Germany Jahrgangsstufe 13 Computer Science
अध्याय: 4
1. Internet of Things
Internet of Things
- इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) – इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) रोज़मर्रा की चीज़ों का ऐसा नेटवर्क है जिनमें सेंसर, छोटा कंप्यूटर और नेटवर्क कनेक्शन होता है, ताकि वे डेटा इकट्ठा करें, इंटरनेट पर भेजें और उस पर काम करें. सेंसर भौतिक बदलाव को डेटा बनाता है, माइक्रोकंट्रोलर उसे संसाधित करता है, नेटवर्क (Wi-Fi, ब्लूटूथ, ज़िगबी, 4G/5G, LoRa) उसे क्लाउड या ऐप तक ले जाता है, और एक्चुएटर आदेश को काम में बदलता है. IoT को तीन परतों में समझते हैं: संवेदन, नेटवर्क और ऐप्लिकेशन. यह सुविधा और ऊर्जा बचत देता है, पर मज़बूत गोपनीयता और सुरक्षा चाहिए.
2. Artificial intelligence
Artificial intelligence
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): मशीनें सोचना कैसे सीखती हैं – कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence, AI) कंप्यूटर प्रणाली की वह क्षमता है जिससे वह ऐसे काम करती है जिनमें आम तौर पर इंसानी दिमाग़ लगता है: देखना, बोली समझना, फ़ैसला करना और सीखना। AI प्रणाली एक एजेंट है जो महसूस करती है, सोचती है और काम करती है। पुरानी AI इंसानों के लिखे नियमों पर चलती थी। आज की AI ज़्यादातर मशीन लर्निंग से चलती है: वह ढेर सारे लेबल वाले उदाहरणों (डेटा) से ख़ुद नियम ढूँढती है। न्यूरल नेटवर्क सरल इकाइयों की परतें हैं जिनकी कड़ियों की ताकत (भार) प्रशिक्षण में बदलती है। AI नक्शों, अनुवाद, स्वास्थ्य, खेती और खेलों में काम आती है। एकतरफ़ा डेटा से यह ग़लत या पक्षपाती हो सकती है, इसलिए इंसान को इसे जाँचना, निजता बचाना और ज़िम्मेदार रहना चाहिए।
3. Formal languages and automata
Formal languages and automata
- परिमित अवस्था मशीन और औपचारिक भाषाएँ – परिमित अवस्था मशीन (FSM) में अवस्थाओं का एक सीमित समूह, इनपुट चिह्नों की वर्णमाला, एक आरंभ अवस्था, हर चिह्न पर अगली अवस्था बताने वाला संक्रमण नियम, और (स्वीकारक के लिए) स्वीकार अवस्थाएँ होती हैं। यह इनपुट स्ट्रिंग को एक-एक चिह्न पढ़ती है; अंत में स्वीकार अवस्था में हो तो स्ट्रिंग स्वीकार। मीली मशीन हर संक्रमण पर आउटपुट भी देती है। FSM जिन स्ट्रिंग्स को स्वीकार करती है वे रेगुलर भाषा बनाती हैं, जिसे रेगुलर एक्सप्रेशन से भी लिखा जा सकता है। कोष्ठकों जैसी नेस्टिंग वाली भाषाएँ कॉन्टेक्स्ट-फ़्री हैं और BNF नियमों या सिंटैक्स आरेख से लिखी जाती हैं।
4. Algorithms, complexity and computability
Algorithms, complexity and computability
- संगणनात्मक जटिलता: आसान, कठिन और असंभव समस्याएँ – जटिलता बताती है कि इनपुट का आकार n बढ़ने पर कदम कितनी तेज़ी से बढ़ते हैं। बहुपद (n, n², n³) एल्गोरिदम संभालने लायक (ट्रैक्टेबल) हैं; घातीय (2ⁿ) और क्रमगुणित (n!) बहुत जल्दी बेकाबू हो जाते हैं। कुछ समस्याएँ जाँचने में आसान पर हल करने में कठिन (NP) हैं। हॉल्टिंग समस्या जैसी कुछ समस्याएँ किसी एल्गोरिदम से हल ही नहीं हो सकतीं।