France Quatrième Moral and Civic Education
अध्याय: 2
1. Rule of law and freedoms
Fundamental rights and freedoms · Rule of law · Press freedom and freedom of information · Justice and minors’ rights
- नागरिक स्वतंत्रताएँ और नागरिक अधिकार – नागरिक स्वतंत्रताएँ वे आज़ादियाँ हैं जिन्हें सरकार छीन नहीं सकती: बोलना, प्रेस, धर्म, शांतिपूर्ण सभा, निजता और पुलिस व अदालत से न्यायपूर्ण व्यवहार (उचित प्रक्रिया)। नागरिक अधिकार बराबर व्यवहार की गारंटी हैं, ताकि नस्ल, जाति, धर्म, लिंग या विकलांगता के कारण किसी को नौकरी, स्कूल, वोट या सेवाओं से वंचित न किया जाए। ज़्यादातर संविधान इन्हें अधिकार-पत्र में लिखते हैं और अदालतें इनकी रक्षा करती हैं। कोई आज़ादी असीमित नहीं: न्यायपूर्ण, क़ानूनी सीमाएँ सार्वजनिक सुरक्षा और दूसरों के अधिकार बचाती हैं। बराबर अधिकार जन-आंदोलनों से मिले: महिलाओं का मताधिकार, भारत में छुआछूत पर रोक, अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन, रंगभेद का अंत। फिर सरकारें भेदभाव-विरोधी क़ानून और आरक्षण जैसी नीतियाँ लाती हैं, और बहुमत के शासन तथा अल्पसंख्यक अधिकारों में संतुलन रखती हैं।
- क़ानून का शासन (Rule of Law) – क़ानून के शासन (विधि का शासन) का अर्थ है कि सरकार और उसके नेता समेत हर व्यक्ति एक-से, पहले से ज्ञात क़ानून माने, जिन्हें निष्पक्ष और स्वतंत्र अदालतें बराबरी से लागू करें। मुख्य सिद्धांत हैं: क़ानून की सर्वोच्चता, क़ानून के सामने समानता, साफ़ और सार्वजनिक क़ानून, निष्पक्ष सुनवाई, अधिकारों की रक्षा और शक्तियों का पृथक्करण। क़ानून खुली प्रक्रिया से बनते-बदलते हैं, अदालतें उन्हें संविधान या अधिकार-पत्र पर परख सकती हैं, और देश संधियों से अंतरराष्ट्रीय क़ानून मानते हैं।
- मीडिया साक्षरता (Media Literacy) – मीडिया साक्षरता मीडिया को पढ़ने, उस पर सवाल करने और खुद बनाने का हुनर है: समाचार, विज्ञापन, वीडियो, पोस्ट, फ़िल्म और गेम। हर मीडिया पाठ किसी ने, किसी उद्देश्य से, किसी दर्शक के लिए बनाया है, और उसमें ऐसे रूप, परिपाटियाँ और तकनीकें हैं जो हमारी भावना बदलती हैं। मीडिया-साक्षर व्यक्ति मानने या शेयर करने से पहले स्रोत, सबूत, दूसरे स्रोत और मूल जाँचता है, पूर्वाग्रह और फ़िल्टर बबल पहचानता है, और ज़िम्मेदारी से अपना मीडिया बनाता है।
- न्याय व्यवस्था: विवाद और अपराध कैसे सुलझाए जाते हैं – न्याय व्यवस्था वे नियम, लोग और अदालतें हैं जिनसे समाज विवादों को निष्पक्ष ढंग से सुलझाता है और अपराधों से निपटता है। बहुत-से विवाद अदालत के बिना बातचीत, मध्यस्थता या पंचाट (ADR) से ख़त्म होते हैं। दीवानी मामले पक्षों के बीच होते हैं और मुआवज़े पर ख़त्म होते हैं; फ़ौजदारी मामले राज्य चलाता है और सज़ा हो सकती है। सुनवाई में दोनों पक्ष सबूत रखते हैं; दीवानी में 'संभावना के संतुलन' पर और फ़ौजदारी में 'संदेह से परे' साबित करना होता है। हारा पक्ष ऊपर की अदालत में अपील कर सकता है। जज स्वतंत्र होने चाहिए। बच्चों के लिए किशोर न्यायालय होते हैं जो सुधार और सुरक्षा पर ध्यान देते हैं।
2. Security and national defence
Public order and personal safety · National sovereignty and defence
- क़ानून का शासन (Rule of Law) – क़ानून के शासन (विधि का शासन) का अर्थ है कि सरकार और उसके नेता समेत हर व्यक्ति एक-से, पहले से ज्ञात क़ानून माने, जिन्हें निष्पक्ष और स्वतंत्र अदालतें बराबरी से लागू करें। मुख्य सिद्धांत हैं: क़ानून की सर्वोच्चता, क़ानून के सामने समानता, साफ़ और सार्वजनिक क़ानून, निष्पक्ष सुनवाई, अधिकारों की रक्षा और शक्तियों का पृथक्करण। क़ानून खुली प्रक्रिया से बनते-बदलते हैं, अदालतें उन्हें संविधान या अधिकार-पत्र पर परख सकती हैं, और देश संधियों से अंतरराष्ट्रीय क़ानून मानते हैं।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: देश अपने लोगों को कैसे सुरक्षित रखता है – राष्ट्रीय सुरक्षा का अर्थ है देश के लोगों, भूमि, स्वतंत्रता, लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था को गंभीर नुक़सान से बचाना। ख़तरे सैन्य (सशस्त्र हमला) या ग़ैर-सैन्य (आतंकवाद, साइबर हमले, आपदाएँ, महामारी) हो सकते हैं। सुरक्षा तंत्र के तीन हिस्से हैं: सशस्त्र सेनाएँ, ग़ैर-सैन्य सेवाएँ, और निर्णय लेने वाले नेता। संकट एक चक्र में संभाले जाते हैं: रोकथाम, तैयारी, कार्रवाई, पुनर्निर्माण। तैयार नागरिक पूरे देश को मज़बूत बनाते हैं।