South 고등학교 2학년 Art Appreciation and Criticism
अध्याय: 2
1. Appreciation
Art in historical and social contexts · Artists and works related to my life · Viewing in exhibitions · Contextual analysis
- कला का इतिहास: गुफा की दीवारों से आज तक – मनुष्य कम से कम 40,000 साल से कला बना रहा है। प्रागैतिहासिक कला में गुफा की दीवारों पर जानवर और हाथ की छाप हैं। प्राचीन सभ्यताओं ने शासकों, देवताओं और परलोक के लिए कला बनाई। शास्त्रीय परंपराएँ यूनान-रोम, भारत, चीन, अफ़्रीका और अमेरिका में पनपीं। पुनर्जागरण ने परिप्रेक्ष्य और यथार्थ दिया; आधुनिक कला (लगभग 1860 से) ने ये नियम तोड़े; समकालीन कला कोई भी सामग्री अपनाती है। किसी कलाकृति को समझने के लिए वर्णन, विश्लेषण, संदर्भ में व्याख्या और कारण सहित निर्णय करें।
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।
- कला प्रदर्शनी: योजना, सजावट और कला को देखना – प्रदर्शनी कलाकृतियों का योजना से किया गया सार्वजनिक प्रदर्शन है, जहाँ कृतियाँ, दर्शक और स्थान मिलते हैं। स्थान हो सकते हैं: संग्रहालय, कला-दीर्घा, सार्वजनिक जगह, ऑनलाइन। योजना में विषय और दर्शक चुनना, कृतियाँ छाँटना, फिर उन्हें सजाना, रोशनी देना और परिचय-पर्ची लगाना शामिल है। दर्शक वर्णन, विश्लेषण, व्याख्या और मूल्यांकन करते हैं।
2. Criticism
Using knowledge in criticism · Methods of art criticism · Responses from viewpoints · Art and social issues
- कला आलोचना: कलाकृति को कैसे देखें और परखें – कला आलोचना यानी कला के बारे में सोच-समझकर बात करना। इसके चार चरण हैं: जो दिखे उसका वर्णन, हिस्से कैसे रखे हैं उसका विश्लेषण, अर्थ या भाव की व्याख्या, और कारण देकर निर्णय। आलोचक अलग-अलग दृष्टिकोण (रूप, भाव, संदर्भ) से देखते हैं और सही कला-शब्द इस्तेमाल करते हैं। यही तरीका चित्र, मूर्ति, इमारत, नृत्य, नाटक और फ़िल्म पर भी चलता है।
- कला और समाज: कला हमारी दुनिया को कैसे गढ़ती है – कला सिर्फ़ दीवार पर टाँगने की चीज़ नहीं है। यह भावनाओं की भाषा है, जिससे लोग वह कहते हैं जो शब्दों में नहीं कहा जाता। कला निजी हो सकती है, यानी एक व्यक्ति का नज़रिया, या सामूहिक, यानी समूह द्वारा और समूह के लिए, जो भित्तिचित्रों, लोक कला, गीतों और त्योहारों के ज़रिए समुदाय की याद और पहचान लेकर चलती है। कला समस्याओं की ओर इशारा करके बदलाव ला सकती है, इसीलिए उस पर अक्सर रोक (सेंसरशिप) लगी है; अभिव्यक्ति की आज़ादी और उसकी सीमाओं पर आज भी बहस होती है। कला यह भी दिखाती है कि ताकत किसके पास है: कला कौन बनाता है, किसे दिखाया जाता है, और रूढ़ छवियाँ दोहराई जाती हैं या तोड़ी जाती हैं। आखिर में, कला हर क्षेत्र से जुड़ी है: विज्ञान, तकनीक, संगीत, नृत्य और शहर नियोजन तक। किसी कृति को समझने के लिए पूछो: किसने बनाई, किसके लिए, क्यों, और उसने क्या बदला?