता है। आधुनिक खेल ढीले-ढाले स्थानीय लोक खेलों से बने: औद्योगिक युग में लिखित नियम, क्लब और शासी निकाय आए, और लगभग 1950 के बाद टीवी, पैसे और यात्रा ने खेल को वैश्विक और पेशेवर बना दिया। आज खेल, मीडिया और प्रायोजक एक "सुनहरे त्रिकोण" में बँधे हैं। हर समूह बराबर नहीं खेलता: पैसा, समय, सुविधा, भेदभाव और रूढ़ियाँ बाधा बनती हैं, इसलिए सरकारें और क्लब महिलाओं, दिव्यांगों, बुज़ुर्गों और कम आय वाले परिवारों की बराबर पहुँच के लिए काम करते हैं। खेल का अँधेरा पक्ष भी है, यानी विचलन, जैसे डोपिंग, हिंसा और मैच फ़िक्सिंग, जिसे नियम, जाँच और क़ानून रोकते हैं। खेल सेहत, पहचान और एकता बना सकता है, पर बाँट भी सकता है।
- ओलंपिक आंदोलन – प्राचीन ओलंपिक खेल यूनान के ओलंपिया में, परंपरा के अनुसार 776 ई.पू. में, देवता ज़्यूस के धार्मिक उत्सव के रूप में शुरू हुए और हर चार साल में होते थे। आज़ाद यूनानी पुरुष दौड़, कुश्ती, मुक्केबाज़ी, रथ-दौड़ और पेंटाथलॉन में भाग लेते थे; विजेता को जैतून का मुकुट मिलता था और "पवित्र संधि" से खिलाड़ी सुरक्षित आ-जा सकते थे। ये खेल लगभग 393 ईस्वी में बंद हुए। पियरे दे कुबर्तें ने 1894 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) बनाई और 1896 में एथेंस में पहले आधुनिक खेल हुए। आज ओलंपिक आंदोलन में IOC, अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ और राष्ट्रीय ओलंपिक समितियाँ हैं। प्रतीक: पाँच छल्ले, मशाल, आदर्श वाक्य "तेज़, ऊँचा, मज़बूत – साथ मिलकर"; मूल्य: उत्कृष्टता, मित्रता, सम्मान।
2. Competitive sport culture
Features of competition culture · Organisation of sport events · Values of sport
- खेल और समाज – खेल समाजशास्त्र देखता है कि खेल और समाज एक-दूसरे को कैसे बदलते हैं। शारीरिक गतिविधि खुले खेल-कूद से शुरू होकर शारीरिक मनोरंजन और फिर खेल (स्पोर्ट) तक जाती है, जिसमें तय नियम, संगठन और गंभीर मुकाबला होता है। आधुनिक खेल ढीले-ढाले स्थानीय लोक खेलों से बने: औद्योगिक युग में लिखित नियम, क्लब और शासी निकाय आए, और लगभग 1950 के बाद टीवी, पैसे और यात्रा ने खेल को वैश्विक और पेशेवर बना दिया। आज खेल, मीडिया और प्रायोजक एक "सुनहरे त्रिकोण" में बँधे हैं। हर समूह बराबर नहीं खेलता: पैसा, समय, सुविधा, भेदभाव और रूढ़ियाँ बाधा बनती हैं, इसलिए सरकारें और क्लब महिलाओं, दिव्यांगों, बुज़ुर्गों और कम आय वाले परिवारों की बराबर पहुँच के लिए काम करते हैं। खेल का अँधेरा पक्ष भी है, यानी विचलन, जैसे डोपिंग, हिंसा और मैच फ़िक्सिंग, जिसे नियम, जाँच और क़ानून रोकते हैं। खेल सेहत, पहचान और एकता बना सकता है, पर बाँट भी सकता है।
- खेल प्रबंधन: खेल का आयोजन – खेल प्रबंधन का मतलब है खेल की योजना बनाना, व्यवस्था करना, नेतृत्व करना और जाँचना, ताकि लोग सुरक्षित और मज़े से खेलें। प्रतियोगिता के लिए: साफ़ लक्ष्य तय करो और कौन, क्या, कब, कहाँ का जवाब दो; ढाँचा चुनो (नॉकआउट, राउंड-रॉबिन, लीग या मिला-जुला) और मैच व समय निकालो; भूमिकाएँ बाँटो और काम सूची या ऐप पर टिक करो; बजट और जोखिम योजना बनाओ; आयोजन करो; फिर मूल्यांकन और रिपोर्ट करो (योजना → करना → जाँच → सुधार)। खेल खुद भी कई स्तरों पर संगठित है: स्कूल और क्लब से ज़िला, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महासंघ तक, साथ में सरकार की खेल नीति और क्लब, व्यावसायिक जिम, स्कूल खेल व अनौपचारिक खेल जैसे रूप।
- खेल में निष्पक्ष खेल – निष्पक्ष खेल यानी नियमों के अनुसार और खेल की भावना से खेलना: विरोधियों, अधिकारियों, साथियों और खुद का सम्मान। नियम मैदान, समय, अंक और मना चीज़ें तय करते हैं ताकि सबको बराबर और सुरक्षित मौका मिले। खेल में भूमिकाएँ हैं: खिलाड़ी, कप्तान, रेफ़री या अंपायर, कोच और दर्शक। हाथ मिलाना, घायल विरोधी की मदद करना और फ़ैसला मानना खेल भावना है; बेईमानी, जान-बूझकर फ़ाउल, डोपिंग और मैच फ़िक्सिंग निष्पक्ष खेल तोड़ते हैं और उनकी सज़ा कार्ड या प्रतिबंध है। ओलंपिक आंदोलन के मूल्य हैं उत्कृष्टता, मित्रता और सम्मान। निष्पक्ष प्रतियोगिता बनाने के लिए प्रारूप (नॉकआउट या राउंड-रॉबिन), समय-सारणी, भूमिकाएँ और सुरक्षा की योजना चाहिए।